यशवंत सिंह-
दिल्ली के लोग एक गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। हाल ही में जारी एक स्वतंत्र रिपोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शहर के अलग-अलग हिस्सों से लिए गए 30 पानी के नमूनों में से 23 पीने योग्य नहीं पाए गए। इसमें उच्च स्तर का टर्बिडिटी (गंदलापन), टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स (TDS), आयरन और माइक्रोबियल संदूषण पाया गया, जो गंभीर बीमारियों जैसे टाइफाइड और हैजा का कारण बन सकता है।


दिल्ली में जल संकट और जल माफिया का आतंक
दिल्ली की कई कॉलोनियों—संगम विहार, नांगलोई और शाहदरा—में लोग स्वच्छ जल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस संकट के बीच पानी की आपूर्ति में असमानता, पाइपलाइन की खराब स्थिति और दिल्ली जल बोर्ड की अक्षमता उजागर हुई है। संगम विहार में रहने वाली एक महिला ने बताया कि हर सुबह पानी के टैंकर के लिए लंबी कतार लगानी पड़ती है। कई बार टैंकर आता ही नहीं और जब आता है, तो उसमें गंदा और खारा पानी होता है, जिसे पीना खतरनाक हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी में 20,000 से अधिक अवैध बोरवेल संचालित हो रहे हैं। टैंकर माफिया इन बोरवेल से पानी निकालकर महंगे दामों पर बेच रहा है। गर्मियों में 2000 लीटर के टैंकर की कीमत ₹700 से बढ़कर ₹2000 तक पहुंच जाती है। यह माफिया प्रशासन की मिलीभगत से फल-फूल रहा है।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट फेल, अमोनिया से जहरीला हुआ पानी
दिल्ली में जल संकट का एक बड़ा कारण वजीराबाद जलाशय में गाद जमना और अमोनिया संदूषण है। रिपोर्ट में बताया गया कि यह जलाशय पहले 250 मिलियन गैलन पानी जमा कर सकता था, लेकिन अब इसकी क्षमता घटकर मात्र 16 मिलियन गैलन रह गई है। अमोनिया की अधिक मात्रा के कारण पानी पीने योग्य नहीं रहता, जिससे राजधानी के जल शोधन संयंत्र प्रभावित होते हैं।
रिपोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड की विफलता को उजागर करते हुए बताया गया है कि बोर्ड हर दिन पानी की गुणवत्ता की जांच करने का दावा करता है, लेकिन स्वतंत्र परीक्षण में यह पाया गया कि दिल्ली में सप्लाई होने वाला पानी गंभीर रूप से दूषित है।
पानी में घुला जहर: रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दिल्ली के कई इलाकों में सप्लाई होने वाले पानी में निम्नलिखित समस्याएं पाई गईं:
1. गंदलापन (Turbidity): पानी में गाद और अन्य कणों की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है। मालवीय नगर में टर्बिडिटी का स्तर 2.9 NTU था, जबकि मानक सीमा 1.0 NTU होती है।
2. TDS (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स): पानी में घुले ठोस कणों की मात्रा कई जगहों पर 1936 mg/L तक पाई गई, जो 500 mg/L की स्वीकार्य सीमा से लगभग चार गुना अधिक है।
3. क्लोरीन की कमी: पानी में क्लोरीन की मात्रा 0.03 mg/L पाई गई, जबकि सुरक्षित स्तर 0.2 mg/L होना चाहिए। इससे पानी में हानिकारक बैक्टीरिया जैसे ई.कोलाई पनप सकते हैं।
4. आयरन: कुछ इलाकों में पानी में लोहे की मात्रा 0.58 mg/L तक पाई गई, जिससे पानी पीने योग्य नहीं रहता और पेट से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
5. कठोरता (Hardness): द्वारका और अन्य इलाकों में पानी की कठोरता 592 mg/L तक दर्ज की गई, जो नलसाजी और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है।
दिल्ली सरकार के दावे हुए फेल
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार 24/7 स्वच्छ जल आपूर्ति के अपने वादे को पूरा करने में असफल रही है। दिसंबर 2024 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजिंदर नगर में एक पाइप से पानी पीकर दावा किया था कि दिल्ली में अब स्वच्छ जल उपलब्ध होगा। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, उसी इलाके से लिए गए पानी के नमूने में भी TDS और अन्य संदूषकों की उच्च मात्रा पाई गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि जिन 23 इलाकों में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया, उनमें से 21 इलाके AAP विधायकों के निर्वाचन क्षेत्र में आते हैं। इन क्षेत्रों में शाहदरा (विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल), नई दिल्ली (पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल), और कालकाजी (मुख्यमंत्री व जल मंत्री आतिशी) शामिल हैं।
जनता के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा संकट
गंदे पानी के कारण दिल्ली में जलजनित बीमारियों के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में बताया गया कि पूर्वी दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों में टाइफाइड के मामले पिछले एक साल में दोगुने हो गए हैं। गरीब और निम्न-आय वर्ग के लोग, जो बोतलबंद पानी या RO फिल्टर का खर्च नहीं उठा सकते, वे दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
यमुना नदी की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। यहां 2-3 किलोमीटर के क्षेत्र में पानी के ऊपर मोटी जलकुंभी की परत जम गई है, जिससे मच्छरों की आबादी बढ़ रही है। 2023 में दिल्ली में डेंगू के 9,266 मामले और 19 मौतें दर्ज की गईं।
भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन की जांच की मांग
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि दिल्ली जल बोर्ड के कार्यों की स्वतंत्र ऑडिट कराई जानी चाहिए और जल आपूर्ति प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए नए बुनियादी ढांचे में निवेश किया जाना चाहिए। टैंकर माफिया को खत्म करने के लिए कड़े कानून लागू करने की सिफारिश की गई है।
दिल्ली के नागरिकों को भी अपने नेताओं से जवाबदेही मांगनी होगी। चुनावों के दौरान नेताओं द्वारा किए गए वादों की सच्चाई जनता के सामने आ चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जल बोर्ड के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और टैंकर माफिया से मिलीभगत के आरोप लगे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
निष्कर्ष
दिल्ली में जल संकट अब सिर्फ पानी की कमी का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर प्रशासनिक विफलता बन चुका है। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह और भी भयावह रूप ले सकता है। इस संकट को दूर करने के लिए प्रभावी नीति निर्माण, मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और जनता की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
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