मुझे टेलीविज़न पत्रकारिता सिखाने वाली नलिनी सिंह…

नौशाद अली-

मुझे टेलीविज़न पत्रकारिता सिखाने वाली मेरी प्यारी मैडम, नलिनी सिंह। मुझे हमेशा परिवार के सदस्यों की तरह माना। मैडम ने एक बार मुझसे कहा था कि जीवन में सिर्फ दो ही चीजें होती हैं। कामयाबी और नाकामी। कामयाबी खुद बोलती है लेकिन नाकामी से आंखें चुराने के लिए लोग सौ तरह के बहाने ढूंढते हैं। लेकिन सब एक्सक्यूज़ के बावजूद नाकामी नाकामी ही होती है।

एक बार का दिलचस्प किस्सा शेयर करना चाहूंगा। आंखों देखी के अलावा हम लोग एक वीकली डिस्कशन शो बनाते थे। उस प्रोग्राम का इंचार्ज बोलिये या प्रोड्यूसर बोलिये वो मैं ही था। होटल ताज मान सिंह के बैंकट हॉल में सेट लगाकर एक दिन में चार एपिसोड शूट करते थे।

एक दिन शूटिंग चल रही थी अचानक ही एक गेस्ट को प्यास लग गई। उन्होंने पानी मांगा, जिस जगह पानी के ग्लास रखे थे उसके पास एक लाइट मैन खड़ा था। मैंने उससे कहा कि दोस्त पानी का एक गिलास उठाकर गेस्ट को दे दो। ये सुनकर वो लड़का बोला कि सर पानी पिलाना मेरा काम थोड़े ही है।

बहरहाल उसका जवाब सुनकर मैं आगे बढ़ा और पानी के ग्लास की पूरी ट्रे उठाकर सभी गेस्ट के सामने कर दी कि आप सभी लोग पानी पी लीजिये। शूटिंग खत्म होने के बाद नलिनी सिंह मैडम ने मुझे कहा कि बेटा तुम्हारी परवरिश बहुत अच्छी हुई है। मैडम के घर पर पार्टी होती थी तो उसके तीन होस्ट होते थे। मैडम नलिनी सिंह उनके बेटे सुक्रण सिंह और तीसरा शख्स होता था मैं।

जब भी कभी दिल्ली से बाहर जाती थीं और अगर लौटते हुए फ्लाइट रात को आनी है तो मुझे बोलती थीं कि बेटा गाड़ी तुम लेकर आना।

आज भी मिलते ही एक मां की तरह ज़िन्दगी से जुड़ी हर चीज़ जानने को उत्सुक थीं। घर पर बीवी बच्चे कैसे हैं। काम कैसा चल रहा है।

जिंदगी में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिन्हें बयान करने में लफ्ज़ कम पड़ जाते हैं। मैडम नलिनी सिंह मेरी दुआ है कि आप हमेशा सेहतमंद रहें और खूब लंबी उम्र तक हम लोगों के साथ रहें।



 

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