कुशाभाऊ पत्रकारिता विवि के विभागाध्यक्ष डॉ. शाहिद अली क्यों छुपा रहे हैं उपस्थिति रजिस्टर?

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में बड़े पैमाने पर एम.फिल. व पी-एचडी डिग्रियां नियम विरुद्ध ढंग से बांटने का मामला सामने आया है. इस संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. के शोधार्थियों राजेश राज, राकेश पाण्डेय, संजय (शेखर) कुमार की शोध अवधि के समय की उपस्थति पत्रक मांगी गई थी किंतु विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शाहिद अली ने जवाब देने से यह कहकर इंकार कर दिया कि ‘उपस्थिति रजिस्टर का सम्बन्ध जनहित में नहीं है, अतः यह जानकारी प्रदान नही की जा सकती’. वहीं दूसरी ओर पी-एच.डी. की डिग्री बिना Plagiarism प्रमाण- पत्र के ही अवार्ड करा दी गई है, जो UGC मापदंड के विरूद्ध है.

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय अपने स्थापना काल से ही शिक्षकों के फर्जी भर्ती को लेकर देश भर में कुचर्चित रहा है. अब यह विश्वविद्यालय ugc के नियमों को ताक पर रख कर डिग्रियां देने का भी कार्य कर रहा है.

UGC द्वारा जारी मापदंड 2009, 2016 व 2018 के अनुसार एम.फिल. व पी-एचडी. की डिग्री शोध अवधि (कोर्स वर्क) के दौरान नियमित शोधार्थी किसी भी अन्य संस्थान में नियमित रूप से नौकरी नहीं कर सकते. राकेश कुमार, राजेश कुमार व संजय कुमार शेखर ( तीनों पीएचडी शोधार्थी, जनसंचार अध्ययन विभाग) द्वारा मीडियाकर्मी के रूप में कार्य किया गया है. पर यह बात इनके शोध निर्देशक डॉ. शाहिद अली द्वारा छिपाया जा रहा है.

ज्ञात है कि डॉ. शाहिद अली पर फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र के आधार पर एसोसिएट प्रोफ़ेसर बनने का आरोप है. कोर्ट ने इनके प्रमाण पत्रों को फर्जी मानते हुए कई धाराओं में अपराध दर्ज करने का आदेश दिया था. डॉ. शाहिद अली ने अदालत से अग्रिम जमानत ले रखी है.

एक छात्र द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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Comments on “कुशाभाऊ पत्रकारिता विवि के विभागाध्यक्ष डॉ. शाहिद अली क्यों छुपा रहे हैं उपस्थिति रजिस्टर?

  • मेरे विषय में प्रकाशित समाचार पूरी तरह गलत, भ्रामक एवं विद्वेेषपूर्ण है। सूचना के अधिकार के अंतर्गत चाही गई जानकारी नियमानुसार प्रदान की गई है। किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि आपके द्वारा मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करनेे के इरादे से तथाकथित छदम समााचार प्रकाशित किया गया है आपने मेरा पक्ष लिए बगैर समाचार इसलिए प्रकाशित किया है कि वास्तविक तथ्यों को छिपाया जा सके। मेरा कोई भी अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी नहीं है। प्रकरण के संबंध में माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का आदेश जाने बिना आप मुझ पर तथा कथित फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र का प्रपंच और दुष्प्रचार करके मेरी समाज में छवि धूमिल कर रहे हैं साथ ही विश्वविद्यालय की छवि भी खराब कर रहे हैं. मेेरे अल्पसंख्यक वर्ग से संबंधित होने के कारण आपने जानबूझकर मेरे विरुद्ध जनभावनाओं को भड़काने का प्रयत्न कर रहे हैं । आपसे अनुरोध है कि वास्तविकता को जाने बगैर मुझे और मेरे विश्वविद्यालय की छवि खराब करने के लिए कृपा करके इस प्रकार के झूठ को ना फैलाएं। आपसे अपील है कि इस झूठे, गलत, भ्रामक तथा मानहानिजनक कथित समाचार का तत्काल खंडन करने का कष्ट करें।

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    • Rajesh Sarthi says:

      हर आरोपी यही बोलता है कि मैंने चोरी नही किया। आपकी कहानी और डिग्री के बारे में सभी परिचित है जो वहां से पढ़ निकले है। दस्तावेज का जिक्र आ न करो नही तो पोल खुलने में देर नही लगेगी। 2014 में मैं खुद उसी विश्वविद्यालय में था और पूरी घटना को करीब से देखा है।
      आप भावनात्मक अपील कर अपना पक्ष रख रहे हो ये भाषा भी समझ आ रही है।

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