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इंडिया न्यूज़ से निकाले गए कर्मियों ने बनाया संगठन, संस्थान से तीन महीने की सैलरी मुआवज़े के रूप में देने की मांग

इंडिया न्यूज़ से हाल ही में निकाले गए 70 से अधिक कर्मचारियों ने साथ जुट कर संस्थान के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी शुरू कर दी है. सभी पीड़ित कर्मचारी रातों-रात लिए गए छंटनी के फैसले से सड़क पर आ गए हैं. संस्थान ने न तो उन्हें निकालने से पहले नोटिस दिया न ही तीन महीने की सैलरी मुआवज़े के रूप में दी.

निकाले गए वर्कर्स का कहना है कि, सालों साल संस्थान के लिए काम करने के बाद भी संस्थान ने एक बार भी ये नहीं सोचा के उनके घर चूल्हा कैसे जलेगा?

इंडिया न्यूज़ के पीड़ित कर्मियों की मदद को एक युवा वकील निष्ठां अग्रवाल आगे आ आयी हैं और उन्होंने आश्वासन दिया है के पत्रकारों के हक़ की इस लड़ाई में वो पूरी मदद करेंगी और बहुत ही कम खर्च में इस लड़ाई को अदालत में लड़ा जा सकता है. बिना नोटिस बिना मुआवज़ा रातों-रात मीडिया कर्मियों को नौकरी से निकाल कर भूखे मरने के लिए छोड़ दिया गया है.

सभी पीड़ित जल्दी ही दिल्ली प्रेस क्लब में एक जुट हो कर आगे की रणनीति बनाएंगे. सूत्रों के अनुसार पीड़ित कर्मी कालका जा कर वहाँ के पत्रकारों के साथ वहाँ की भाजपा विधानसभा प्रत्याशी शक्ति रानी जी से मिल कर अपनी व्यथा व्यक्त करने का भी प्लान बना रहे हैं. शक्ति रानी जी इंडिया न्यूज़ के संस्थापक और राज्य सभा सांसद कार्तिकेय शर्मा की माताजी हैं.

अगर आप भी इंडिया न्यूज़ की ऐसी ही नीतियों से पीड़ित हैं तो इस संगठन में शामिल हो सकते हैं. तीन महीने की सैलरी मुआवज़ा आपका हक़ है और अगर आप साथ मिल कर आवाज़ उठाएंगे तो आपको आपका हक़ मिलने से कोई नहीं रोक सकेगा.

इस लिंक के माध्यम से आप संगठित हो सकते हैं- इंडिया न्यूज विक्टिम, संपर्क ईमेल: [email protected]

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