ग्रेटर नोएडा वेस्ट का LYF अस्पताल बना ‘आग का जाल’!, फायर सेफ्टी मानकों की खुलेआम धज्जियां, मरीजों की जान भगवान भरोसे!
गौर सिटी वन स्थित LYF अस्पताल पर गंभीर सवाल, बिना खिड़की और धुआं निकासी व्यवस्था वाले भवन में चल रहा इलाज, फायर एनओसी को लेकर भी उठे भ्रष्टाचार के आरोप!
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर सिटी वन स्थित LYF Hospital को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल की इमारत और फायर सेफ्टी व्यवस्था को देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि अगर यहां कभी आग लग गई या शॉर्ट सर्किट हो गया तो एक भी मरीज जिंदा बाहर नहीं निकल पाएगा। अस्पताल की संरचना ऐसी बताई जा रही है जिसमें आपातकालीन निकासी और धुआं बाहर निकलने तक की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
भड़ास से जुड़े कुछ लोग जब एक मरीज को देखने LYF अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने जो स्थिति देखी, उससे वे दंग रह गए। अस्पताल के बाहर मोटे और बेहद मजबूत डबल ग्लास लगाए गए हैं। आरोप है कि यह ग्लास इतने मजबूत हैं कि आपातकाल में उन्हें तोड़ पाना लगभग असंभव होगा। सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि अस्पताल के कमरों में कोई खिड़की नहीं है, जिससे धुआं बाहर निकल सके या जरूरत पड़ने पर मरीजों को निकाला जा सके।
सूत्रों के मुताबिक अस्पताल निर्माण के समय फायर विभाग से एनओसी लेने के लिए भारी भ्रष्टाचार हुआ था। आरोप है कि रिश्वत लेकर फायर विभाग के अधिकारियों ने भवन निर्माण के दौरान एनओसी दे दी, जबकि अस्पताल की डिजाइन में मूलभूत फायर सेफ्टी मानकों का पालन ही नहीं किया गया। अब स्थिति यह है कि अग्निशमन विभाग खुद दोबारा एनओसी देने में हिचक रहा है क्योंकि भवन में न तो पर्याप्त वेंटिलेशन है, न धुआं निकासी की व्यवस्था और न ही सुरक्षित आपातकालीन निकास।
गर्मी के इस पीक सीजन में अस्पताल के भीतर लगातार भारी संख्या में एसी चल रहे हैं। ऐसे में शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की आशंका हमेशा बनी रहती है। जानकारों का कहना है कि यदि किसी भी फ्लोर पर आग लगी तो धुआं पूरे अस्पताल में भर जाएगा और बंद कमरों में फंसे मरीज, डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय और अन्य कर्मचारी बाहर निकलने तक का मौका नहीं पा सकेंगे।
सूत्रों का दावा है कि अस्पताल प्रबंधन को मरीजों की सुरक्षा से ज्यादा कमाई की चिंता है। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि अस्पताल मालिक को भरोसा है कि पैसे के दम पर वह हर विभाग को मैनेज कर लेगा और भविष्य में भी फायर एनओसी हासिल कर लेगा। दूसरी तरफ अग्निशमन विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि मोटी रकम लेकर मानकों की अनदेखी करने की तैयारी चल रही है।
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस अस्पताल की व्यापक जांच नहीं कराई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने मांग की है कि अस्पताल की फायर सेफ्टी ऑडिट कराई जाए, भवन की संरचना की तकनीकी जांच हो और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए।


