Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

दिल्ली

केजरीवाल और सिसोदिया दोनों बरी, दिल्ली कब्जाने के लिए मोदी-शाह ने फर्जी केस बनवाये थे!

केंद्र की मोदी सरकार को बहुत बड़ा झटका. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के ख़िलाफ़ कथित शराब घोटाला मामला अदालत में धराशाई हुआ. अदालत में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी किया. सोचिए कैसे इस मामले में एक सिटिंग CM को ED चोर उचक्के की तरह घर से उठाकर लायी थी. मनीष सिसोदिया डिप्टी CM रहते जेल गए, डेढ़ साल काटकर आए. पूरी AAP सरकार बदनाम हुई और पहली बार दिल्ली में AAP ली हार हुई और केजरीवाल-सिसोदिया ख़ुद अपनी सीट भी हार गए. अब पता चला कि दिल्ली की एक्साइज पालिसी में भ्रष्टाचार का कोई सुबूत नहीं मिला.

-शरद शर्मा



नवीन कुमार-

केजरीवाल सिसोदिया दोनों बरी। मोदी शाह एंड कंपनी ने एक मूर्ख को दिल्ली की गद्दी पर बैठाने के लिए भारत की जनता से झूठ बोला। आधी कैबिनेट को जेल में डाल दिया। फर्जी केस बनवाए। सत्ता का दुरुपयोग किया। दिल्ली की जनता का गद्दार कौन? क्या यह संविधान की शपथ से गद्दारी नहीं है?

बताइये। हफ्तों महीनों शराब घोटाले पर प्रेस कांफ्रेंस हुई। जेल भेजे गए। अब आरोप ही खारिज। गोदी मीडिया क्या करेगा? उसके कवरेज का क्या किया जाए? अब दोनों नेताओं को सारे डिबेट शो पब्लिक में दिखाना चाहिए कि यह जो आप देख रहे थे, पूरा झूठ था। एजेंसी लगाकर एक मामला बनाया गया ताकि डिबेट हो सके। अपनी एजेंसी के ज़रिए कंटेंट क्रिएट कर रही थी और गोदी मीडिया उस पर डिबेट और जनता उस पर फैसला। किसी की जवाबदेही तो तय होनी चाहिए। हर दिन जनता के साथ इतना बड़ा छल किया जा रहा है।

-रवीश कुमार


दीपक गोस्वामी-

दिल्ली में सरकार चोरी हुई थी। शराब नीति मामले में आए अदालत के फैसले ने आज इस पर मुहर लगा दी है। फैसला जरूर शराब नीति घोटाले पर है, लेकिन उसके निहितार्थ समझना जरूरी है।

दिल्ली में सरकार आम आदमी पार्टी की थी, अरविंद केजरीवाल की थी, जिसे भाजपा ने केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करते हुए पिछले साल चुरा लिया था।

जी हां, भाजपा ने दिल्ली विधानसभा का चुनाव नहीं जीता था बल्कि आम आदमी पार्टी से दिल्ली की सरकार को चुराया था। जनमत के मन में भ्रष्टाचार का झूठा मुद्दा खड़ा करके केजरीवाल और उनकी पार्टी की छवि को खराब किया गया था, क्योंकि केजरीवाल की ताकत ही भ्रष्टाचार का विरोध थी और उनकी पार्टी की नींव भी भ्रष्टाचार के विरोध में ही रखी गई थी।

अगर भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ने वाला व्यक्ति ही भ्रष्ट साबित हो जाए तो तय है कि जनता उसे नफ़रत करेगी ही। भाजपा ने यही साजिश रची।

चोरी जैसा गंभीर आरोप मैं इसलिए लगा रहा हूं क्योंकि किसी से साजिश करके कुछ छीनना चोरी ही होता है।

दिल्ली में सरकार पाने के लिए भाजपा ने शराब नीति घोटाले को केजरीवाल सरकार के ख़िलाफ़ उछाला और सीबीआई, ईडी जैसी अपनी केंद्रीय जांच एजेंसियां #आमआदमीपार्टी के नेताओं के पीछे छोड़ दी गईं।

केजरीवाल, संजय सिंह और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कई महीनों तक जेल में डाल दिया गया। जनता के बीच केजरीवाल, उनकी पार्टी और पार्टी नेताओं की छवि को भ्रष्टाचारी बना दिया गया। उनकी चुनावी तैयारियों को ध्वस्त कर दिया गया।

अब अदालत ने घोटाले के आरोप से सबको बरी कर दिया है। सीबीआई की चार्जशीट में 23 आरोपी बनाए गए थे। अदालत ने किसी के भी खिलाफ आरोप तय नहीं किए और कहा कि सीबीआई के पास घोटाले का कोई सबूत ही नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट कहा है कि सीबीआई ने साजिश की एक कहानी गढ़ने की कोशिश की। चार्जशीट में लगाए गए आरोप साबित नहीं होते हैं। केजरीवाल का नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया।

खास बात यह है कि अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं।

अब आप क्रोनोलॉजी समझ लीजिए।

क्या सीबीआई के जांच अधिकारी की इतनी हैसियत थी कि वह एक राज्य के मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ साजिश रच सके?

जाहिर सी बात है कि साजिश के पीछे वही लोग थे जिन्हें केजरीवाल और उनकी पार्टी के सभी बड़े नेताओं के जेल जाने से फायदा होता। यह फायदा सिर्फ भाजपा को हुआ। दिल्ली में भाजपा नब्बे के दशक के बाद से सत्ता से वंचित थी और पिछले चुनाव में महज तीन सीट जीत पाई थी, उसने करीब तीन दशक बाद प्रचंड बहुमत से दिल्ली में सरकार बना ली।

ये सरकार की चोरी ही तो हुई। अगर आप जनता का विश्वास नहीं जीत सकते हैं तो उस व्यक्ति को ही रास्ते से हटा दो जिस पर जनता विश्वास करती है।

दिल्ली और पश्चिम बंगाल ऐसे ही राज्य थे जहां भाजपा को बार-बार शर्मनाक हार मिली। तब जाकर उसने सत्ता की चोरी की योजना बनाई। दिल्ली में यही योजना सफल हो गई। बंगाल में भी उन्होंने यही कोशिश की, लेकिन दो बार ममता बनर्जी उनकी साजिश को नाकाम कर चुकी हैं। इस बार फिर ये लोग बंगाल में सत्ता चुराने के वही प्रयासों में जुट गए हैं, जिनके तहत केजरीवाल को जेल में डाला था।

लोकंतत्र भाजपा के लिए वो लचीला खिलौना है, जिसे ये अपने हिसाब कैसे भी मोड़ देते हैं।


गुरदीप सिंह सप्पल-

केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर ट्रायल कोर्ट ने आरोप खारिज कर दिए। केजरीवाल रो भी पड़े। इसे अगर स्वाभाविक फीलिंग की तरह देखा जाये, तो बेमतलब गुनाहगार साबित होना पीड़ा पैदा करता है, यही ज़ाहिर होगा।

लेकिन ये पीड़ा क्या सिर्फ़ अरविंद केजरीवाल की है? क्या ये डॉ मनमोहन सिंह, श्रीमती सोनिया गांधी, श्रीमती शीला दीक्षित ने महसूस नहीं की होगी, जिन्हें अरविंद केजरीवाल ने केवल प्रोपेगंडा की खातिर खूब बदनाम किया, मीडिया ट्रायल किया। झूठे आरोप, नक़ली मसीहा, खोखला लोकपाल, इन सबका प्रपंच रचा।

मोदी सरकार तो जाँच एजेंसियों को शतरंज के मोहरों की तरह इस्तेमाल करती ही है। जहाँ चुनाव, वहाँ ED! उसकी शतरंज की बिसात पर विरोधी पक्ष का सिर्फ़ एक व्यक्ति स्थायी है, राहुल गांधी! केवल उसे ही घेरना है, और इसके लिए वो बाक़ी सभी मोहरों को काले से सफेद और सफेद से काले करते ही रहते हैं!

इसलिए, कोर्ट के इस निर्णय से इतर, ये आंसू तभी सच्चे माने जाएँगे, जब इनमें केवल अपनी पीड़ा नहीं, थोड़ा पश्चाताप भी होगा।

महात्मा गांधी कहते थे – “अनैतिक साधनों से नैतिक लक्ष्य कभी प्राप्त नहीं हो सकता”। ये बात अरविंद केजरीवाल को समझनी होगी।

गांधी एक और बात पर ज़ोर देते थे। वो कहते थे कि कथनी, करनी और व्यवहार में सामंजस्य होना चाहिए। सोच, शब्द और आचरण अलग अलग नहीं होने चाहिए।

अरविंद केजरीवाल RTI के चैंपियन थे। इसी लिए मैग्सेसे अवार्ड से पुरस्कृत भी हुए थे। लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही मीडिया की आज़ादी छीन कर उसे पूरी तरह कंट्रोल करना शुरू कर दिया! दिल्ली हो या पंजाब, उनकी सरकार का चरित्र freedom of expression के ख़िलाफ़ ही रहा है। दिल्ली सचिवालय से मीडिया को बाहर करना, या पंजाब विधान सभा से इंडियन एक्सप्रेस, ट्रिब्यून, पंजाबी जागरण के वरिष्ठ पत्रकारों को बाहर करने की हिमाकत केजरीवाल की पार्टी ने ही की है।

पंजाब में मीडिया के ख़िलाफ़ पुलिस तंत्र का वैसा ही उपयोग AAP सरकार करती रही है, जिसके लिए मोदी कुख्यात है। यकीन न हो तो पंजाब केसरी, अजीत अख़बार या अनेकों RTI एक्टिविस्ट और यूट्यूबर से पूछ लें, जिन पर पंजाब की जाँच एजेंसियों ने केस लगाये हैं और प्रताड़ित किया है।

swaraj , direct democracy, decentralisation, जो अरविंद केजरीवाल प्रचारित करते थे, वो सब पंजाब की AAP सरकार में ढूंढे नहीं मिलेगा। हाँ, कांग्रेस के सभी प्रमुख लीडरों पर पंजाब की जाँच एजेंसियों के दुरुपयोग की लंबी दास्तान ज़रूर मिल जाएगी।

उम्मीद है कि अरविंद केजरीवाल के आँसुओं के कुछ कतरे पश्चाताप के भी होंगे। उम्मीद है मीडिया बंधुओं और कांग्रेस लीडरों की प्रताड़ना, जो AAP की सरकार पंजाब में कर रही है, वो बंद करने का आदेश केजरीवाल मुख्यमंत्री को देंगे! नहीं तो ये आँसुओं या तो घड़ियाली आँसू कहे जाएँगे या फिर एक स्व-केंद्रित नेता का प्रोपेगंडा का हथियार ही माने जायेंगे!


अभिरंजन कुमार-

कल ही मैंने क्रुद्ध होने का इमोजी लगाकर लिखा था कि

“यदि विरोधियों को झूठे मुकदमों में फंसाने का कांग्रेसी चलन भाजपा राज में और भी घिनौना स्वरूप अख्तियार कर चुका है, तो आने वाले दिनों में बचेगा कौन? ऐसे तो लोकतंत्र और न्याय की समूची अवधारणा ही बेमानी हो जाएगी।”

देखिए, आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाले में सबूतों के अभाव में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया और के कविता समेत सभी 23 लोगों को बरी कर दिया।

इतना हल्ला-गुल्ला करके बनाया गया केस भी यदि निचली अदालत में ही ध्वस्त हो गया, देश की न्यायिक व्यवस्था में एक लेयर भी पार नहीं कर सका, तो स्पष्ट है कि या तो इनका केस बेहद कमजोर था, या फिर इनकी एजेंसियां पूरी तरह से अक्षम हैं।

अब ये लाख कहते रहें कि हाई कोर्ट जाएंगे या सुप्रीम कोर्ट, लेकिन राउज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले से भाजपा और उसके शीर्ष नेताओं की छवि पर ऐसी खरोंच आई है, जिसकी भरपाई करना अब लगभग असंभव है।

इन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं को लगातार तरह तरह के मुकदमों में फंसाया, लेकिन पिछले 12 साल से केंद्र में सरकार रहते हुए भी किसी भी बड़े मामले में आरोप सिद्ध नहीं कर पाए।

चाहे वे कांग्रेस सरकार पर लगाए गए टूजी, कॉमनवेल्थ, कोल ब्लॉक आबंटन, इत्यादि घोटाले हों, या अभी अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया और अन्य नेताओं पर लगाए शराब घोटाले के आरोप।

अभी इनका दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि हिंदुत्व की बात करते हुए हिंदू धर्म के सर्वोच्च गुरु शंकराचार्य को ही बलात्कारी सिद्ध करने पर आमादा हैं। मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य की पालकी इनकी सरकार की आंखों को इतना चुभ गई कि ऐसा लगता है कि अपने पोसे हुए कालनेमियों के माध्यम से अब चाहे जैसे भी हो, उन्हें बर्बाद करके ही मानेंगे।

मुझे यह कहते हुए अत्यंत दुःख है कि पिछले 12 साल में भाजपा का जितना पतन हो चुका है, उतना 67 साल में कांग्रेस का भी नहीं हुआ था। ये लोग अपने दोहरे रवैए से अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को भी लगातार लज्जित कर रहे हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलकर अनेक राज्यों में भ्रष्ट लोगों के साथ सरकार चला रहे हैं।

परिवारवाद के खिलाफ बोलकर खुलेआम और जमकर परिवारवाद कर रहे हैं।

संसद को दागियों से मुक्त करने का वादा करके पार्टी और गठबंधन में एक से बढ़कर एक अपराधियों को पनाह दे रखी है।

काले धन के खिलाफ बोलकर एक पैसे काले धन का हिसाब नहीं दे पाए।

घुसपैठियों के खिलाफ बोलकर घुसपैठियों को पिछले 12 साल में देश में और भी ज्यादा भर लिया। रोहिंग्या तो ज्यादातर इन्हीं के कार्यकाल में आए।

हिंदुओं की एकता की बात करके एकजुट हो रहे हिन्दुओं के भीतर स्वयं ही जाति का ज़हर घोलने में जुट गई है।

देश में हिंदू मुस्लिम नफरत का वातावरण बनाकर, विपक्ष को मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए गरियाकर, अब ये मुस्लिम तुष्टीकरण में भी विपक्षियों से ज्यादा पीछे नहीं रह गए हैं।

हिंदुत्व के लिए एक राम मंदिर – जिसके निर्माण में इनका कोई विशेष योगदान है भी नहीं, बड़ा हिस्सा अटल-आडवाणी वाली भाजपा के संघर्षों का ही है – को दिखाकर ये कितने दिन और कितनी मलाई चाट सकते हैं?

कभी शुचिता की बात करने वाली भाजपा में आज यदि चरित्र का “च” भी दिखाई नहीं दे रहा, तो केवल तिकड़म के सहारे कब तक ये राज कर पाएंगे? ये देखने की बात होगी।

अटल आडवाणी वाली भाजपा तो यह रही नहीं, और अगर इनका पतन इसी तरह जारी रहा, तो वो दिन दूर नहीं, जब लोगों को लगने लगेगा कि हर पार्टी इनसे बेहतर है। धन्यवाद।

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन