मीडिया में सरोकार, जज्बे और जज्बात के जितने शब्द-एक्सप्रेशन हैं, सबके सब सिर्फ प्रोमो-विज्ञापन के काम लाए जाते हैं

Vineet Kumar : जिया न्यूज की मीडियाकर्मी स्नेहल वाघेला के बारे में जानते हैं आप? 27 साल की स्नेहल अपने चैनल जिया न्यूज जिसकी पंचलाइन है- जर्नलिज्म इन एक्शन, के लिए अपने दोनों पैर गंवा चुकी है. पिछले दिनों जिया चैनल के लिए मेहसाना (अहमदाबाद) रेलवे स्टेशन पर रिपोर्टिंग करते हुए स्नेहल फिसलकर पटरियों पर गिर पड़ी और उनके दोनों पैर इस तरह से जख्मी हुए कि आखिर में काटने पड़ गए. अब वो चल-फिर नहीं सकती.

पैर की स्थिति से आप बाकी खुद भी अंदाजा लगा सकते हैं. पिछले चार महीने से वो घर पर है और इलाज में लाखों रुपये खर्च हो गए हैं. लेकिन चैनल ने इसमे अभी तक एक रुपये की मदद नहीं की. रेलवे तो टाल-मटोल करता ही आया है. आप कुछ मत कीजिए, जिया न्यूज की वेबसाइट पर जाइए. आप देखेंगे कि स्नेहल की तरह ही एक महिला पत्रकार जमीन पर लेटकर पीटीसी कर रही है. चारों तरफ का महौला ऐसा है कि कोई आतंकवादी घटनास्थल के बीच से की जा रही रिपोर्टिंग है. ब्लैक एंड व्हाइट इस तस्वीर पर बड़ी सी स्टिगर चिपकाई गई है जिस पर लिखा है- जर्नलिज्म इन एक्शन.

कहने की जरूरत नहीं कि मीडिया में सरोकार, जज्बे और जज्बात के जितने शब्द और एक्सप्रेशन हैं, सबके सब सिर्फ प्रोमो और विज्ञापन के काम लाए जाते हैं..असल में कहीं कुछ नहीं होता, उसके लिए भी नहीं जो इसे प्रोड्यूसर करता है. मैंने पहले भी कहा था, फिर दोहरा रहा हूं- मीडिया में सबसे गई गुजरी हालत है तो उन मीडियाकर्मियों की जो इस इन्डस्ट्री के लिए खबर जैसे प्रोडक्ट तो तैयार करते हैं लेकिन उनकी जिंदगी इनमे शामिल नहीं होती..स्नेहा की स्टोरी आपने कितने चैनलों पर देखी?

युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

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