कांकेर | छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सल प्रभावित जगहों पर एनआईए की टीम द्वारा छापेमारी किए जाने की जानकारी सामने आई है. सूचना है कि आमाबेड़ा के एक स्थानीय पत्रकार समेत दर्जनों अलग-अलग जगहों पर छापा मारा गया है.
इनपुट है कि एक महीने के भीतर और भी कई लोगों के यहां छापा मारा जाना है.
सूत्रों का कहना है कि NIA के पास करीब 12 लोगों के खिलाफ तगड़े एविडेंस है, अभी सिर्फ छापेमारी इसलिए हो रही है कि और भी सबूत इकट्ठे किए जाने हैं, नक्सलियों के सहयोगियों में नारायणपुर और कांकेर जिले के बड़े बड़े रसूखदारों, नेताओ के नाम शामिल हैं. कुछ पत्रकारों के नाम भी हैं. गिरफ्तारियां शेष है, आज जो छापेमारी की कार्यवाही हुई वह सिर्फ सबूत तलाशने के लिए की गई थी, आगे गिरफ्तारियां भी होंगी.
भड़ास को राज्य के अलग-अलग जिलों के कुछ पत्रकारों ने बताया है कि बीते काफी समय से यहां के पत्रकार अत्याचार और अन्याय जैसे दिन काट रहे हैं. बिना किसी नियम कानून के घरों से फर्जी गिरफ्तारियां कर ली जा रही हैं.
यह भी सामने आया है कि अब कुछ पत्रकार इसका विरोध करने का भी निर्णय ले रहे हैं.
स्थानीय पत्रकारों का इस मसले पर कहना है कि, आमाबेड़ा क्षेत्र में लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे, वीरेंद्र पटेल (जिनके यहां एनआईए ने रेड की) के घर में उनकी अनुपस्थिति और बिना वारंट के महिला पुलिस का प्रयोग न करते हुए, पुलिस के काफी जवान अंदर घुसकर तलाशी लेने का बहाना कर रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि उसे किसी फर्जी या नक्सली मामलों में फंसाया जा सकता है.
वहीं, बताया जा रहा है कि वीरेंद्र पटेल की तरफ से कहा गया है कि उन्हें माओवादियों ने भी धमकी दे रखी है, जबकि पुलिस भी उसे फंसाने का प्रयास कर रही है. पटेल एक स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफार्म चलाते हैं, जिसके संपादक भी हैं.
प्राप्त सूचना के अनुसार, एनआईए ने धार 40 के अंतर्गत यह छापा मारा है. अभी और लोगों पर भी छापेमारी होने का प्रबल संभावना है.
इन पर आरोप लगा है कि नक्सलियों को विस्फोटक, दवाइयां एवं अन्य सामग्री पहुंचाया करते थे. छापेमारी की कार्यवाही सेंट्रल एनआईए की नहीं है, बल्कि राज्य NIA की तरफ से कार्यवाही की जा रही है.
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि वर्तमान सरकार पत्रकारों पर अत्याचार को लेकर कतई गंभीर नहीं है, अतः प्रदेश की राजधानी रायपुर में प्रदेश के समस्त पत्रकार संघ के नेतृत्व में बने संयुक्त पत्रकार महासभा के नेतृत्व में आंदोलन किया जाएगा. इसे लेकर तमाम पत्रकारों से आगामी 2 अक्टूबर को रायपुर में मौजूद रहने का आव्हा्न किया गया है.


