
संतोष देव गिरी-
मिर्ज़ापुर | मुख्य चिकित्सा अधिकारी मिर्ज़ापुर डाक्टर सीएल वर्मा की धमकी से पत्रकारों में आक्रोश गहराने लगा है। सोमवार को एकजुट होकर पत्रकारों ने सीएमओ कार्यालय पर धरने पर बैठ गए। पत्रकारों ने कहा है कि जब तक सीएमओ का स्थानांतरण नहीं होता है तब तक वह पीछे हटने को तैयार नहीं है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे पत्रकारों ने कहा कि सीएमओ की तानाशाही बर्दाश्त नहीं होगी।
दरअसल, सीएमओ मिर्ज़ापुर सीएल वर्मा पत्रकारों द्वारा खबर चलाने से नाराज़ हैं। शनिवार को लालगंज तहसील मुख्यालय पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समाधान दिवस का आयोजन किया गया था। जहां जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समाधान दिवस में आने वाले फरियादियों की फरियाद को सुन रही थी। जबकि बगल में बैठे CMO डॉ सीएल वर्मा मोबाइल में मग्न दिखाई दिए हैं, जिनका वीडियो वायरल होने तथा खबर प्रकाश में आने के बाद सीएमओ पूरी तरह से आग-बबूला हो उठे हैं। उन्होंने तानाशाह की तरह पत्रकारों को धमकाना शुरू कर दिया।
बता दें कि समाधान दिवस पर मोबाइल में रील देखते CMO का वीडियो वायरल हुआ था। खबर चलने से नाराज़ CMO ने पत्रकार को हाईकोर्ट से नोटिस भेजने की धमकी दी है। जिसका ऑडियो वायरल हो रहा है।
इतना ही नहीं पत्रकारों को हाईकोर्ट से नोटिस देने की धमकी देते हुए सीएमओ डॉ सीएल वर्मा सबक सिखाने की चेतावनी देते हुए सुनाई दे रहे हैं। बड़बोले CMO यहीं नहीं रुके, वह आगे भी बोलते हैं और पत्रकार से कहते हैं “पिछली बार रोने लगे थे पत्रकार, इस बार सही कर दूंगा।”
इस दौरान पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी एवं प्रभारी नगर मजिस्ट्रेट शक्ति सिंह को सौंपते हुए सीएमओ मिर्ज़ापुर के स्थानांतरण की मांग की है। धरने पर बैठने वालों में वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्र, जेपी पटेल, पवन त्रिपाठी, संतोष देव गिरि, अश्वनी उपाध्याय, मंगला पति द्विवेदी, बिजेंद्र दुबे, मनीष रावत, मंगल तिवारी, सुधीर सिंह, गौरव विश्वकर्मा, इन्द्रप्रीत सिंह लकी, विनोद सिंह, नेमत खां, गुड्डू खान, रविन्द्र जायसवाल, गुफरान इत्यादि पत्रकार शामिल रहे हैं।
पत्रकारों ने क्या कहा?
पत्रकारों के धरना प्रदर्शन कार्यक्रम की अगुवाई करते हुए वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा ने कहा “पत्रकार धरने पर बैठे हैं! मान सम्मान किसी सत्ता के आकांक्षा के विपरीत पत्रकार फील्ड में काम करते हैं। समस्याओं को उठाते हैं शासन प्रशासन तक बात पहुंचाते हैं। पत्रकार सिस्टम की निगाहों में होता है जब जी में आए उसे अपमानित कर दिया जाए जब मन में आए उसका परिहार उड़ाया जाता है, धमकी दी जाती है? लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के हकदारों के विषय में कौन सोचेगा सवाल इस बात का है!


