प्रियंका दुबे-
विवाह के बारे में अब भी लोगों को बहुत से भ्रम हैं जिनसे निकलना ज़रूरी है. सबसे पहली बात यो यह गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि आज के ज़माने में विवाह कोई अनिवार्यता नहीं है. एक ओर जहाँ देश दुनिया में हज़ारों सैकड़ों लोग विवाह न करना चुन रहे हैं, विवाह के बाद दुर्भाग्य से अगर अलगाव की नौबत आ जाए तो सेपरेशन चुन रहे हैं, आपसी सहमति से चाइल्ड-फ्री मैरिज में रहना चुन रहे हैं वहीं दूसरी ओर बड़ी उम्रों तक विवाह न करने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है.
स्त्री और पुरूष दोनों ही ऐसा कर रहे हैं. ज़माना बहुत बदल चुका है.
गाँव देहात को छोड़कर बाईस-चौबीस साल के लोगों की शादी पर वाह-वाह करने की बजाय हैरान होने वालों की संख्या बढ़ी है. जिस हिसाब से शादी के बाद हो रही वारदातों के मामले सामने आ रहे हैं, इस पूरे “उपक्रम” में ऐसा कुछ खास नहीं बचा जो किसी को शादी करने के लिए बहुत उत्साहित कर सके. उल्टा आम लोग अपने बच्चों के लिए डर ज़रूर रहे हैं.
मेरा मानना है कि या तो विवाह नामक संस्था में आमूलचूल परिवर्तन होंगे और इसका स्वरूप बेतहाशा बदलेगा या फिर यह सिस्टम ही आने वाले पचास सालों में ख़त्म हो जाएगा. और अगर यह नहीं बदला तो इसे ख़त्म हो भी जाना चाहिए.
विवाह में प्रेम को छोड़कर और कोई आधार नहीं होना चाहिए. और वह तो बहुत किस्मत से मिलता है. मेरी समझ में वो चाइल्डहुड स्वीटहार्ट्स जो विवाह कर पूरा जीवन साथ रहते हैं, वे बेहद ख़ुशक़िस्मत लोग हैं. वे भी जिन्हें जीवन में कुछ बाद में ही सही, लेकिन सच्चा प्रेम मिल पाता है.
प्रेम के लिए तो सिर्फ़ भाग्य चाहिए. आप ख़ुद को उसकी पात्रता के लिए तैयार भर कर सकते हैं. लेकिन फिर ज़्यादा कुछ आपके हाथ में नहीं. समाज और आर्थिक स्थति और न्याय और क्रांति – इनकी कोई भूमिका नहीं है. मैंने बेइंतहा प्रतिभाशाली और ईमानदार लोगों को प्यार में तड़पते हुए बिलखते हुए देखा है. आप कितने भी अच्छे क्यों न हो. आप ख़ुद को बेच भी क्यों न दें , आप कुछ भी क्यों न कर लें, नहीं मिलना होता तो नहीं मिलता प्यार. नहीं ही मिलता. और मिलना होता है तो मिल जाता है. एकदम से! और आप हैरान रह जाते हैं कि कैसे मिल गया!
अकारण हुआ निस्वार्थ ईमानदार, गहरा, सच्चा और लम्बे वर्षों तक साथ देने वाला प्यार दुनिया की सबसे दुर्लभ शय है. यह आपके जीवन में आए, इसकी आप उम्मीद कर सकते हैं. प्रार्थना कर सकते हैं. अपने पर काम कर ख़ुद को बेहतर मनुष्य बना अपनी पात्रता को झाड़ पोंछ सकते हैं. यूँ तो प्रेम पात्रता का ग़ुलाम नहीं होता. मगर हाँ, अगर आप सुपात्र हैं तो आकर टिक जाएगा आपके पास.
दुनिया में किसी के पास प्रेम है और किसी के पास क्यों नहीं इसका कोई एक्सप्लेनेशन नहीं है. दुनिया में सब कुछ random है. लेकिन अगर जीवन में प्रेम न भी हो तब भी बहुत कुछ रहता है. कला, मित्र, परिवार, आपका अपना पैशन और भी कितना कुछ. यह दुनिया एक खिला हुआ फूल भी है. और जीवित होना एक वरदान! शादी को और प्रेम को न रोइए. होना होगा तो होगा. नहीं हुआ तो कम से कम दूसरों के बच्चों की जान मत लीजिए.
जिनकी शादी उनकी मर्जी, प्रेम और शादी करने की उनकी अपनी निजी इच्छा की वजह से होती है, उनके लिए यह बेशकीमती नेमत है! लेकिन ऐसे बहुत कम लोग होते हैं.
बड़ी तादाद में आज लोग अकेले रहना चुन रहे हैं और बहुत इज़्ज़त और ख़ुशी से अपनी ज़िंदगी बसर कर रहे हैं. उनमें कोई एहसास-ए-कमतरी नहीं है, दूर-दूर तक नहीं है. ग़लत सम्बन्ध में जाने से बेहतर अकेले रहना है. हिंसा से बड़ा कोई पाप नहीं. जिसके साथ रहें , उसे फूलों की तरह रखें. मोहब्बत इतनी हो कि कभी उस पर उँगली तक न उठे…खरोंच भी न आए. ऐसा हो, तभी साथ का अर्थ है. वरना अकेले रहिए. समाज में बहुत लोग अपने साथ रह रहे हैं और खुश हैं.



