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इमरजेंसी में सेंसर था, पिंजरा जो अब बना है.. सबको मुबारक!

संजय कुमार सिंह-

निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान इंतजार करने के लिए ऐसे केबिन देखकर अच्छा लगा था। बाद में समझ में आया कि वह एयर कंडीशन की सुविधा देने के लिए था। पर पत्रकारों के लिए तो यह पिंजरा ही है।

राहुल गांधी पिंजरे में बंद मीडिया वालों से मिलने गये, उनका हाल पूछा, सहानुभूति जताई और संसद में कहा, बेचारे मीडिया वालों को बाहर निकाल दीजिए।

स्पीकर बोले: मीडिया वाले ‘बेचारे’ नहीं हैं। राहुल गांधी ने कहा, (ठीक है) “नॉट बेचारे” मीडिया वालों को बाहर निकाल दीजिए। जो मीडिया दस साल से राजा का बाजा बजा रहा है उसे पिंजरे बंद करना और निकलवाने की बात करना पत्रकारों का बेचारा होना ही है। और इसे राहुल गांधी ही समझ रहे हैं और ‘सरकार’ तो बेचारे मानने के लिए भी तैयार नहीं है।

वास्तविकता यह है कि पेशे की मांग और सरकार का रुख उन्हें ‘बेचारा’ ही बनाता है। कइयों को नौकरी छोड़नी पड़ी है या हटा दिया गया है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Smridhi Sharma

    July 30, 2024 at 8:49 pm

    सुना है कई मीडिया संस्थान जो बड़े नामी उद्योगपति संभाल रहे हैं उन्होंने आजकल किसी कर्मचारी की मृत्यु पर मुआवजा देना भी बंद कर दिया, वहां के बाकी कर्मचारी उनके परिवार की मदद अपनी सैलरी कटवा कर कर रहे हैं

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