SEBI ने गौतम अडानी के भतीजे प्रणव अडानी पर इनसाइडर ट्रेडिंग का आरोप लगाया है। SEBI का कहना है कि मामला NDTV के अधिग्रहण से जुड़ा है।
आरोप है- प्रणव ने Price से जुड़ी इनसाइड जानकारी ससुराल वालों- खासकर अपने सालों से शेयर की थी। ताकि उन्हें शेयर की खरीद-बिक्री में फायदा हो।

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अडानी समूह के निदेशक प्रणव अडानी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मार्केट रेगुलेटर का कहना है कि NDTV के अधिग्रहण से जुड़े ओपन ऑफर से पहले प्रणव अडानी ने अनप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (Unpublished Price Sensitive Information – UPSI) अपने कुछ पारिवारिक सदस्यों के साथ साझा की।
SEBI के मुताबिक, यह जानकारी उस समय साझा की गई जब अडानी समूह NDTV में हिस्सेदारी हासिल करने की प्रक्रिया में था और ओपन ऑफर सार्वजनिक होने वाला था। यह वह दौर था जब इस तरह की कोई भी गोपनीय जानकारी शेयर बाजार में निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती थी।
किन पर जानकारी साझा करने का आरोप
SEBI के शो-कॉज नोटिस में आरोप लगाया गया है कि प्रणव अडानी ने यह गोपनीय जानकारी अपने सालों (रिश्तेदार) और ससुर के साथ साझा की। नियामक का कहना है कि जिन लोगों को यह जानकारी दी गई, वे उस समय बाजार में सक्रिय थे और उनके पास ट्रेडिंग करने की क्षमता थी।
SEBI का दावा है कि कॉल रिकॉर्ड, संपर्कों की टाइमिंग और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि ओपन ऑफर से ठीक पहले संबंधित पक्षों के बीच लगातार संवाद हुआ।
SEBI के नियमों का हवाला
मार्केट रेगुलेटर ने अपने नोटिस में कहा है कि इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के तहत किसी भी सूचीबद्ध कंपनी या उससे जुड़े लेन-देन की मूल्य-संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक होने से पहले साझा करना या उसका लाभ उठाना प्रतिबंधित है।
SEBI का मानना है कि यदि UPSI को परिवार या करीबी लोगों के साथ भी साझा किया जाता है और उससे बाजार को प्रभावित करने की संभावना बनती है, तो वह भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
अडानी ग्रुप का पक्ष अभी बाकी
यह स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल यह आरोपों का मामला है और SEBI द्वारा जारी शो-कॉज नोटिस के बाद संबंधित पक्षों को अपना जवाब देने का अवसर दिया गया है।
अंतिम फैसला जवाबों की समीक्षा और आगे की जांच के बाद ही होगा।
NDTV अधिग्रहण पहले से विवादों में
गौरतलब है कि NDTV का अधिग्रहण पहले भी राजनीतिक और कॉरपोरेट हलकों में चर्चा और विवाद का विषय रहा है। अब इस मामले में इनसाइडर ट्रेडिंग जैसे आरोप सामने आने से यह सौदा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है।
SEBI की यह कार्रवाई इस बात का संकेत मानी जा रही है कि रेगुलेटर बड़े कॉरपोरेट समूहों से जुड़े मामलों में भी इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों को लेकर सख्ती बरतने का संदेश देना चाहता है।


