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टीवी पत्रकारिता: जब खबर एक्टिंग बन गई और कंटेंट पीछे छूट गया!

राजीव रंजन सिंह-

बहुत उम्र होने के बाद, प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल रहने के बाद हम लोगों ने इलाहाबाद जैसी जगह से दिल्ली मीडिया में हाथ आजमाने के लिए रूख किया .. जैसे तैसे टीवी मीडिया में जब घुस गए तो टेक्निकल लोगों से वास्ता पड़ा.. भाई साहब क्या जलवे थे कैमरामैन और लाइट्समैन, असिस्टेंट के.. बड़े से बड़े नेता के घर को इंटरव्यू वाले दिन ये उलट पुलट के रख देते थे।

टीवी नया-नया था तो नेता भी सब चीज में हां में हाँ मिलाते थे .. यहां तक कि मेकअप भी कर लेते .. इंटरव्यू के फ्रेम में गणेश, या लक्ष्मी या घर का कोई एंटिक आइटम एक तरफ, दूसरी तरफ गुलदस्ता रख दिया जाता.. इंटरव्यू होता तो जैसे लगता फिल्म की शूटिंग.. नेता भी टेंशन में और पत्रकार भी कैमरामैन, टेक्नीशियन के गियर में .. बीच-बीच में ये रोक देते कट-कट .. साउंड में हमिंग है .. एसी बंद करना होगा।

दरअसल, सब अपनी महत्ता सिद्ध करते थे .. असली काम तो कंटेट का होता पर वो सबसे नीचे चला जाता. हमें बहुत खीझ आती पर ये तो टीवी है ..ऐसे ही होता ..फिर कैमरामैन रिपोर्टर को फील्ड में कहता सफेद शर्ट नहीं पहननी.. कारण कहते, बर्न करेगा।

हमने पूछा- सब नेता तो कुर्ता सफेद पहनते उनका क्या .. बात आई गई हो गई ..जबसे सोशल मीडिया आया .. मोबाइल चलाने वाले 25 साल के युवाओं ने वो सब गणित फेल कर दिए ..टीवी इंडस्ट्री में सबसे ताकतवर फिर प्रोड्यूसर बना.. फिल्म में प्रोड्यूसर केवल पैसे लगाता उसका क्रिएवेटी से कोई लेना देना नहीं .. पर टीवी न्यूज में प्रोड्यूसर सबसे बड़ा क्रिएटिव.. बडे-बडे नामचीन एंकर, रिपोर्टर फील्ड से जो रिपोर्ट करते, उसका एक-एक शब्द प्रोड्यूसर लिख के देता .. प्रोड्यूसर बोलता बारिश की वीडियो वॉल बना देते.. एंकर छाता लेके हिलता डुलता रहेगा..

आग की स्टोरी है तो नीचे से सेट में आग लगेगी.. एंकर स्टूडियो में इधर से उधर होगा ..रिपोर्टर, एंकर महाराष्ट्र चुनाव करेगा तो डब्बा वाला ड्रेस पहनेगा .. राजस्थान जाएगा तो ऊंट पर बैठ जाएगा.. कहीं और तो घोडा, बैलगाडी हांकेगा .. क्या-क्या न किया एंकर, रिपोर्टर ने ..

टीवी न्यूज की सबसे बड़ी विडंबना यही कि जो अच्छा लिखते, पढते वो स्क्रीन पर नहीं आते ज्यादातर.. जो स्क्रीन पर आते वो ज्यादातर पढ़ने लिखने पर गौर नहीं करते .. नतीजा ये कि सब लिखा पढ़ते .. अपना लिखा न हो तो कनेक्ट हो नहीं पाता.

एक्टिंग और एंकरिंग में ये बुनियादी फर्क है .. एंकर, रिपोर्टर एक्टिंग करने लगे और प्रोड्यूसर ग्राउंड में गए नहीं कभी.. और टीवी न्यूज तमाशा बन गया .. और जो इसके कसूरवार हैं ..वो या तो घर बैठ गए या अब टीवी न्यूज चैनलों को कोस रहे है..

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