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निधि कुलपति के प्रोफेशनलिज्म ने उस दिन उनके आंसुओं को भी रोक दिया

उदय चंद्र सिंह-

जब प्रोफेशनलिज़्म ने आंसुओं को भी रोक दिया! निधि कुलपति… एक नाम जो न सिर्फ टीवी स्क्रीन पर खबरों की विश्वसनीय आवाज़ रही, बल्कि हमारे जैसे साथियों के लिए प्रोफेशनलिज़्म की मिसाल भी।

बहुत कम लोग जानते हैं उस एक दिन की कहानी… जब वो स्टूडियो में थीं, लाइव बुलेटिन पढ़ रही थीं, उसी वक्त उन्हें अपने जीवन की सबसे भारी खबर मिली…

ब्रेक आया तो उन्होंने फोन देखा – कई मिस्ड कॉल… और फिर घर से वो सूचना – उनके पति का दिल का दौरा पड़ने से निधन… सोचिए… वो पल कैसा रहा होगा…

हम स्टूडियो में सन्न रह गए थे। रन डाउन मैंने संभाल रखा था। समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाए…एकदम खामोशी छा गई। लेकिन… उस ख़ामोशी में भी एक आवाज़ गूंज रही थी – “द शो मस्ट गो ऑन!”

निधि ने उस बुलेटिन को पूरा किया… ख़बरें पढ़ीं… आउटपुट एडिटर के तौर पर मैंने रनडाउन छोटा किया, लेकिन ब्रेक का मतलब ब्रेक ही रहा। उन्होंने अपनी तकलीफ को, अपने आँसुओं को, स्क्रीन से पीछे रख दिया और देश तक ज़रूरी खबर पहुँचाई।

उस पल को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

उस दिन समझ आया कि एंकर होना सिर्फ कैमरे के सामने बैठना नहीं होता… यह एक जिम्मेदारी है, एक सेवा है और निधि जी ने इसे पूरी गरिमा, संजीदगी और हिम्मत से निभाया।

आज जब उनकी रिटायरमेंट की चर्चा हो रही है, मैं बस इतना कहना चाहता हूँ –

निधि कुलपति केवल एक एंकर नहीं थीं, वो पत्रकारिता की आत्मा थीं। आपका साथ, आपकी गरिमा, आपकी मजबूती – हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी।

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