मोदी मध्यावधि चुनाव करवा लें, नोटबंदी पर जनमंत संग्रह हो जाएगा : वैदिक

सत्तारुढ़ दल भाजपा के सबसे वरिष्ठ सांसद श्री लालकृष्ण आडवाणी ने पक्ष और विपक्ष दोनों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने विपक्ष के द्वारा नोटबंदी पर किए जा रहे हो-हल्ले को जितना अनुचित बताया है, उतना ही दोषी उन्होंने लोकसभा-अध्यक्षा और संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार को भी ठहराया है। आडवाणी अपने वाणी-संयम के लिए विख्यात हैं, फिर भी उन्हें लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन की आलोचना करनी पड़ी है।

सुमित्रा महाजन यों तो कुशल अध्यक्षा हैं और आडवाणी की प्रिय पात्र रही हैं लेकिन पिछले 2-3 हफ्तों से संसद का जो हाल हो रहा है, वे खुद क्या कर सकती हैं? क्या वे प्रधानमंत्री को मजबूर करें कि वे नोटबंदी पर अपना वक्तव्य दें? भाजपा बहस तो चाहती है लेकिन नोटबंदी पर मतदान नहीं चाहती है। यदि मतदान होगा तो राज्यसभा में वह निश्चय ही हार जाएगी। विपक्ष मतदान पर जोर दे रहा है।

मैं तो कहता हूं कि यदि नरेंद्र मोदी यह मानते हैं कि नोटबंदी उन्होंने जनता की भलाई के लिए की है तो वे मतदान से क्यों डर रहे हैं? यदि राज्यसभा में सरकार हार गई तो भी क्या? दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में वह जीत ही जाएगी और यदि इस मुद्दे पर सरकार गिरती ही हो तो गिर जाने दें। इस मुद्दे पर मध्यावधि चुनाव क्यों न करवा दिए जाएं। वह नोटबंदी पर जनमत-संग्रह हो जाएगा।

संसद में मतदान वाली बहस हो या न हो, मोदी को नोटबंदी पर वक्तव्य देने के लिए कौन मना कर सकता है? सुमित्रा महाजन चाहें तो प्रधानमंत्रीजी को वक्तव्य देने का निर्देश भी कर सकती हैं। प्रधानमंत्री ने आज तक नोटबंदी पर संसद में मुंहबंदी क्यों कर रखी है? संसद के बाहर वे कोई मौका नहीं छोड़ते जबकि वे नोटबंदी पर एकालाप न करते रहते हों। यह अच्छा नहीं होगा कि लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश पर उन्हें बोलना पड़े। इससे उनकी और पार्टी की छवि खराब होगी। उन्हें साहस जुटाना चाहिए। खुद पहल करना चाहिए। यदि उन्हें लग रहा है कि नोटबंदी का फैसला जल्दबाजी में या गलती से हो गया है तो वे वैसा कह डालें। जनता उन्हें माफ कर देगी। अभी भी उनके लिए भारत के आम आदमी में सहानुभूति और सम्मान का भाव है। हो सकता है कि यह सद्भाव कुछ दिन बाद नदारद हो जाए।

लेखक वेद प्रताप वैदिक देश के जाने माने पत्रकार और स्तंभकार हैं.



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Comments on “मोदी मध्यावधि चुनाव करवा लें, नोटबंदी पर जनमंत संग्रह हो जाएगा : वैदिक

  • Lagta hai Vaidik ji ne saarey chor-uchakkon, bhrashtachariyon, Kaladhaniyon etc. etc. ka “Beedaa” utha rakkha hai… Bhadas ke alawa WhatsApp par bhi chha rahey hain. Bhrashtachariyon ke Paksh me aur Modi ke khilaf khoob Jhandaa Buland kerney me lagey hain….
    Aapko ek baat bataa dun, ki aap jaisey kuchhek Congressi/ Communiston ke likhney se kuchh nahin honey wala, kyonki iss Desh ki Jantaa ka poora sahyog Modi ji ko mil raha hai.. Desh ki Janta behad khush hai. Haan, aap jaise kuchhek soch walon me kuchh janta bhi hai, jo “Galey Faad Faad ke chilla” rahi hai..
    Par Iss baar Congress/ communist jaise logon ko Modi se paalaa padaa hai, ye dhyan rakkhein aur Desh ki Janta behad khush hai, iska bhi dhyan rakkhein….
    dhanyawad…

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  • Vaidik ji, kya aapney ye sawal Congress ke Manmohan singh ji se kabhi poochha thha, jab “Bhrashtachar ki Aag” me Congress poori tarah se doobi thi- 2G se lekar coal se leker na jaaney kitne “Ghotaley” Congress ne kiye thhe. Uss waqt sari wipakshi partiyan Chilla rahi thi aur uss waqt Sriman Manmohan Singh ji ekdam se chuppi sadhey baithe rahte thhe.. Unka naam hi “Mauni Baba” uss waqt pad gaya thha.
    Aaj Modi ji chup hain, to aap aur aap jaise badey stambhkar, patrakar, lekhak kyon logon ko nahin bataa rahey ki ye “Prachalan” to Congress ki den hai. “Pahley tum chup thhey aur mai Chilla raha thha, ab Mai Chup hoon, tum Chillao”. Waise bhi uss waqt Desh ko Loota jaa raha thha, Par aaj to Desh ko Loota nahin jaa raha, walki Modi ji ki dekh-rekh me desh ka bhalaa ho raha hai. Desh ki Janta ko ab Mazaa aa raha hai… Phir aap logon ko kyon nahin mazaa aa raha hai… Mazey Lena seekhein…..aur Unn Bhrashtachariyon ke khilaaf bhi kuchh likhna seekhein…..
    Dhanyawad…

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