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उत्तर प्रदेश

अवैध बिल्डरों के राजनीतिक गठजोड़ ने निवर्तमान जिला अधिकारी को हटवाया

नोएडा में अवैध कॉलोनियों पर प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई की तैयारी, 39 डेवलपर्स पर भू-माफ़िया का शिकंजा कसने की तैयारी

ओ पी श्रीवास्तव-

नोएडा, उत्तर प्रदेश — तेज़ रफ़्तार से विकसित हो रहा नोएडा शहर इन दिनों प्राइवेट बिल्डरों के अवैध निर्माण के जाल में फंसता जा रहा है। फेसबुक और व्हाट्सऐप पर खुलेआम प्रचार-प्रसार करने वाले ये बिल्डर सीधे-सादे लोगों को ज़मीन और फ़्लैट बेचने के नाम पर ठग रहे हैं।

हालांकि जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण समय-समय पर कार्रवाई करते हैं, लेकिन बिल्डरों की साठगांठ और राजनीतिक पहुँच के कारण ठोस परिणाम नहीं निकल पाते। जो अधिकारी इनके ख़िलाफ़ सख़्त कदम उठाने की कोशिश करता है, उसका तबादला करा दिया जाता है। चर्चा है कि हाल ही में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा को भूमाफ़ियाओं के दबाव में हटाया गया, और अब निशाने पर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम हैं, जिन्हें ईमानदार और सख़्त अधिकारी माना जाता है।

62 सोसायटियां अवैध घोषित

सलारपुर पुलिस चौकी के पीछे प्राधिकरण की अधिसूचित व अर्जित ज़मीन पर 25 खसरा नंबरों में 62 से अधिक आवासीय सोसायटियां खड़ी की जा रही हैं। प्राधिकरण ने इन्हें अवैध घोषित करते हुए 15 जुलाई को नोटिस चस्पा किया था। 39 डेवलपर्स को निर्देश दिया गया था कि वे एक सप्ताह के भीतर निर्माण स्वयं ध्वस्त करें, अन्यथा कार्रवाई और खर्च की वसूली की जाएगी। किसी ने भी नोटिस का पालन नहीं किया।

भू-माफ़िया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

सोमवार को सीईओ डॉ. लोकेश एम ने नई जिलाधिकारी के साथ बैठक कर 39 डेवलपर्स को भू-माफ़िया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। भूलेख विभाग को खसरा-वार फ़ाइल तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

महर्षि आश्रम की ज़मीन पर भी कब्ज़ा

कई अवैध इमारतें महर्षि आश्रम की ज़मीन पर खड़ी हो रही हैं। 2018 से चल रहे इस निर्माण में प्राधिकरण की अधिग्रहित और कब्ज़ा प्राप्त ज़मीन भी शामिल है। कुछ खसरा नंबर किसानों ने ग़लत तरीक़े से अपने नाम दाखिल-खारिज करा लिए हैं, जबकि बाकी पर बिना अनुमति और मानचित्र स्वीकृति के निर्माण हो रहा है।

खरीद-फ़रोख़्त से दूर रहने की अपील

डॉ. लोकेश एम ने आम लोगों से अपील की है कि सलारपुर खादर पुलिस चौकी के पीछे खसरा संख्या 723, 724, 727 से 739, और 745 से 753 पर चल रहे अवैध निर्माण में किसी प्रकार की खरीद-फ़रोख़्त न करें, क्योंकि इससे वित्तीय नुकसान हो सकता है।

नोटिस पाने वाले डेवलपर्स व कंपनियां

नोटिस प्राप्त करने वालों में मोहम्मद अयूब, याकूब, सुनील शर्मा, राहुल शर्मा, सलीम, शमीम, एस.ए. प्रमोटर्स, प्रॉपर्टी अरीना इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड, महर्षि आश्रम, एनर्जी बिल्डिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, क्वालिस्टिक टेक्नोज प्राइवेट लिमिटेड, डालमिया लेटेक्स लिमिटेड, नीदरलैंड इंडिया कम्युनिकेशन इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, ब्रेकथ्रू इंटरप्राइजेज एलएलपी, स्टूडेंट इंटरनेशनल मेडिटेशन सोसायटी, सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, गोपाल सागर इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड, प्राइमस अल्टिमा, महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ, एकता बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड समेत कई नाम शामिल हैं।

मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जिन इमारतों को अवैध घोषित किया गया है, उन्हें जल्द ही ध्वस्त कर दिया जाएगा।

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