क्या अखबार में भी घुसकर आ जाता है कोरोना?

Satyendra PS : कोरोना को लेकर इतनी दहशत है कि हमारी बिल्डिंग में लोगों ने अखबार पढ़ना भी बन्द कर दिया है। लोगों का कहना है कि कोरोना अखबार में भी घुसकर आ जाता है।

कृपया जानकार लोग अवगत कराएं कि क्या कोरोना पीड़ित विकसित देशों में अखबार भी बन्द किए गए हैं सावधानी के लिए?

संभवतः दो या 3 रोज से मुंबई में अखबार बन्द हैं।

अखबार वाले भी कोरोना योद्धा हैं, जैसे पुलिस के लोग। दिल्ली में कल से कर्फ्यू पास लग रहे हैं। ईस्ट दिल्ली के डीसीपी के यहां एक घण्टे में करीब 1000 आवेदन पहुंच गए कर्फ्यू पास के लिए। आखिरकार उन्होंने नोटिस चस्पा कर दी कि इंडिविजुअल पास नहीं बनेंगे, लोग पुलिस को अपना आई कार्ड दिखाकर जा सकते हैं।

पुलिस के कोआपरेशन के बावजूद डर तो है ही। दिल्ली में पास जिलावार बन रहे हैं। कोरोना योद्धा रूपी पत्रकारों के लिए नर्क यह है कि दिल्ली में उन्हें कई जिलों से होकर गुजरना होता है और नोएडा गाजियाबाद गुड़गांव रहने वाले लोगों को बॉर्डर भी क्रॉस करना पड़ता है।

क्या हमारे अधिकारी और पत्रकार संगठन कुछ ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्रालय एनसीआर के लोगों के लिए एक ऐसा पास बना दे जिससे इंडिविजुवल व्यक्ति/वाहन का बाधारहित आवागमन सुनिश्चित हो सके, जैसा इलेक्शन के समय केंद्रीय चुनाव आयोग जारी करता है? संस्थान अपनी तरफ से नाम और फोटो, वाहन संख्या भेज दें, गृह मंत्रालय पास बनाकर दे दे।

कोरोना योद्धाओं को दोहरा डर है। एक तो कोरोना मैया धर सकती हैं, उससे बचने के लिए हम अपना समुचित इंतजाम कर रहे है। दूसरे, पुलिस भी कूट सकती है। 21 दिन का मामला है इसलिए कुछ स्थायी इंतजाम जरूरी है। पुलिस को भी समस्या है। उनके पास एक सुरक्षित मास्क तक नहीं है। मुंह पर सर्जिकल मास्क लगाकर किसी तरह ड्यूटी बजा रहे हैं।

दिल्ली की सब्जी मंडी में भरी गाड़ी तो जाने दे रहे हैं, खाली गाड़ी रोक ली जा रही है, जिससे माल उठ नहीं रहा है। भुखमरी से बचाने के लिए इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा जाना बहुत जरूरी है।

ShashiKant Singh : ब्रेकिंग न्यूज़ – मुम्बई में समाचार पत्रों का प्रकाशन अनिश्चित काल के लिए हुआ बन्द… देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में पहली बार ऐसा हुआ है कि कोरोना वायरस के खौफ से समाचार पत्रों का प्रकाशन अनिश्चित काल के लिए बंद करना पड़ा। बताते हैं कि रविवार को मुम्बई में समाचार पत्रों की प्रिंटिंग पूर्व की तरह हुई लेकिन जनता कर्फ्यू के कारण समाचार पत्र विक्रेताओं ने समाचार पत्रों को नही खरीदा जिसके बाद सभी प्रिंटिंग पेपर वापस अखबार प्रबंधन के लोगो ने मंगा लिया। उसके बाद रविवार की रात से मुम्बई की लाइफलाइन लोकल ट्रेन बंद हो गयी जिसे देखते हुए अखबारों का प्रकाशन नहीं हुआ।

सोमवार को समाचार पत्र विक्रेताओं के संगठन बृहनमुंबई वृतपत्र विक्रेता संघ ने उद्योगमंत्री सुभाष देसाई से मुलाकात की जिसमे सभी संगठन के प्रतिनिधियों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया।इस चर्चा में दिनोदिन बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षा को देखते हुए तय किया गया कि समाचार पत्रों का वितरण नहीं किया जाएगा।

उधर महाराष्ट्र सरकार ने पूरे महाराष्ट्र में कर्फ्यू लगा दिया है। राज्य में कर्फ्यू और ऊपर से लोकल ट्रेन बन्द। जब तक लोकल चालू नहीं होगी तब तक ज्यादातर प्रिंट मीडिया के कर्मी घर पर रहेंगे। ऐसे में मुम्बई में अखबारों का प्रकाशन कब शुरू होगा कोई नहीं जानता। आपको बता दें कि ऐसा पहली बार हुआ है जब इतने लंबे समय तक मुम्बई में लोकल ट्रेन और समाचार पत्रों का प्रकाशन बंद रहेगा।

कुछ अखबार ऑनलाइन एडिशन अपडेट कर रहे हैं।और रिपोर्टरो को बोलकर खबर मंगा रहे हैं। उधर राज्य सरकार और महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त ने एक आदेश जारी किया है कि राज्य में कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए सभी निजी कंपनियों को बंद किया जा रहा है। सरकारी परिपत्रक में कहा गया है कि न तो कर्मचारी को हटाना है और न ही उनका वेतन काटना है। ये सूचना कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है।

दिल्ली के पत्रकार सत्येंद्र पी सिंह और मुंबई के पत्रकार शशिकांत सिंह की एफबी वॉल से.

इन्हें भी पढ़ें-

क्या मोदीजी नहीं समझते हैं कि इसके बिना लॉक डाउन फेल हो जाएगा?

दुनिया भर से लॉकडाउन की खबरें थीं, हमारी सरकार ने तैयारी क्यों नहीं की?

हर समस्या के लिए पब्लिक को जिम्मेदार ठहराने वाले इस हरामखोर मिडिल क्लास को पहचानिए!

बिना योजना मोदीजी ने फिर भगदड़ मचा दिया… अबकी किसान, आदिवासी और बेरोजगार भुगतेंगे!

एक जरूरी पोस्ट- लॉक डाउन से दिल्ली-लखनऊ में कोई परेशान हो तो उसे ये जरूर बताएं!

  • भड़ास की पत्रकारिता को जिंदा रखने के लिए आपसे सहयोग अपेक्षित है- SUPPORT

 

 

  • भड़ास तक खबरें-सूचनाएं इस मेल के जरिए पहुंचाएं- bhadas4media@gmail.com

One comment on “क्या अखबार में भी घुसकर आ जाता है कोरोना?”

  • NOw public is assured and knows that CREDIBILITY of NEWS is lost & news papers (especially HINDI) have failed to serve their consumer/customer hence urge is lost & nobody is demanding for it even after such clarifications.

    लगेगी आग तो आएंगे कई मकान जद में _______ हुज़ूर अब अपने किये की आग अपने दर पर पहुंचने लगी है।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *