मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन करने वाले नेता का सरनेम क्या है – जरांगे या जारांगे? पाटिल या पाटील? अगर आप हिंदी मीडिया की वेबसाइटों पर तलाश करेंगे तो आपको जागरण से लेकर नवभारत टाइम्स तक सभी वेबसाइटों में ‘जरांगे’ भी मिलेगा और ‘जारांगे’ भी। बल्कि ABP न्यूज़ पर मुझे ‘जरंगे’ भी मिला।
इस सरनेम के अलग-अलग रूपों का कारण है इसका नयापन। यह सरनेम सितंबर 23 से पहले कभी नहीं सुना-पढ़ा गया। सो जब दो साल पहले यह नाम पहली बार चर्चा में आया तो हिंदी मीडिया के कॉपी एडिटरों ने इसकी अंग्रेज़ी स्पेलिंग – Jarange के आधार पर इसे जरांगे या जारांगे लिखना शुरू कर दिया, क्योंकि A का उच्चारण ‘अ’ भी होता है और ‘आ’ भी। जिसको जो सही लगा, उसने वैसी वर्तनी अपना ली। हालाँकि इस सरनेम की सही स्पेलिंग पता लगाना कोई मुश्किल काम नहीं था।
जिस संस्थान का मुंबई या महाराष्ट्र में दफ़्तर है, वह वहाँ से पता कर सकता था।
यदि मुंबई या महाराष्ट्र में दफ़्तर नहीं है तो भी मराठी वेबसाइटों या यूट्यूब चैनलों को पढ़-सुनकर मालूम किया जा सकता था कि सही क्या है। मैंने भी यही किया। पता चला कि मराठी वेबसाइटों में जरांगे लिखा जा रहा है। पिछले साल उनपर एक फ़िल्म बनी थी – ‘आम्ही जरांगे’। इससे भी कन्फ़र्म होता है कि जरांगे ही सही है।
जरांगे सही है, यह पता करने में मुझे कुल पाँच मिनट लगे। मगर हिंदी मीडिया संस्थान के कॉपी एडिटरों के पास पाँच मिनट का समय भी नहीं है। वैसे आज की तारीख़ में हिंदी की सभी प्रमुख वेबसाइटें जरांगे ही लिख रही हैं।
चलिए, जरांगे का फ़ैसला तो हो गया लेकिन पाटिल का क्या किया जाए? पाटिल लिखा जाए या पाटील? तथ्य यह है कि मराठी में पाटील चलता है लेकिन हिंदी वाले ज़माने से पाटिल ही लिखे जा रहे हैं चाहे ख़बर पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की हों या अभिनेत्री स्मिता पाटिल की, पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल की हो या क्रिकेटर संदीप पाटिल की।
अब ऐसे में यदि शुद्धता के नाम पर जरांगे पाटील लिखा जाए तो बाक़ी नामों को लिखते समय भी क्या पाटील लिखा जाएगा? स्मिता पाटील? शिवराज पाटील? यह संभव नहीं लगता। सो हिंदी में जरांगे पाटिल ही सही है।
पिछली शब्दचर्चा…
शब्दचर्चा (33) : Shanghai नहीं है शंघाई, न Tianjin है तियानजिन



