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सुख-दुख

मैं किसी का नहीं हूँ : दिलीप मंडल

Dilip Mandal-

मैंने पिछले दस साल में कांग्रेस, राहुल गांधी या समाजवादी पार्टी के समर्थन में एक भी लेख नहीं लिखा है, न वीडियो बनाया है. फिर भी लोग इस उम्मीद में बैठे थे कि मैं चुनाव में उनका समर्थन करूंगा. पता नहीं क्यों? आपको समझ में आए तो बताइए.

मैं किसी का समर्थन नहीं करता और मुझ जैसे मामूली आदमी के समर्थन या विरोध से एक वोटर पर भी असर नहीं पड़ता. मैं तो अपनी बात तक नहीं सुनता, औरों की तो छोड़ ही दीजिए.

गूगल कीजिए. मेरे दर्जनों वर्षों पुराने लेख और पॉडकास्ट राहुल गांधी की वामपंथी विकास विरोधी अर्थनीति, भट्टा पारसोल में बहनजी के खिलाफ उनके आंदोलन, कांग्रेस की धार्मिक नीति, कांग्रेस के ओबीसी विरोध, लालू यादव को चुनाव लड़ने से आजीवन रोकने के उनके अपराध आदि पर मिल जाएंगे.

महामहिम द्रोपदी मूर्मू के खिलाफ कैंडिडेट देने पर भी मैंने कांग्रेस की आलोचना की थी.

एससी-एसटी के डिमोशन और जिलों का नाम बदलने के लिए मैं अखिलेश यादव का निरंतर आलोचक रहा हूं. एक बार भी उनका समर्थन नहीं किया.

मोदी का आलोचक इसलिए रहा हूं कि सरकार में जो हो उसी के सामने तो मांग रखी जाएगी और मांग रखते समय तारीफ करने से सामने वाला घंटा कुछ नहीं देगा.

मैं चुनाव के समय अचानक से कांग्रेस और सपा की तारीफ क्यों करने लगूं? मैं किसी पार्टी का थोड़ी न हूं.

सपा और कांग्रेस ने जिनको दिया है और जो पलट गए, उनसे हिसाब मांगे. मेरा मामला अलग है. मैं स्वतंत्र हूं. मैं सबका आलोचक हूं.

आज भी मैं मोदी की आलोचना और निंदा करता हूं कि दस साल मौका मिलने पर भी अलीगढ़ और जामिया में एससी-एसटी और ओबीसी का कोटा लागू नहीं कराया. EWS लगाया. महिला आरक्षण में ओबीसी को अलग से कोटा नहीं दिया और कांग्रेस का समर्थन लेकर EWS और महिला आरक्षण पास करा लिया.

ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर!

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