-जनवरी का माह बीत गया, लेकिन बैंक में नहीं आई सैलरी
-समय पर वेतन देने के लिए मीडिया जगत में प्रसिद्ध समूह की छवि धूमिल
मीडिया जगत में अपने तय वक्त और समय से पहले संपादकीय कर्मचारियों को वेतन देने के लिए प्रसिद्ध ‘लोकमत मीडिया’ समूह की यह छवि अब धूमिल हो गई है। जहां लोकमत समूह अपने हिंदी दैनिक लोकमत समाचार की स्थापना की मकर संक्रांति को वर्षगांठ मनाएगा, वहां समूह के कई संपादकीय कर्मचारी ‘तिल-गुड़’ खाने के लिए वेतन को तरसेंगे।
जानकारी के मुताबिक लोकमत समूह ने अपने कई संपादकीय कर्मचारियों (प्रोफेशनल एसोसिएट) की दिसंबर-24 की सैलरी 13 जनवरी तक नहीं दी हैं। ऐसे में कई संपादकीय कर्मचारी बैंक में सैलरी क्रेडिट होने की एक सप्ताह से ‘बाट जोह’ रहे हैं।
एक ओर जहां समूह अपने कुछ संपादकीय कर्मचारियों की सैलरी हर माह 7 तारीख को कर देता है, वहीं प्रोफेशनल एसोसिएट की सैलरी के लिए कोई दिन तय नहीं है। अमूमन उन्हें सैलरी का इंतजार ही करना पड़ता है।
सैलरी की तारीख 9 से लेकर 12 तक हो सकती है। इस बीच बैंक की छुट्टी हो, तो उसका खामियाजा भी कर्मचारी ही भुगते। सैलरी के बारे में पूछताछ करने पर प्रबंधन का कहना होता है कि लेखा विभाग छत्रपति संभाजी नगर से डील होता है, इसलिए यह हालात बने हुए है।
बहरहाल, संपादकीय कर्मचारियों को अपने वेतन का अगले माह का आधा माह बीत जाने के बाद भी इंतजार है।
सैलरी संकट पर आया जवाब भी पढ़ें…
लोकमत समूह में संपादक बनकर पहुंचे रविंद्र भजनी ने भड़ास को बताया कि, 7 तारीख को यहां कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है..और दिया गया है. मुझे भी यहां सात दिन हो गए, लेकिन अभी तक इस तरह का कोई प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है. यहां ऐसा कोई मसला ही नहीं है, अच्छा माहौल है. हालांकि पता करता हूं. पता करने के बाद ही स्थितियों को साफ किया जा सकता है.
बहरहाल, इस मसले के प्रकाश में आने के बाद ताजा इनपुट यह है कि सैलरी को लेकर कर्मचारियों की प्रॉब्लम्स सॉल्व हो गई है. उनके अकाउंट में पैसा ट्रांसफर कर दिया गया है.


