ग्रेटर नोएडा वेस्ट का टेक ज़ोन-4 क्षेत्र इन दिनों एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन) की मनमानी और गुंडई के कारण चर्चा में है। क्षेत्र में चल रहे तमाम निर्माण कार्यों ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। धूल, धुएं और शोरगुल के बीच जीवन नरक बन चुका है, लेकिन न तो प्रशासन सुनवाई कर रहा है और न ही एनबीसीसी की ज़िम्मेदारी तय हो रही है।
वेंडर्स का भुगतान रोका, परिवार भूखे मरने को मजबूर
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, एनबीसीसी ने सैकड़ों वेंडर्स और ठेकेदारों का भुगतान महीनों से रोक रखा है। इसका असर मजदूरों और छोटे सप्लायर्स पर पड़ा है जो अपने परिवारों का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। परेशान वेंडर्स ने भड़ास को बताया कि उन लोगों का 40 से 45 लाख रुपया बकाया है। वहीं वर्कर्स की 4-5 महीने से तनख्वाह नहीं दी जा रही है। ऐसे में यह लोग अपने परिवार समेत कई मुश्किलों का सामना करने को मजबूर हैं।
रात में धड़ल्ले से जारी निर्माण
एनबीसीसी द्वारा जारी निर्माण कार्य रात में भी बिना किसी रोक-टोक के जारी रहता है, जबकि पर्यावरणीय नियमों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के मुताबिक रात में निर्माण पर रोक है। बावजूद इसके, भारी मशीनों का इस्तेमाल कर शोर और वाइब्रेशन से आस-पास के फ्लैट्स के लोग बेहाल हैं।
नियम-कानून की धज्जियाँ
एनबीसीसी द्वारा न तो साइट पर पर्यावरणीय सुरक्षा के कोई उपाय किए गए हैं, न ही साइट कवर है। पानी का छिड़काव नहीं होता, जिससे धूल का गुबार हर समय हवा में तैरता है। यही नहीं, निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
नोएडा अथॉरिटी की चुप्पी
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू नोएडा अथॉरिटी की चुप्पी और निष्क्रियता है। एनजीटी के सख्त आदेशों के बावजूद निर्माण कार्यों में नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। ना कोई निरीक्षण हो रहा है और ना ही शिकायतों पर कार्रवाई।
हरे-भरे पेड़ों का किया कत्ल


ग्रेटर नोएडा वेस्ट के टेक जोन 4 में NBCC India Limited हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर रहा है। इन पेड़ों की जड़ों में पहले एसिड या पेट्रोल डाला जाता है। फिर पेड़ सूखने का हवाला देकर रात में काटा जाता है! हरी भरी जगहों को जिस तरह उजाड़ा काटा जा रहा है उससे लगता है कि एक दिन ग्रेनो में सिर्फ कंक्रीट के पत्थर ही दिखेंगे। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कान में तेल डाले है। सारे सरकारी विभाग, सारी एजेंसीज सोई पड़ी हैं।
जनता में गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी
सेंट्यूरियन पार्क ओ2 वैली और आसपास की सोसायटियों के निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रशासन इस अराजकता पर अंकुश नहीं लगाता और एनबीसीसी को जवाबदेह नहीं ठहराता, तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
इस प्रकरण से साफ है कि सरकारी संस्था होते हुए भी एनबीसीसी किसी प्राइवेट माफिया की तरह बर्ताव कर रही है और शासन-प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या जनता की आवाज़ सिर्फ चुनावी वादों तक ही सीमित रह जाएगी?
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