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शरीर में फैट ज्यादा है तो लिपो सर्जरी में ये भूल कभी न करें, खारिज हुआ मुआवजे का केस

यूपी के शाहजहांपुर निवासी पलक नील और पवित्र नील ने राज्य उपभोक्ता आयोग में लखनऊ के हेल्थ सिटी ट्रामा सेंटर हॉस्पिटल और इसके डॉक्टर्स के खिलाफ एक परिवाद दाखिल किया था. इनका आरोप है कि इनके पिता की मृत्यु इस अस्पताल से इलाज कराने के बाद हुई.

मामला शरीर से अवांछित चर्बी या वसा से सम्बंधित है. आज के समय में खान पान पर संयम न रखते हुए लोग शरीर में अत्यधिक वसा का संचयन कर लेते हैं जिससे उनको कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की नई विधा विकसित हो चुकी है, शरीर से अवांछित चर्बी या वसा को निकालने की जिसे लिपोसक्शन का नाम दिया गया है.

लिपोसक्शन के इस मामले में लगभग 7-8 लीटर वसा को शरीर से निकाला गया और इसके बाद रोगी की मृत्यु 21 सितंबर 2018 को हो गयी थी. राज्य उपभोक्ता आयोग उत्तर प्रदेश लखनऊ के प्रीसाइडिंग जज राजेंद्र सिंह और सदस्य विकास सक्सेना के सामने आया, जिस पर उन्होंने अपना निर्णय दिया.

परिवादी ने अपने पिता को विपक्षी डॉक्टर्स को दिखाया, जिन्हें डायबिटीज हाइपरटेंशन के साथ अत्यधिक मोटापा और DNS की शिकायत थी. उनका वजन 91 किलो था और चलने फिरने में असुविधा होती थी. हॉस्पिटल में समस्त पैरामीटर को देखने के बाद शरीर से अतिरिक्त वसा निकला गया. ऑपरेशन के बाद रोगी की हालत बिगड़ने पर उसे ICU में रखा गया फिर उसे सहारा हॉस्पिटल भेजा गया और वहां उसकी मृत्यु हुई. इसके बाद यह परिवाद प्रस्तुत किया गया.

परिवादी ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन में घोर लापरवाही प्रदर्शित की गयी जिससे रोगी की मृत्यु हुई एक बार में आवश्यकता से अधिक चर्बी शरीर से निकाली गयी जो अनुमन्य नहीं थी. लिपो सर्जरी क्रमबद्ध चरणों में की जाती है न कि एक बार में. लिपो सर्जरी और DNS एक ही समय किया गया जो उचित नहीं था. स्थापित मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया. परिवादी द्वारा विपक्षी से 91 लाख रुपए हर्ज़ाना 24 प्रतिशत ब्याज के साथ दिलाये जाने कि याचना की गयी.

लिपो का अर्थ है चर्बी, suction का अर्थ है निकालना। इस प्रकार लिपोसक्शन का मतलब है की किसी बॉडी के एक हिस्से में छोटा सा छेद करके उसमें से चर्बी निकाली जाती है। इस तरीके से हम पूरी बॉडी से या पूरी बॉडी के अंदर के अंग से हर जगह से चर्बी नहीं निकाल सकते. मूल रूप से लिपोसक्शन एक स्थानीय शरीर की चर्बी को ठीक करने के लिए है। यह एक शरीर को आकार देने की प्रक्रिया है या शरीर का आकार सही करने की प्रक्रिया है।

मोटापे का अर्थ है की आपके शरीर में हर जगह फैट ज्यादा है यानी चेहरे, गर्दन, आपकी छाती और पेट के अंदर के हिस्से जैसे लीवर के अंदर चर्बी यानी फैटी लीवर किडनीज के आस पास जगह सामान्य से ज्यादा चर्बी होना है. अगर आपको लगता है की लिपोसक्शन सहायता से आप शरीर की चर्बी निकलवा सकते है तो ये सरासर गलत है.

लिपोसक्शन आप तब करवा सकते हैं जब आपको लगता है की आपके शरीर के किसी एक हिस्से में चर्बी ज्यादा है यानी की जैसे पेट का निकला हिस्सा। अगर आपको लगता है की सिर्फ वही और वही चर्बी कुछ ज्यादा है तो लिपोसक्शन से आप उसे कम करवा सकते हैं अगर बाकी शरीर का आकार आपको ठीक लगता है.

राजेंद्र सिंह ने अपने निर्णय में लिखा

लिपोसक्शन वजन घटाने का उपाय नहीं है और यह अतिरिक्त वजन या मोटापे का इलाज नहीं करता है। ज़्यादातर लोग अपने शरीर के कुछ हिस्सों से अवांछित वसा को हटाने के लिए लिपोसक्शन प्रक्रिया का चुनाव करते हैं. लिपोसक्शन पूरे शरीर का वजन घटाने का तरीका नहीं है. हालांकि यह उपचार स्थायी है लेकिन आपके शरीर से वसा फिर से बढ़ सकती है, जहाँ से आपने इसे हटाया था.

यदि कोई सामान्य दूरदर्शी डॉक्टर अपने कौशल से कोई कार्य करता है तब वह चिकित्सीय उपेक्षा का दोषी नहीं होगा क्योंकि वह अपने आजीविका के व्यवसाय को खतरे में नहीं डालेगा. यदि एक रोगी किसी उपचार के प्रति वांछित फल नहीं देता तब डॉक्टर चिकित्सीय उपेक्षा का दोषी नहीं होगा वर्तमान मामले में रोगी धूम्रपान और अल्कोहल लेने का आदी था. रोगी के सहमति पत्र पर लिपो सर्जरी और DNSS करने को सहमति ली गयी तथा संभावित खतरों के बारे में भी लिखा है.

विशेषज्ञों के अनुसार शरीर भार का 10 प्रतिशत वसा एक बार में निकाला जा सकता है अर्थात यदि कोई व्यक्ति 70 किलो का है तब 7 किलो वसा शरीर से निकाल सकते है. वर्तमान मामले में रोगी का वज़न 91 किलो था अर्थात 10 किलो वसा एक बार में निकाला जा सकता था यदि शरीर से 10 लीटर चर्बी निकाली गयी तब इसमें वो भार भी शामिल है जो तरल साल्ट और वाटर शरीर में डाला गया था अर्थात 10 किलो में चर्बी 6-7 किलो रहती है और शेष भाग इंफिल्ट्रेट फ्लूइड का होता है.

इस मामले में लखनऊ मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट को विशेषज्ञ आख्या भी मंगाई गयी है जिसके अनुसार शरीर भार का 10% वसा शरीर से एक बैठक में निकाला जा सकता है. इस मामले में रोगी को भली भांति मालूम था कि उसको लिपो सर्जरी और DNS एक साथ करना है और उसने इसकी सहमति भी दी थी.

इस प्रकार यह पाया गया कि इस मामले में किसी प्रकार कि कोई चिकित्सीय उपेक्षा नहीं हुई और परिवाद निरस्त किया गया.

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