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देसी ट्विटर ‘कू’ का तो चूं बोल गया…

खुशदीप सहगल-

दावा किया जा रहा था चीनी माइक्रोब्लागिंग साइट वीबो की तरह भारत में स्वदेशी ‘कू’ भी जगह बना लेगा.

जब ये शुरू हुआ था तो जोर शोर से इसका प्रचार किया गया. सत्ता की धारा और इसमें बहने वाले पत्रकारों और सेलेब्रटीज ने बढ़-चढ़ कर इसे अपनाया.

एक्स (पूर्व ट्विटर) के दबदबे के आगे ‘koo’ ने आखिर घुटने टेक दिए. ‘कू’ के फाउंडर अप्रमेय राधाकृष्ण और मयंक बिद्वतका ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिये यह जानकारी दी है…इस पोस्ट में लिखा गया है कि कई बड़ी इंटरनेट कंपनियों और मीडिया समूहों के साथ साझेदारी की संभावनाएं तलाशी गईं, लेकिन बात नहीं बनी. दोनों के मुताबिक वो ऐप को चालू रखना चाहते थे, लेकिन टेक्नोलॉजी सर्विसेज की लागत अधिक है, इसलिए यह कठिन निर्णय लेना पड़ा.

ऐसा सुना गया था कि डेलीहंट इस ‘कू’ ऐप का अधिग्रहण करने वाला है, लेकिन किन्हीं वजहों से बात नहीं बनी. ‘कू’ ऐप को टाइगर ग्लोबल और एक्सेल जैसे प्रमुख निवेशकों से 60 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग भी मिली. इन सब चीजों के बावजूद ये भारतीयों में पैठ नहीं बना पाया. हालांकि इसके बंद होने के कयास कुछ महीने पहले से ही लगने लगे थे जबसे इसमें छंटनी शुरू हुई थी.

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