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नवभारत मुंबई के 28 साल; कभी संपादकीय विभाग के उत्पीड़न पर metoo अभियान चला तो पुस्तक जरूर लिखूंगा- अजय भट्टाचार्य

अजय भट्टाचार्य-

नवभारत के मुंबई में 28 साल

11 अक्टूबर 1997 दशहरे के दिन नवभारत के मुंबई संस्करण का आरंभ हुआ था। इस अखबार की शुरुआती टीम में पहले दिन से ही अपन मुखपृष्ठ पेज देखते थे। संपादकीय कार्यालय नवी मुंबई के इंडस्ट्रियल क्षेत्र में था। टेलीप्रिंटर लगा नहीं था। खबरों का स्रोत मराठी समाचार बातम्या और रात को दूरदर्शन समाचार थे। टीवी पर खबर सुनकर लिखना होता था।

यह संपादकीय टीम की मेहनत थी कि अखबार शुरू होते ही मुंबई में छा गया। अखबार के मालिक व संपादक विनोद बाबू माहेश्वरी ने पत्रकारीय सरोकारों पर एक लंबा प्रबोधन दिया था। बाद में संपादकीय विभाग भी चिंचपोकली आ गया।

अक्सर विनोद बाबू एक रूपक के माध्यम से कालबादेवी रोड की एक दुकान का जिक्र करते और अखबार की रिपोर्टिंग पर टिप्पणी करते। आज तक वह दुकान और रिपोर्टर का नाम पता नहीं चला है।

खैर, 2006 मार्च में बतौर संपादकीय प्रभारी फिर काम शुरू किया। उन पत्रकारीय सरोकारों को जिन पर विनोद बाबू ने घंटे भर प्रबोधन दिया था, कब तिरोहित हो गये पता ही नहीं चला। लगता है कालबादेवी की दुकान नवभारत कार्यालय पहुंच गई। पत्रकार और विपणन प्रतिनिधि का अंतर ही समाप्त हो गया।

2009 मार्च से नवभारत के दफ्तर से अलग हुआ। अब विनोद बाबू नहीं हैं। इसलिये कालबादेवी की दुकान पर बैठकर जासूसी करने की जरूरत नहीं है। वैसे भी अब उनकी तीसरी पीढ़ी ने धंधा संभाल लिया है। सब कुछ रूटीन हो गया है।

बहरहाल 28वें वर्ष को पार करने पर बधाई तो बनती है। कभी पत्रकारिता में प्रबंधन द्वारा संपादकीय विभाग के उत्पीड़न पर metoo अभियान चला तो अपन नवभारत प्रबंधन पर एक पुस्तक लिखने की जुगाड़ जरूर करेंगे। फिलहाल बधाई।

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