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सुख-दुख

किसी से न डरने वाली बेहद निर्भीक, साहसी, बिंदास, स्पष्ट वक्ता, योग्य और बेहद मेहनती!

अश्विनी श्रीवास्तव-

Ira Jha मैम नहीं रहीं. बीमारी की हालत में उनका निधन दिल्ली एम्स में हो गया . मैं उन्हें मैम ही कहकर संबोधित करता था क्योंकि वह लंबे समय तक मेरी बॉस रही हैं.

मेरा परिचय उनसे तब हुआ था, जब हिंदुस्तान अखबार के एनसीआर एडिशन्स लांच करने का जिम्मा उन्हें दिया गया था. अपनी टीम में एक छोटी सी जिम्मेदारी के लिए नवभारत टाइम्स की उनकी एक महिला मित्र और पूर्व सहयोगियों ने मेरा नाम सजेस्ट किया तो उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स के बीच के क़ानूनी समझौते को दरकिनार करके मुझे अपनी टीम में चुन लिया.

उनके क़ानूनी पचड़ों के परवाह न करने पर मुझे आश्चर्य तो हुआ लेकिन वहाँ उनके अधीन काम करने के बाद मुझे पता चल गया कि वह ऐसी ही थीं. किसी से न डरने वाली बेहद निर्भीक, साहसी, बिंदास, स्पष्ट वक्ता, योग्य और बेहद मेहनती.

उनके इन्हीं गुणों के कारण उनसे ईर्ष्या करने वालों या उनके शत्रुओं की तादाद उनके मित्रों की ही तरह बहुत ज़्यादा थी.

मगर इरा जी हर फ़िक्र को अपनी बिंदास और ज़ोरदार ठहाकों वाली हँसी या सौम्य मुस्कान में उड़ा दिया करती थीं.

मीडिया के अपने करियर में इरा जी ने ख़ुद को सिर्फ़ महिला समझकर उसी के मुताबिक़ काम चुनने की बजाय वैसे ही काम चुने , जैसे कि कोई तेज तर्रार पत्रकार चुनता है. मसलन नक्सल बेल्ट और घनघोर जंगलों में आदिवासियों या नक्सलियों के बीच जाकर वहाँ से ख़बरें और आलेख लिखना, उनका प्रिय शग़ल था.
बेहद कम उम्र में उनका जाना बहुत दुखद है. इस तरह उन्हें श्रद्धांजलि देते समय दिल में ख़ासा दुख है. लेकिन नियति का यही फ़ैसला है.

इरा मैम आप जहाँ भी रहें, उसी अंदाज़ में हँसी ख़ुशी बिखेरती रहें, जिस अंदाज़ में मैंने आपको तब देखा था. ईश्वर आपकी आत्मा को सद्गति एवं शांति प्रदान करे .


श्यामलाल यादव-

इरा झा जी नहीं रहीं. अभी-अभी पता चला. बहुत ही ज़िंदादिल थीं. ज़्यादा मिलना नहीं होता था लेकिन परिचित थीं. मई 1993 में मैं दिल्ली एक प्रशिक्षु के तौर पर आया तो उपभोक्ता फोरमों पर कोई स्टोरी कर रहा था. अनंत मित्तल जी उस समय जनसत्ता में थे और इन विषयों के विशेषज्ञ थे, अभी भी हैं. उनके घर गया था. इरा जी और ईशान भी मिले थे. तब से थोड़ा-थोड़ा संपर्क था. इरा जी में भी अपने से कनिष्ठों के लिए ग़ज़ब का ममत्व भरा रहता था, जैसा कि अनंत जी में भी है. इरा जी मध्य प्रदेश के एक न्यायाधीश की पुत्री थीं और अनंत जी एक प्रसिद्ध गांधीवादी परिवार से हैं. इरा जी आख़िरी समय तक एक पत्रकार के रूप में सक्रिय रहीं. उनके निधन की खबर सन्न करने वाली है. इरा जी को सादर श्रद्धांजलि. ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें.

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