‘चक दे’ में काम कराते हैं लेकिन सेलरी नहीं देते

मेरा नाम रणजीत कौर है और मैंने ‘चक दे’ में 8 जून 2016 को ज्वाइन किया था, बतौर न्यूज़ एंकर इन पंजाबी. स्टार्टिंग में बड़ी बड़ी बातें की गयी थीं. पर था कुछ नहीं. नाईट ड्यूटी थी और सिक्योरिटी के नाम पर कुछ नहीं था. एक छोटी सी बिल्डिंग में इसका ऑफिस है, फरीदाबाद में. वहीं कॉल सेंटर चलते हैं. वहीं न्यूज़ चैनल भी है. इस चैनल का मालिक एनआरआई है.

मजीठिया वेज बोर्ड मांगने वाले पत्रकार को एमपी पुलिस ने 31 घंटे तक अवैध हिरासत में रखा

प्रति,
श्रीमान् प्रधान संपादक महोदय
भड़ास मीडिया

पत्रकार के साथ पुलिस की गुंडागर्दी का मामला आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं… मैं पत्रकार विपिन नामदेव बताना चाहूंगा कि मेरे पिताजी को पुलिस वाले 04/03/2017 को सुबह 04:10 मिनट पर उठा के ले गये. घर की महिलाओं के साथ गाली गलौज की. इसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. मैं पुलिस के पास शाम 05:30 पर पहुंचा तो मुझे बिठाकर पिताजी को छोड़ दिया गया.

अमर उजाला में हो रहा शोषण, 5 दिन की सेलरी देकर 6 दिन काम ले रहे नए संपादक

प्रिय भड़ास,

यह सिर्फ शिकायती पत्र नहीं है। न ही किसी एक व्यक्ति की ओर से है। यह अमर उजाला के पीड़ित और शोषित कर्मचारियों की ओर से है। इस पत्र के जरिए नव नियुक्त संपादक महोदय की तानाशाही को उजागर किया जा रहा है। AUW यानि अमर उजाला वेबसाइट में इन दिनों कर्मचारियों का जमकर शोषण हो रहा है। इस पत्र के जरिए श्रम विभाग से गुहार है कि वह कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय की पड़ताल करे।

कुमार अशोक की मौत और जिले की पत्रकारिता : अब भी न चेते तो बहुत देर हो जाएगी….

(स्वर्गीय कुमार अशोक : अब यादें ही शेष….)

कुमार अशोक का यूं चले जाना एक सबक है…. आज यह सूचना आई… ”चन्दौली मुगलसराय जनपद के वरिष्ठ पत्रकार हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के पूर्व प्रभारी व मुगलसराय मेल के प्रधान संपादक श्री कुमार अशोक जी का आज (बुधवार) भोर में वाराणसी स्थित चितईपुर के आदित्य अस्पताल में निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर प्रातः साढे सात बजे तक उनके रविनगर स्थित आवास पर पहुँच जायेगा। बताते चलें कि वे काफ़ी दिनों से किडनी के रोग से ग्रसित थे।” इन लाइनों पर पढ़ने के बाद मैं सन्न रह गया। की-बोर्ड पर उंगलियां नहीं चलीं।

अमर उजाला वाले पत्रकार को न्यूज एजेंसी बना खूब कर रहे शोषण, सुनिए एक पीड़ित कर्मी की दास्तान

मीडिया संस्थान अमर उजाला में फुल टाइम कर्मचारियों को जबरन न्यूज़ एजेंसी का कर्मी बना कर उन्हें न्यूनतम वेतन लेने के दबाव बनाया जाता है. इसके लिए एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत समय-सीमा निर्धारित करके दबावपूर्वक लिखवाया जाता है कि वे (कर्मचारी) संस्थान के स्थाई कर्मचारी न होकर एक न्यूज़ एजेंसी कर्मी के तौर पर कार्य करेंगे. लेकिन असलियत ये है कि न्यूज़ एजेंसी संचालक से एक स्थाई कर्मचारी वाला काम लिया जा रहा है. उसे न्यूनतम वेतन पर सुबह 10 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक यानि 12 घंटे संस्थान के लिए कार्य करने को बाध्य किया जाता है.

बदतमीज और क्रूर जागरण प्रबंधन के खिलाफ जाने-माने वकील परमानंद पांडेय ने पीएम मोदी को पत्र भेजा

Shri Narendra Modi
Hon’ble Prime Minister of India
New Delhi

Sub.: Exploitation, victimization and harassment of the Dainik Jagran employees

Hon’ble Pradhan Mantri ji,

We write to you with pain and anguish over the exploitation and victimization of newspaper employees by their proprietors that has crossed all limits. The saddest part of it is that the Governments- Central as well as the States- have become the mute spectators to this sordid state-of-affairs.

पीएम की चंडीगढ़ यात्रा के दौरान चौकसी के नाम पर पुलिस ने पत्रकार के पिता को उठाकर थाने में डाल दिया

चंडीगढ़ में एक न्यूज चैनल के पत्रकार अमित चौधरी जो अभी तक दूसरों की परेशानियों, उन पर हुए अत्याचारों को दिखाते और बताते रहे हैं, आज खुद उसका शिकार हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के चलते उनके साथ वो सब हुआ जिसे वह ‘तानाशाही, जुल्म, अत्याचार, प्रताड़ना और भयावह’ जैसे शब्दों के जरिये बयां करते हैं। यही नहीं, कारगिल युद्ध में देश के लिए दुश्मन से लोहा लेने वाले ब्रिगेडियर देवेंद्र सिंह के बेटे का निधन हो गया, उन्हें सेक्टर 25 के श्मशान घाट में बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करने दिया गया। क्योंकि प्रधानमंत्री की रैली के चलते श्मशान घाट को पार्किंग में बदल दिया गया था। सोशल मीडिया के चलते अमित और ब्रिगेडियर देवेंद्र की तकलीफ का पता हमें लग भी गया लेकिन हजारों-लाखों लोग ऐसे हैं जिनके पास अपनी तकलीफ और पीड़ा बताने के लिए स्मार्ट फोन और सोशल मीडिया का मंच नहीं है लेकिन असहनीय पीड़ा है।

सात सौ रुपये, हजार रुपये, ढाई हजार रुपये… ये है सेलरी… बदले में 50 लाख से अधिक की विज्ञापन की वसूली

दैनिक हिन्दुस्तान से जुड़े रामगढ जिला अन्तर्गत गोला संवाददाता मनोज मिश्रा ने हिंदुस्तान अखबार को अलविदा कह दिया है. श्री मिश्रा ने इस बाबत एक आवेदन प्रधान संपादक श्री शशिशेखर और झारखण्ड के वरीय संपादक श्री दिनेश मिश्र को प्रेषित किया है. मनोज ने कहा कि सन 2000 से हिन्दुस्तान से जुड़ा. पत्रकारिता में काफी उतार-चढ़ाव देखे. जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले पत्रकारों का आज भी काफी शोषण किया जा रहा है. उन्हें अखबार प्रबंधन से सम्मानजनक पारिश्रमिक नहीं मिलता है. इस कारण पत्रकार आर्थिक तंगी से जूझते रहते हैं. सभी का परिवार है. खर्चे भी काफी हैं. पारिवारिक दायित्व होने और आर्थिक तंगी के कारण ही अखबार को अलविदा कह दिया.

ब्रेन हैमरेज के बाद मेरठ के फोटोग्राफर राजन को नौकरी से निकाल दिया ‘हिंदुस्तान’ ने

दैनिक हिंदुस्तान मेरठ से खबर है कि यहां कार्यरत एक फोटोग्राफर को प्रबंधन ने इसलिए नौकरी से निकाल दिया क्योंकि उसे ब्रेन हैमरेज हो गया था. कारपोरेट मीडिया प्रबंधन अपने कर्मियों के प्रति कितना संवेदनहीन है, इसकी बानगी यह घटनाक्रम है. राजेंद्र सक्सेना उर्फ राजन दैनिक हिंदुस्तान, मेरठ में दस वर्षों से कार्यरत थे. फील्ड में घूम घूम कर वह फोटोग्राफी समेत अखबार के समस्त कार्य करते थे. सारे निर्देशों आदेशों का यस सर यस सर करते हुए पालन करते थे. एक दिन अचानक उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया. लंबा इलाज चला. जब वो ठीक होकर काम पर लौटे तो उन्हें एक लेटर थमा दिया गया कि आपकी नौकरी खत्म.

पत्रकारों की लगातार जघन्य हत्याओं और उत्पीड़न के खिलाफ नोएडा से दिल्ली तक पैदल प्रोटेस्ट मार्च 8 जुलाई को, आप भी आइए

अब हमारे और आपके सड़क पर उतरने का वक्त है… पत्रकारों की लगातार जघन्य हत्याओं और उत्पीड़न के खिलाफ नोएडा से दिल्ली तक पैदल प्रोटेस्ट मार्च का कार्यक्रम तय किया गया है जो 8 जुलाई को यानि कल होना है. इसमें आप भी आइए. चुप रहने, घर बैठे का वक्त नहीं है अब. देश भर में पत्रकारों की लगातार जघन्य तरीके से हत्याएं हो रही हैं. जगेंद्र सिंह, संदीप कोठारी, अक्षय सिंह… समेत दर्जनों हत्या-उत्पीड़न के मामले हैं. यह सिलसिला बदस्तूर जारी है.

‘आज’ अखबार का मालिक शार्दूल विक्रम गुप्त बोला- ”मैं चाहूं तो किसी रिक्शे वाले को भी संपादक बना सकता हूं”

वाराणसी। ‘आज’ अखबार से आर. राजीवन निकाल दिए गए। वरिष्ठ पत्रकार। सुनिए इनकी दास्तान। ये कहते हैं- फर्जी मुकदमा या हत्या शायद यही मेरे पत्रकारिता कर्म की संचित पूंजी हो, जो शायद आने वाले दिनों में मुझे उपहार स्वरूप मिले तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा. यकीन मानिए पूरे होशो-हवास में सच कह रहा हूं। हिन्दी का सबसे पुराना अखबार जो 5 साल बाद अपना शताब्दी वर्ष मनाने जा रहा है, उसी ‘आज’ अखबार में मैने 25 साल तक सेवा की, लिखता-पढ़ता रहा। निष्ठा-ईमानदारी के साथ अपने काम को अंजाम देता रहा। लेकिन एक दिन अचानक मुझे बिना किसी कारण-बिना किसी नोटिस के बाहर का रास्ता दिखा दिया।

‘आज’ अखबार से निकाले गए वरिष्ठ पत्रकार आर. राजीवन ने जब अपनी दास्तान सुनाई तो मीडिया के अंदर की हालत पर रोना आया…        फोटो : भाष्कर गुहा नियोगी

sexual harassment of a female PhD. scholar in DU by a Prof. of St. Stephens college

New Delhi : Disha Student organisation organized a protest demonstration at Arts Faculty, University of Delhi, North campus to protest against the sexual harassment of a female PhD. scholar by her guide, a Prof. in St.Stephens College. The matter of sexual harassment came forward after the victim lodged an F.I.R against the teacher. The Scholar had reported the incident with the college authorities but she added that when she took the matter up with the internal affairs committee of the college, the principal tried to persuade her to drop the charges.

मिर्जापुर में पत्रकार का उत्पीड़न, दबंगई से जमीन कब्जाने का प्रयास

: जब मामला अदालत में तो राजस्व विभाग कैसे कर सकता है सही-गलत का फैसला : मिर्जापुर के थाना जिगना में एक पत्रकार के उत्पीड़न का मामला सामने आ रहा है. बता दें कि यहां के मनिकठा गांव में पेशे से पत्रकार अनुज शुक्ला की पैत्रिक कृषि जमीन (गाटा संख्या- 612) को समाजवादी पार्टी के नेताओं की शह पर दबंगों द्वारा अवैध निर्माण कर कब्जाने की कोशिश की जा रही है. जबकि इस जमीन के विवादित बिंदु को लेकर मिर्जापुर की जू.डी. कोर्ट में किसी तरह के निर्माण के खिलाफ स्टे ऑर्डर (मुक़दमा संख्या- 463/ 2013) पारित है.

छुट्टी से लौटे रिपोर्टर को संपादक ने काम से रोका, दोनो में मारपीट होते होते बची, माहौल तनावपूर्ण

भोपाल : मजीठिया वेतनमान की मांग को लेकर दैनिक जागरण के सीईओ संजय गुप्ता के खिलाफ नई दुनिया, भोपाल के कर्मचारियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर होने के बाद जागरण अखबार प्रबंधन बौखला गया है। छुट्टी से लौटे रिपोर्टर को काम से रोकने पर गत दिनो यहां नई दुनिया के संपादक से मारपीट होते होते रह गई। इसके बाद दफ्तर का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है।   

मेरठ के ‘प्रभात’ अखबार के मीडियाकर्मी सिटी इंचार्ज केपी त्रिपाठी से परेशान

मेरठ के सुभारती समूह द्वारा हिंदी दैनिक अखबार ‘प्रभात’ का प्रकाशन किया जाता है. आरोप है कि अखबार के सिटी इंचार्ज के रवैये से कई पत्रकार अखबार छोड़कर चले गए. इन दिनों छायाकार समीर सिटी इंचार्ज केपी त्रिपाठी के रवैये से सकते में हैं. 31 मार्च को दैनिक प्रभात समाचार पत्र में सुबह के समय सिटी इंचार्ज केपी त्रिपाठी कई पत्रकार एवं छायाकारों के साथ बैठक कर रहे थे. इस बीच छायाकार समीर की कार्यप्रणाली को लेकर सिटी इंचार्ज ने गलत शब्द बोले. सिटी इंचार्ज ने फोटोग्राफर समीर को सभी लोगों के सामने ही बैठक से बाहर निकाल दिया. इससे फोटोग्राफर के सम्मान को काफी ठेस पहुंची.

एक न्यूज चैनल जहां महिला पत्रकारों को प्रमोशन के लिए मालिक के साथ अकेले में ‘गोल्डन काफी’ पीनी पड़ती है!

चौथा स्तंभ आज खुद को अपने बल पर खड़ा रख पाने में नाक़ाम साबित हो रहा है…. आज ये स्तंभ अपना अस्तित्व बचाने के लिए सिसक रहा है… खासकर छोटे न्यूज चैनलों ने जो दलाली, उगाही, धंधे को ही असली पत्रकारिता मानते हैं, गंध मचा रखा है. ये चैनल राजनेताओं का सहारा लेने पर, ख़बरों को ब्रांड घोषित कर उसके जरिये पत्रकारिता की खुले बाज़ार में नीलामी करने को रोजाना का काम मानते हैं… इन चैनलों में हर चीज का दाम तय है… किस खबर को कितना समय देना है… किस अंदाज और किस एंगल से ख़बर उठानी है… सब कुछ तय है… मैंने अपने एक साल के पत्रकारिता के अनुभव में जो देखा, जो सुना और जो सीखा वो किताबी बातों से कही ज्यादा अलग था…. दिक्कत होती थी अंतर आंकने में…. जो पढ़ा वो सही था या जो इन आँखों से देखा वो सही है…

मजीठिया के लिए कोर्ट गए दिव्य मराठी के हेमकांत को भास्कर प्रबंधन प्रताड़ित कर रहा

औरंगाबाद दिव्य मराठी में कार्यरत हेमकांत चौधरी अपने हक के लिए गुजरात हाईकोर्ट गए हैं. वे मजीठिया वेज बोर्ड के तहत सेलरी व एरियर न देने पर अखबार प्रबंधन के खिलाफ खुलकर लड़ रहे हैं. जैसे ही कंपनी को पता चला कि हेमकांत ने केस लगाया है, उत्पीड़न शुरू कर दिया गया. दिव्य मराठी अखबार दैनिक भास्कर समूह का मराठी दैनिक है. औरंगाबाद दिव्य मराठी से हेमकांत चौधरी द्वारा हाईकोर्ट जाने पर कोर्ट ने भास्कर मैनेजमेंट को नोटिस जारी कर दिया.

मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : पत्रिका और भास्कर ने उत्पीड़न तेज किया, बर्खास्तगी और इस्तीफे का दौर

हिंदी पट्टी के दो बड़े अखबारों राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर से खबर है कि यहां मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी मांगने वालों का प्रबंधन ने उत्पीड़न तेज कर दिया है. भास्कर प्रबंधन तो बौखलाहट में ऐसे ऐसे कदम उठा रहा है जिसे देख सुनकर सभी लोग दांतो तले उंगलियां दबा रहे हैं. पत्रिका प्रबंधन ने मजीठिया मांगने वाले एक मीडियाकर्मी को बर्खास्त कर दिया है. उन्हें जो पत्र भेजा गया है उसमें लिखा गया है कि– ”आपको कंपनी के क्लाज 3 के अनुसार तीन महीने का एडवांस नोटिस व एडवांस वेतन देकर सेवा से मुक्त किया जाता है. आपकी सेवाओं की अब कंपनी को जरूरत नहीं है. आप 27 फरवरी से खुद को सेवा से मुक्त समझें.”

दैनिक भास्कर रतलाम : मजीठिया के लिए केस लगाने वालों पर प्रबंधन की बर्बरता, एक कर्मचारी से इस्तीफा लिया

दैनिक भास्कर की अन्य यूनिटों की तरह ही रतलाम (मप्र) की यूनिट में भी मजीठिया को लेकर कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। इससे प्रबंधन और स्थानीय अधिकारियों में खलबली मच गई है। बौखलाहट में प्रबंधन बर्बरता पर उतारू हो गया है। कार्यकारी संपादक ने तो मजीठिया के लिए केस लगाने वाले एक कर्मचारी से इस्तीफा ही ले लिया है। लेखा विभाग ने तो हद ही कर दी है, कर्मचारी के खिलाफ रिकवरी भी निकाल दी है। इस कार्रवाई ने आग में घी का काम किया है और कर्मचारियों ने प्रबंधन को ईंट का जवाब पत्थर से देने का मन बना लिया है।

भास्कर प्रबंधन घनघोर उत्पीड़न कर रहा अपने मीडियाकर्मियों का, ऐसे करें बचाव

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए अपने कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट जाते देख दैनिक भास्कर प्रबंधन बुरी तरह भड़क गया और इस बौखलाहट में ऐसे ऐसे कदम उठा रहा है जिससे वह आगे और संकट में फंसता जाएगा. सूत्रों के मुताबिक दैनिक भास्कर प्रबंधन की तरफ से राजस्थान के स्टेट एडिटर ओम गौड़ इन दिनों भास्कर के मैनेजरों की टीम लेकर दैनिक भास्कर के कोटा भीलवाड़ा भरतपुर आदि संस्करणों की तरफ घूम रहे हैं और यहां आफिस में बंद कमरे में बैठक कर एक-एक कर्मी को धमका रहे हैं. कइयों से कई तरह के कागजों पर साइन करवाया जा रहा है तो कुछ को आफिस आने से मना किया जा रहा है.

(अगर मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर कोर्ट जाने पर प्रबंधन आपको परेशान कर रहा है तो उपरोक्त फार्मेट को डाउनलोड कर भर कर लेबर आफिस से लेकर पुलिस-थाना तक जमा कर दें और रिसीविंग रख लें.)

‘भास्कर न्यूज’ चैनल डूब गया, ताला लगा, इनवेस्टर तलाशने में जुटे समीर अब्बास

हेमलता अग्रवाल ने ‘भास्कर न्यूज’ नामक कथित न्यूज चैनल पर लांच होने से पहले ही ताला लगवा दिया. इनके दत्तक पुत्र राहुल मित्तल पूरा जोर लगा कर भी चैनल नहीं चला पाए. अब हेमलता का पूरा ध्यान समीर अब्बास पर है जिन्होंने नया मालदार निवेशक लाने का वादा किया है. आईबीएन7 से भास्कर न्यूज गए समीर अब्बास नए निवेशक तलाश रहे हैं. चर्चा है कि नए निवेशक को पटाने मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं. एकाध के पटने की भी खबर है. भास्कर न्यूज अब किसी दूसरे आफिस से चलेगा ताकि पुराने लेनदार न टपक पड़ें और नए निवेशक को सब्जबाग दिखाने में आसानी हो. देनदारियों से पीछा छुड़ाने के लिए भास्कर न्यूज प्रबंधन अब अपने पुराने स्टाफ और पुराने आफिस से पीछा छुड़ाने की फिराक में है.

उसके बाद संजय गुप्ता बेईमानी पर उतर आया….

गुजरात के अहमदाबाद से अप्रैल 2013 में शुरू हुआ हिंदी न्यूज़ चैनल ‘जानो दुनिया’ आखिरकार बंद हो गया। करीब 250 लोगों की जिंदगी लगभग बर्बाद कर गया। इस चैनल के मालिक और गुजरात सरकार में आईएएस रह चुके संजय गुप्ता एशो आराम की जिंदगी बिता रहे हैं। चैनल बहुत ही शोर शराबे के साथ शुरू हुआ लेकिन जैसे-जैसे दिन गुजरते गए, संजय गुप्ता के इरादे सबके सामने आने लगे। शुरुआत के दो तीन महीने तक तो सबको हर महीने वेतन दिया गया। उसके बाद संजय गुप्ता बेईमानी पर उतर आया।

सिर्फ 5000 रुपये में काम कर रहे हैं दैनिक जागरण, लखीमपुर के रिपोर्टर

दैनिक जागरण लखीमपुर ब्‍यूरो आफिस में इन दिनों संवाददाताओं / रिपोर्टरों का जमकर शोषण हो रहा है… बेहद कम पैसे में ये लोग काम करने पर मजबूर हैं.. प्रबंधन की तरफ से वेतनमान बढाने का झांसा काफी समय से दिया जा रहा है… बार वादा हर बार वादा ही साबित हो रहा है… बेरोजगारी के कारण रिपोर्टर चुपचाप मुंह बंद कर काम कर रहे हैं.. कोई आवाज नहीं उठाता क्योंकि इससे उन्हें जो कुछ मिल रहा है, वह भी मिलना बंद हो जाएगा…

लोकमत प्रबंधन की प्रताड़नाओं ने बुझा दिया एक दीपक

: लोकमत समाचार पत्र समूह के अन्याय, अत्याचार और प्रताड़नाओं से हार गए दीपक नोनहारे :  नागपुर :  लोकमत समाचारपत्र समूह के मगरूर प्रबंधन के अन्याय, अत्याचार और प्रताड़नाओं के आगे ‘लोकमत समाचार’ का एक पत्रकार पराजित हो गया. ‘लोकमत समाचार’ में पिछले 25 सालों से व्यापार-व्यवसाय डेस्क संभाल रहे दीपक नोनहारे ने गुरुवार 6 नवंबर की दोपहर को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (मेयो अस्पताल) नामक सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया.

मीडिया में सरोकार, जज्बे और जज्बात के जितने शब्द-एक्सप्रेशन हैं, सबके सब सिर्फ प्रोमो-विज्ञापन के काम लाए जाते हैं

Vineet Kumar : जिया न्यूज की मीडियाकर्मी स्नेहल वाघेला के बारे में जानते हैं आप? 27 साल की स्नेहल अपने चैनल जिया न्यूज जिसकी पंचलाइन है- जर्नलिज्म इन एक्शन, के लिए अपने दोनों पैर गंवा चुकी है. पिछले दिनों जिया चैनल के लिए मेहसाना (अहमदाबाद) रेलवे स्टेशन पर रिपोर्टिंग करते हुए स्नेहल फिसलकर पटरियों पर गिर पड़ी और उनके दोनों पैर इस तरह से जख्मी हुए कि आखिर में काटने पड़ गए. अब वो चल-फिर नहीं सकती.

जनसंदेश टाइम्स बनारस तालाबंदी की ओर, संपादक आशीष बागची ने डेढ़ दर्जन लोगों को निकाला

खबर है कि जनसंदेश टाइम्स, बनारस अब तालाबंदी के मुहाने पर है। सिर्फ घोषणा ही बाकी है। मालिकों ने हिटलरशाही रवैया अपनाते हुए एक नवंबर को डेढ़ दर्जन से अधिक कर्मचारियों को कार्यालय आने से मना कर दिया। इन कर्मचारियों का कई माह का वेतन भी बकाया है, जिसे मालिकानों ने देना गवारा नहीं समझा। इसके साथ ही अखबार के संस्करण भी सिमटा दिये गये। सिटी और डाक दो ही संस्कदर अब रह गये। पहले सभी जिलों के अलग-अलग संस्करण छपते थे। अब दो ही संस्करण में सभी जिलों को समेट दिया गया है।

हां हम अयोग्य हैं, इसीलिए पत्रकार हैं क्योंकि….

”अयोग्य लोग ही इस पेशे में आते हैं, वे ही पत्रकार बनते हैं जो और कुछ बनने के योग्य नहीं होते..” आज स्थापित हो चुके एक बड़े पत्रकार से कभी किसी योग्य अधिकारी ने ऐसा ही कहा था… कहां से शुरू करूं… मुझे नहीं आता रोटी मांगने का सलीका… मुझे नहीं आता रोटी छीनने का सलीका… हां मैं अयोग्य हूं… योग्य तो वो हैं जो जिले में दाग लेकर आये थे और दाग लेकर चले गए… वो दूध, आटा, दाल और आलू का भाव नहीं बता सकते क्योंकि अपनी मोटी तनख्वाह से उन्होंने जिले में रहते कभी रोटी खरीदी ही नहीं…  हां योग्य तो वो हैं जो जिले से जाते जाते जिले में अपना एक फ़ार्म हाउस बना गये और अपने लखनऊ वाले घर के लिए मुफ्त में शीशम की लकड़ी भी ले गए,आखिर हक़ बनता था उनका क्योंकि वृक्षारोपण में काफी बढ़चढ़ के हिस्सा लेते थे वो… 

भास्कर चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल पर शादी का झांसा देकर देश-विदेश में रेप करने का आरोप (देखें पीड़िता की याचिका)

डीबी कार्प यानि भास्कर समूह के चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल के खिलाफ एक महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है. इस बाबत उसने पहले पुलिस केस करने के लिए आवेदन दिया पर जब पुलिस वालों ने इतने बड़े व्यावसायिक शख्स रमेश चंद्र अग्रवाल के खिलाफ मुकदमा लिखने से मना कर दिया तो पीड़िता को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. कोर्ट में पीड़िता ने रमेश चंद्र अग्रवाल पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता का कहना है कि रमेश चंद्र अग्रवाल ने उसे पहले शादी का झांसा दिया. कई जगहों पर शादी रचाने का स्वांग किया. इसके बाद वह लगातार संभोग, सहवास, बलात्कार करता रहा.