निजी अस्पताल से रंगदारी वसूलने वाले ‘पत्रकार गिरोह’ की मास्टरमाइंड है महिला पत्रकार!

इटावा जिले में एक नर्सिंग होम संचालक को डरा धमका कर एक लाख रुपये की रंगदारी वसूलने वाले तीन पत्रकारों को गिरफतार कर जेल भेज दिया गया जब कि एक मुख्य आरोपी तथाकथित महिला पत्रकार पुलिस कार्यवाही के बाद फरार हो गई है जिसकी सगरर्मी से तलाश की जा रही है।

गिरफ्तार कथित पत्रकारों में हिंदी खबर न्यूज़ चैनल के मनोज कठेरिया, पी न्यूज़ पोर्टल के प्रवीन दुबे ओर एबीसी न्यूज़ के कुलदीप दुबे हैं जब कि इन सब की मास्टर माइंड चंचल दुबे फरार हो गयी है।

इटावा के एसपी सिटी प्रशांत कुमार ने बताया कि निजी नर्सिग होम के संचालक ने तथाकथित तीन पत्रकारों के खिलाफ वसूली, लूट और धमकी की रिपोर्ट सदर कोतवाली में दर्ज कराई है। आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। पुलिस ने तीनों को गिरफतार करके जेल भेज दिया है।

थाना वैदपुरा क्षेत्र के नगला बूधु निवासी दिनेश चंद्र का शहर के आईटीआई के पास सिद्धी नर्सिंग होम है। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग में आनलाइन आवेदन कर रखा है।

उन्होंने बताया कि नर्सिंग होम संचालक के पास तीन मार्च को एक महिला तीन लोगों के साथ आई। खुद को पत्रकार बताया और अस्पताल की बदनामी का हवाला देकर 30 हजार रुपये मांगे न देने पर धमका के चले गए। आरोपियों ने नौ मार्च को दिनेश चंद्र से एक लाख रुपये जबरदस्ती ले लिए।

पीड़ित ने इस घटना की जानकारी एसएसपी आकाश तोमर को दी। एसएसपी के आदेश पर सदर कोतवाली में दिनेश की तहरीर पर तीन कथित पत्रकारों के खिलाफ धमकी, वसूली और लूट की धारा में रिपोर्ट दर्ज की गई है।

3 मार्च को तथाकथित पत्रकार चंचल दुबे, कुलदीप दुबे एवं प्रवीण दुबे निर्माणाधीन अस्पताल गए एवं अस्पताल संचालक से अस्पताल का रजिस्शट्रेशन न होने की खबर चलाने की धमकी देकर 30,000 रुपये रंगदारी की माग करने लगे जिसका विरोध किये जाने पर तथाकथित पत्रकारों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी इटावा के कार्यालय में अस्पताल पर कार्यवाही हेतु एक प्रार्थना पत्र दिया।

तत्पश्चात तथाकथित न्यूज़ वन इंडिया की पत्रकार चंचल दुबे ने अस्पताल संचालक से अस्पताल के विरुद्ध दिए हुए प्रार्थना पत्र को वापस लेने व मुख्य चिकित्सा अधिकारी से कहकर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए एक लाख रुपये की मांग की।

9 मार्च को तथाकथित पत्रकारो ने निजी अस्पताल संचालक से 1 लाख रुपये की ठगी की गयी। इस मामले मे धारा 383/392/504/506 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

तथाकथित पत्रकारो की गिरफ्तारी हेतु टीम गठित की गयी। अभियोग की विवेचना के क्रम में एक अन्य तथाकथित पत्रकार मनोज कठेरिया का नाम प्रकाश में आया था जिनकी गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीम प्रयासरत थी।

उन्होंने बताया कि मनोज कठेरिया पुत्र कुवंरपाल निवासी अड्डा गूलर गाधी नगर थाना फ्रैण्डस कालोनी इटावा ,कुलदीप दुबे पुत्र स्व.प्रेमनारायण निवसी करनपुरा थाना कोतवाली इटावा और प्रवीन दुबे पुत्र दयाशंकर दुबे निवासी चकवा बुजुर्ग थाना बसरेहर इटावा को गिरफतार कर लिया गया।

अस्पताल संचालक के द्वारा पुलिस को उपलब्ध करवाए गए वीडियो की जांच करने के दौरान पुलिस ने चारों कथित पत्रकार मनोज कठेरिया, प्रवीण दुबे, कुलदीप दुबे और मनोज कठेरिया को दोषी मानते हुए चारो कथित पत्रकारों के खिलाफ थाना कोतवाली में धारा 386,392,504,506 के तहत मुकदमा दर्ज किया और मुखबिर की सूचना पर मुक़दमें में बांछित चल रहे तीन पत्रकार कुलदीप,प्रवीण और मनोज कठेरिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

इटावा में पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर की तैनाती के बाद फर्जी और तथाकथित पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही जारी है।

रामकुमार राजपूत, सौरभ सिंह के बाद पुलिस ने फ़र्ज़ी पत्रकार सनत तिवारी के खिलाफ गैंगस्टर जैसी कार्यवाही की। अब एक बार फिर से तथाकथित पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही हो गई है।

मूल खबर-

तीन न्यूज चैनलों के ब्लैकमेलर टीवी पत्रकार गिरफ्तार, महिला पत्रकार फरार

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One comment on “निजी अस्पताल से रंगदारी वसूलने वाले ‘पत्रकार गिरोह’ की मास्टरमाइंड है महिला पत्रकार!”

  • पंकज कुमार says:

    रामकुमार राजपूत, सौरभ , सन्त तिवारी के बाद आगे के नाम लेना भूल गए शायद, जैसे इटावा के र9 के पत्रकार रोहित सिंह चौहान को शराब के मामले में थाना कोतवाली में गिरफ्तार किया गया था, के चैनल के पत्रकार प्रमोद दिक्सित को खनन के आरोप में जेल भेजा गया था और सबसे महान पत्रकार संदीप मिश्रा जी को कैसे इटावा co सिटी अजनी कुमार चतुर्वेदी जी ने ने शराब पीकर आये संदीप मिश्रा को कोतवाली में लताड़ा और मा बहन की गलियां देकर भगाया गया था, और चकरनगर के चर्चित दलाल पत्रकार विकास दिवाकर कैसे कैसे अपने घरवालों के भरण पोषण के लिएप्राधनो को ब्लैकमेल करते थे जिससे एसएसपी आकाश तोमर ने अपने ऑफिस में बुलाकर लताड़ा और कार्रवाही करने लगे तब विकास दिवाकर ने एसएसपी के पैर छूकर अपनी इज़्ज़त बचाई थी। और यही दलाल पत्रकार के महिला पत्रकार को सिर्फ इसलिए बदनाम कर रहे क्योंकि इनकी दलाली अस्पताल से बंद हो चुकी।

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