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उत्तर प्रदेश

बिजली की भारी समस्या पर भाजपा विधायक राजेश्वर सिंह ने अपनी ही पार्टी की सरकार के ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा को तगड़ा पत्र लिखा!

Head-and-shoulders portrait of a middle-aged Indian man with glasses and a mustache, wearing a light blue kurta and a red tilak on his forehead against a plain background.

लखनऊ समेत प्रदेश के अनेक हिस्सों में बिजली की भारी समस्या पर भाजपा विधायक राजेश्वर सिंह ने ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा को सख्त और लंबा पत्र लिखा!

बिजली कटौती, लो वोल्टेज, ट्रिपिंग, शिकायत निवारण में देरी से जनता में असंतोष बढ़ रहा है – राजेश्वर

पिछले साल से लेकर इस सीजन में भी समस्या बरकरार है , पिछले साल और वर्तमान सीजन की शिकायतों का विश्लेषण अत्यंत जरूरी है- राजेश्वर

Official Hindi government letter on white page with round seal at top, dated 21-05-2026, about energy sector discussion.

भीषण गर्मी के बीच लगातार बढ़ रहे बिजली संकट को लेकर लखनऊ के सरोजिनी नगर से बीजेपी विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा को विस्तृत पत्र लिखकर स्थायी कार्ययोजना बनाने की मांग की है। विधायक ने कहा है कि राजधानी के कई इलाकों में बार-बार बिजली बाधित होना, लो वोल्टेज, ट्रांसफार्मर ओवरलोड, फीडर ट्रिपिंग, अंडरग्राउंड केबल फॉल्ट और शिकायतों के निस्तारण में देरी जैसी समस्याएं आम जनता के लिए गंभीर परेशानी बन चुकी हैं।  

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पत्र में कहा कि यह संकट केवल मौजूदा गर्मी तक सीमित नहीं है बल्कि पिछले वर्ष भी यही हालात थे, इसलिए इस बार केवल अस्थायी मरम्मत की बजाय विस्तृत विश्लेषण कर स्थायी समाधान तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से सरोजनीनगर क्षेत्र के कई पावरहाउस और इलाकों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लगातार लो वोल्टेज और ट्रिपिंग की शिकायतें मिल रही हैं।  

पत्र में विधायक ने उत्तरेठिया, बीबीयू, नादरगंज, गहरू और बनी पावरहाउस से जुड़े अनेक मोहल्लों का नाम लेते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सबसे अधिक प्रभावित है। उन्होंने कहा कि नई रिहायशी कॉलोनियों, अपार्टमेंट्स, कमर्शियल प्रतिष्ठानों, एसी उपयोग, पंप और भविष्य की ईवी डिमांड के कारण बिजली लोड कई गुना बढ़ चुका है, जबकि स्थानीय ट्रांसफार्मर और फीडर पुराने लोड अनुमान के आधार पर अब भी काम कर रहे हैं।  

डॉ. सिंह ने सवाल उठाया कि जब हर वर्ष गर्मियों में यही स्थिति बनती है तो यूपीपीसीएल स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों की समर्पित क्विक रिस्पॉन्स टीम पहले से क्यों नहीं बनाई गई। उन्होंने कहा कि केवल जूनियर फील्ड स्टाफ के भरोसे इतनी बड़ी समस्या का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने मांग की कि वरिष्ठ अधिकारी फील्ड में जाकर शिकायतें सुनें, फॉल्ट-प्रोन क्षेत्रों का निरीक्षण करें और रिपेयर रिस्पॉन्स टाइम की समीक्षा करें।  

पत्र में यह भी कहा गया है कि बिजली संकट का राजनीतिक असर स्थानीय सांसदों और विधायकों पर पड़ता है, जबकि कई बार वास्तविक तकनीकी समस्याएं विभागीय स्तर पर ही रहती हैं। विधायक ने सुझाव दिया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर ही बिजली सुधार योजनाएं तैयार की जाएं ताकि जनता की वास्तविक समस्याएं सिस्टम तक पहुंच सकें।  

डॉ. राजेश्वर सिंह ने यूपीपीसीएल चेयरमैन से लखनऊ की बिजली व्यवस्था का व्यापक ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले और वर्तमान वर्ष की शिकायतों, कॉल सेंटर डेटा, सबस्टेशन रजिस्टर, ट्रांसफार्मर फेल्योर रिकॉर्ड, फीडर आउटेज हिस्ट्री और पब्लिक ग्रीवांस का समेकित विश्लेषण किया जाए। विधायक ने चेतावनी दी कि छोटी-छोटी लेकिन बार-बार आने वाली शिकायतें बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर फेल्योर का संकेत हो सकती हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक क्षेत्र में शिकायत आधारित मैपिंग कर यह पता लगाया जाए कि किन इलाकों में बार-बार ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो रहे हैं, किन फीडरों पर लगातार ट्रिपिंग हो रही है, कहां लो वोल्टेज की समस्या स्थायी बन गई है और किन क्षेत्रों में केबल फॉल्ट बार-बार सामने आ रहे हैं।  

पत्र में 18 बिंदुओं वाली विस्तृत कार्ययोजना भी प्रस्तावित की गई है। इनमें ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों को उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों से बदलना, अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाना, फीडर बैलेंसिंग, केबल ऑडिट, जीआईएस मैपिंग, आधुनिक फॉल्ट लोकेटर मशीनों का उपयोग, 24×7 इमरजेंसी टीम, स्पेयर ट्रांसफार्मर और मोबाइल रिपेयर वैन की उपलब्धता शामिल है। साथ ही प्रत्येक सबस्टेशन पर पब्लिक ग्रीवांस डेस्क और रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने का सुझाव भी दिया गया है।  

विधायक ने यह भी कहा कि एआई आधारित लोड फोरकास्टिंग, स्मार्ट मीटरिंग और रियल टाइम फीडर मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किए जाने चाहिए। उन्होंने अवैध लोड, मीटर बाईपास और बिजली चोरी पर साक्ष्य आधारित कार्रवाई की मांग भी उठाई। साथ ही लोगों से पीक ऑवर में बिजली बचाने और एसी को 24-26 डिग्री पर चलाने की अपील करने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया।  

पत्र के साथ संलग्न एनेक्सचर में डॉ. राजेश्वर सिंह ने अमेरिका, सिंगापुर, जापान और दिल्ली के बिजली प्रबंधन मॉडलों का उदाहरण भी दिया है। उन्होंने कैलिफोर्निया के “फ्लेक्स अलर्ट मॉडल”, अमेरिका की FLISR तकनीक, दिल्ली के डिजिटल ट्विन मॉनिटरिंग मॉडल और सिंगापुर के डिस्ट्रिक्ट कूलिंग सिस्टम का हवाला देते हुए कहा कि लखनऊ में भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ऐसे मॉडल लागू किए जा सकते हैं।  

विधायक ने अपने पत्र के अंत में कहा कि बिजली संकट का समाधान केवल अधिक बिजली खरीदने से नहीं होगा बल्कि डिमांड मैनेजमेंट, फॉल्ट ऑटोमेशन, वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही और स्थानीय डेटा आधारित निवेश से ही स्थायी सुधार संभव है। उन्होंने ऊर्जा मंत्री से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।  

संबंधित पत्र की प्रति और समाचार कटिंग भी पत्र के साथ संलग्न की गई है।  

Front page of a Hindi newspaper with a large central headline and several photos showing people at a counter and crowds gathering.",
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