
बृजेश मिश्रा-
आज जौनपुर की ईमानदार पुलिस की कहानी बताता हूँ जो कि मुझसे ही जुड़ी है. 18 सितंबर को हमारे गांव के ही एक व्यक्ति ने द्वेष भावना से मुझ सहित मेरे परिवार के पांच लोगों के खिलाफ पूर्ण रूप से फ़र्ज़ी मुकदमा कप्तान अजयपाल शर्मा के आदेश पर लिखवा दिया.
हम सभी को इसकी जानकारी तब हुई जब थाने के दरोगा जी मामले की तहकीकात करने आए. मेरे परिवार से मिलने के बाद वह गांव में जानकारी करते हैं, उनके भी समझ में आ जाता है कि मामला फ़र्ज़ी है लेकिन फिर भी मेरा दिल नहीं माना.
मैंने एसपी अजयपाल शर्मा जी को फोन कर उनसे मिलने का समय मांगा तथा सुबह हम उनसे कार्यालय पर मिलने गए. उन्होंने पूरी जानकारी के बाद थाना मड़ियाहूं के एसओ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मामले की जानकारी ली.
एसओ ने भी बताया कि साहब मुकदमा फ़र्ज़ी लिखवाया गया है ऐसा कोई मामला जांच में नहीं मिला है. एसपी अजयपाल शर्मा ने एसओ को हमारे सामने ही मुकदमे को स्पंज कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश दिया.
उसके बाद विवेचना कर रहे दरोगा महेंद्र यादव जी का हमारे गांव के प्रधान जी के पास फोन आया प्रधान जी हमारे परिवार से ही है. दरोगा ने कहा जिनके खिलाफ मुकदमा लिखा गया है उन सभी तथा सात आठ गांव के लोग गवाह के रूप में थाने पर ले आइए.
दूसरे दिन हम सभी थाने पहुंचकर एसओ व विवेचक दरोगा जी से मिलकर, उन्होंने जो फार्मेलिटी बताया हमने उसे पूरा कर दिया. दरोगा जी बोले जाइए अब आपका काम हो गया.
10 दिन बीतने के बाद हम लोग लगातार एसओ व दरोगा के संपर्क में रहे तथा केस की जानकारी लेते रहे. वहां से भी आश्वासन मिलता रहा कि जब मामला फ़र्ज़ी है और एसपी साहब की जानकारी में है तो यह तो फाइनल रिपोर्ट लगनी ही है.
इस बीच मैंने भी कप्तान साहब को व्हाट्सएप मैसेज भेजकर बताया कि सर केस में अभी कुछ भी कार्य आगे नहीं बढ़ा. उधर से भी ok की रिप्लाय आयी. हम भी संतुष्ट हो गए कि अब कप्तान साहब के जानकारी में है तो कुछ भी गलत नहीं होगा.
लेकिन जब मामले के दो महीने बीत गए तब किसी तरह पता चला कि दरोगा महेंद्र यादव ने केस में चार्जशीट लगा कर ट्रेनिग में चले गए. जानकारी होते ही हमने इसकी सूचना तुरंत कप्तान अजयपाल शर्मा जी को वाट्सएप मैसेज के माध्यम से दिया तथा उनसे मिलने का समय मांगा.
उन्होंने फिर सुबह 10 बजे मिलने के लिए बुलाया। लेकिन दूसरे दिन घर में माता जी की तबीयत खराब हो गयी. मैं कप्तान साहब से नहीं मिल पाया. हम सभी बेकसूर लोगों को मुलजिम बना दिया गया और यह सब कप्तान की बेरुखी की वजह से हुआ. केस की फ़ाइल कोर्ट पहुंच चुकी है.
थोड़े से रुपयों के लालच में हम सबको मुलजिम बना दिया जौनपुर की ईमानदार पुलिस ने। यूपी के तेजतर्रार कप्तान को कई बार संदेश दिया केस के बारे में जानकारी देते रहे लेकिन उनकी ही निगरानी में निर्दोष लोग मुलजिम बना दिए गए. जबकि हम लोग आज भी चैलेंज कर रहे हैं किसी भी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करा लें.


