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जैसलमेर में वरिष्ठ पत्रकार के रेस्टोरेंट पर कार्रवाई के खिलाफ जयपुर में आज 8वें दिन भी पत्रकारों का धरना जारी

जयपुर- जैसलमेर जिले में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रशासनिक निरंकुशता को लेकर पत्रकार संगठन आईएफडब्ल्यूजे का आज 8वें दिन भी धरना जारी हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी के काले कारनामों को छुपाने के लिए सरकार के भी हठधर्मिता पर उतर आई हैं। जिसके परिणाम स्वरूप सरकार अभी तक वार्ता करने की पहल तक नहीं कर रही हैं। जिसे लेकर आज धरना स्थल पर प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।

पत्रकार संगठन आईएफडब्ल्यूजे के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि संगठन सरकार से सकारात्मक बातचीत करने हेतु पहले दिन से ही तैयार हैं पर शायद सरकार खुद नहीं चाहती कि ये धरना समाप्त हो। राठौड़ ने कहा कि धरना शुरू होने के बाद सरकार ने जैसलमेर कलेक्टर का तबादला तो कर दिया। लेकिन कलेक्टर ने जैसलमेर रहते हुए जिस तरह के कारनामे किए हैं, उसके अनुसार उन्हें सजा दी जानी चाहिए थी, उसकी जगह उन्हें वित्त विभाग में महत्वपूर्ण पोस्टिंग देकर सरकार ने अपनी ही जीरो टॉलरेंस की नीति की खुलेआम धज्जियां उड़ाई हैं।

जिस कलेक्टर के विरुद्ध प्रदेशभर के पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश हैं, जिसके विरुद्ध जैसलमेर की आमजनता में गजब का गुस्सा हैं, जिसके विरुद्ध पर्यावरण प्रेमी सड़क पर उतर आए, उस कलेक्टर में आखिर कौनसी खासियत हैं, जो सिर्फ सरकार को ही नजर आ रही हैं, आमजन को नहीं?

उपेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि वे वर्ष 2004 से जैसलमेर स्थित डेजर्ट क्लब में विधिवत अनुमति के साथ ‘स्वाद रेस्टोरेंट’ का संचालन कर रहे हैं। जिसका दिसंबर 2025 तक का किराया अग्रिम जमा करा रखा था। उसके बावजूद जिला कलेक्टर ने विधि विरुद्ध जाकर रेस्टोरेंट को सीज करने और उसे जमींदोज करने की जो द्वेषपूर्ण कार्रवाई की हैं, जिसका सीधा अर्थ हैं कि उन्होंने एक पत्रकार की आजीविका को तबाह कर पत्रकार पर एक मानसिक और आर्थिक दबाव बनाने का ही काम किया हैं।

IAS प्रताप सिंह नाथावत ने जैसलमेर कलेक्टर रहते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने हेतु नियम विरुद्ध भू-आवंटन किए। जिसे लेकर जब खबरें प्रकाशित की गई और मामले को उजागर किया गया तो उसके प्रतिशोध में पत्रकार की आजीविका को नष्ट किया गया। स्वाद रेस्टोरेंट को तोड़कर कलेक्टर ने करीब 1 करोड़ से भी अधिक का आर्थिक नुकसान पहुंचाया हैं। जिसकी भरपाई की मांग, उस कलेक्टर को निलंबित करने की मांग को लेकर ही पूरे प्रदेश के पत्रकार 29 मार्च को जयपुर पहुंचे और शहीद स्मारक पर ये धरना प्रदर्शन शुरू किया। जिसको आज 7 दिन का समय हो गया, लेकिन सरकार ने अभी वार्ता करने की पहल तक नहीं की है, जिसके कारण पूरे पत्रकार जगत में भारी आक्रोश हैं।

कल दिनांक 05 और 06 अप्रैल को उपेन्द्र सिंह राठौड़ दिल्ली में देश भर के राष्ट्रीय पदाधिकारियों व प्रदेशाध्यक्षों के साथ होने वाली बैठक में भाग लेने जा रहे हैं, वहां संगठन प्रधानमंत्री कार्यालय को इस गंभीर विषय से अवगत करवाएगा‌।

इस धरना प्रदर्शन को लगातार चलाने हेतु संगठन ने प्रतिदिन एक जिले को जिम्मेदारी सौंपी है जिसके क्रम में आज सातवें दिन व कल आठवें दिन की जिम्मेदारी सिरोही जिले के पास है और उनका नेतृत्व जोधपुर संभाग प्रभारी विक्रम सिंह करणोत द्वारा किया जा रहा है। धरना स्थल पर आज दो दर्जन पत्रकार साथी उपस्थित हैं।

भवदीय,
(मनवीर सिंह चुंडावत)
प्रदेश महासचिव
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ), राजस्थान


आर्थिक वार,पत्रकारों के दमन का एक नया व सफल प्रयोग.. आजकल सामने से हमले करने की परिपाटी समाप्त हो गई है। अब अहंकारी प्रवृत्ति के अधिकारियों व राजनेताओं ने पत्रकारों को आर्थिक रूप से दबाने, कुचलने का एक सफल प्रयोग प्रारंभ कर दिया है।
और अधिकांश पत्रकारों के भीरू स्वभाव के चलते वह अपने इस नवीनतम प्रयोग में सफल भी हो रहे हैं…।
मारपीट,धमकी में तो साक्ष्य रह जाया करते थे, परन्तु इस तरह के ‘इकोनोमिकल अटेक’ को निजी का नाम देकर बड़ी सफाई से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
और तो और यदि कोई पीड़ित पत्रकार मुखर होकर इसके विरुद्ध खड़ा होने का साहस भी करें तो सबसे पहले पत्रकार ही व्यक्तिगत मामला बता कर किनारा कर लेते हैं।
और तो और इससे जुड़ी ख़बरों तक को प्रकाशित करने का साहस नहीं जुटा पाते…।
कुछ को उपर का डर लगता है या इशारा होता है कि खबर का ध्यान रखें…।
इसलिए अधिकारियों और नेताओं के गठजोड़ को अपने इस सफल प्रयोग में आनंद सा आने लगा है।
देखना तो यह है कि आने वाले समय में और कितने पत्रकार या उनके परिजन इस प्रयोग के शिकार होने वाले हैं,और फिर कितने उसे भी व्यक्तिगत कहकर पल्ला झाड़ते है…।
कहावत है कि कबूतर के आंख बंद कर लेने से बिल्ली शिकार बंद नहीं किया करती, उसकी तो फितरत ही शिकार करना है, आंखें तो कबूतरों को खोलनी होगी …। -उपेंद्र सिंह राठौर, वरिष्ठ पत्रकार

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