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टीओआई का दिवालियापन, दैनिक भास्कर का तेवर!

डॉ मुकेश कुमार-

कुंभ की दुर्घटना पर ये टाइम्स ऑफ इंडिया का संपादकीय है। इसे पढ़कर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता है कि इसके संपादक और मालिक दोनों मानसिक रूप से दीवालिए हो चुके हैं।

त्रासदी का संदर्भ बताते हुए ये संपादकीय तर्क दे रहा है कि इस तरह की दुर्घटनाओं को टाला नहीं जा सकता यानी व्यवस्थाओं का कोई महत्व नहीं है।

ये एलझाइमर से होने वाली मौतों का भी हवाला दे रहा है मौतों को गंभीरता को कम करने के लिए।

ये मीडिया का सत्ता के सामने नत मस्तक हो जाना नहीं है, उसके चरण चाटने जैसा है। ऐसे मीडिया संस्थानों का मर जाना अच्छा है। ये मानवता और देश की सेवा नहीं कर रहे हैं बल्कि मुनाफ़े के लिए इंसानियत को बेच दे रहे हैं।


हिंदी का अकेला अख़बार है जिसने कुंभ की दुर्घटनाओं को क़ायदे से कवर किया है।

अंग्रेज़ी में शायद हिंदुस्तान टाइम्स ने किसी हद तक इसे कवर किया है।

इंडियन एक्सप्रेस अच्छी रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है मगर कुंभ की त्रासदी के मामले लगता है कि उसने सरेंडर कर दिया है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Rajesh Rankaj

    February 3, 2025 at 7:01 pm

    सच्ची पत्रकारिता यही है, बाकि तो चाटुकारिता है. दैनिक भास्कर के जज्बे को सलाम।

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