कोयंबटूर। ईशा फाउंडेशन, कोयंबटूर के चार कर्मचारियों और फाउंडेशन द्वारा संचालित एक स्कूल के पूर्व छात्र के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
यह मामला 2017 से 2019 के बीच कथित यौन शोषण से जुड़ा है, जिसमें एक छात्र ने अपने ही सहपाठी द्वारा बार-बार शोषण किए जाने की बात कही है। पीड़ित छात्र की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर 31 जनवरी को कोयंबटूर ग्रामीण के पेरूर स्थित ऑल वीमेन पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।
अंग्रेजी अखबार द हिंदू की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, FIR में आरोपी छात्र को पहले नंबर पर नामजद किया गया है। वहीं, हॉस्टल वार्डन निशांत कुमार, कर्मचारी प्रीति कुमार, स्कूल के प्रिंसिपल प्रकाश सोमयाजी और जनरल कोऑर्डिनेटर स्वामी विभु को भी आरोपी बनाया गया है। इन पर POCSO एक्ट की धारा 9(l), 10, 21(2) और IPC की धारा 342 के तहत केस दर्ज हुआ है।
शिकायत के अनुसार, जब छात्र ने यह बात अपने हाउस पेरेंट्स यानी निशांत कुमार और प्रीति कुमार, स्कूल प्रिंसिपल प्रकाश सोमयाजी और स्वामी विभु को बताई, तो उसे परिजनों को कुछ भी न बताने की हिदायत दी गई। पीड़ित छात्र ने मार्च 2019 में ईमेल के जरिए अपने माता-पिता को पूरी जानकारी दी।
जब मां ने स्कूल प्रबंधन से संपर्क किया तो दो दिन तक कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जब उन्होंने पुलिस के पास जाने की चेतावनी दी, तब स्कूल ने बात की। FIR में यह भी कहा गया है कि स्कूल के प्रिंसिपल ने माता-पिता से सिर्फ वॉट्सऐप कॉल पर बात करने को कहा। साथ ही, आरोप लगाया गया कि आरोपी छात्र “प्रभावशाली परिवार” से है और इसलिए प्रबंधन ने कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की।
स्वामी विभु ने कथित तौर पर कहा कि “अगर पीड़ित लड़की होती, तो वह कार्रवाई करते।”
पीड़िता की मां ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है। यह मामला सामने आने के बाद ईशा फाउंडेशन पर गंभीर सवाल उठे हैं। पुलिस जांच जारी है।
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