
प्रयागराज। 28 जनवरी को संगम स्नान के दौरान हुई भगदड़ में लापता हुए बुजुर्ग “खूंटी गुरु” को मृत मान लिया गया था। उनके परिवार में कोई सदस्य नहीं था, इसलिए मोहल्ले वालों ने ही उनकी तेरहवीं का आयोजन किया। लेकिन जब उनकी तेरहवीं की तैयारियां जोरों पर थीं, तभी खुद खूंटी गुरु ई-रिक्शा से घर लौट आए। यह देखकर पूरा मोहल्ला स्तब्ध रह गया।
भगदड़ के बाद से थे लापता
प्रयागराज के जीरो रोड इलाके में रहने वाले खूंटी गुरु संगम स्नान के लिए गए थे। माघ पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए संगम पहुंचे थे। उसी दौरान भगदड़ मच गई और कई लोग लापता हो गए। खूंटी गुरु भी इसी भगदड़ में गुम हो गए थे। चूंकि उनके परिवार में कोई नहीं था, मोहल्ले वालों ने उन्हें मृत मान लिया और उनकी तेरहवीं की तैयारी शुरू कर दी।
तेरहवीं के दिन वापस लौटे
तेरहवीं के दिन मोहल्ले वाले 13 ब्राह्मणों को भोज कराने की तैयारी कर रहे थे। माहौल पूरी तरह शोकपूर्ण था। तभी अचानक खूंटी गुरु ई-रिक्शा से घर पहुंचे। उन्हें देखकर लोग अचंभित रह गए। उनकी तेरहवीं की तैयारियों के बीच उनका इस तरह लौट आना मोहल्ले वालों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।
मोहल्ले में मचा हड़कंप
खूंटी गुरु को देख मोहल्ले में हड़कंप मच गया। कई लोग तो अवाक रह गए, कुछ ने भगवान का चमत्कार मान लिया। वहीं, उनकी तेरहवीं का इंतजाम करने वालों को झटका लगा, क्योंकि भोज और अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी हो चुकी थी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर
यह अजीबोगरीब घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गई। लोग इसे ‘#मुरदा_लौट_आया_कुंभ_से’ जैसे हैशटैग के साथ साझा कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे कुंभ का चमत्कार कहा, तो कुछ ने इसे प्रशासन की लापरवाही का नतीजा बताया।
अब खूंटी गुरु क्या कह रहे हैं?
खूंटी गुरु का कहना है कि भगदड़ के दौरान वह रास्ता भटक गए थे और किसी अन्य जगह शरण लिए हुए थे। जब स्थिति सामान्य हुई, तो वह वापस लौट आए। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वे इन दिनों कहां थे और कैसे वापस आए।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना ने कुंभ मेले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 36 घंटे बाद भी संगम में डूबे दो श्रद्धालुओं का पता नहीं चल सका, जबकि मृत समझे गए व्यक्ति तेरहवीं के दिन लौट आए। इससे प्रशासन के बचाव कार्यों की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।
मोहल्ले वालों की प्रतिक्रिया
मोहल्ले के कई लोग जहां खूंटी गुरु के लौटने से खुश हैं, वहीं कुछ का कहना है कि उनकी तेरहवीं की तैयारियों में हुआ खर्च अब कौन उठाएगा? वहीं, कुछ लोग इस पूरी घटना को लेकर मजाकिया अंदाज में भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
अब मोहल्ले के लोग इस असामान्य घटना को लेकर चर्चा कर रहे हैं कि आखिर खूंटी गुरु इतने दिनों तक कहां थे और तेरहवीं के दिन ही क्यों लौटे?


