कटक। सौ साल से भी ज्यादा पुराने ओड़िया दैनिक ‘समाज’ के संस्थापक संपादक उत्कल मणि पंडित गोपबन्धु दास की 96वीं पुण्यतिथि पर 6 जुलाई को होने वाले आयोजन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भाग लेने पर संशय है। कार्यक्रम के आयोजक अखबार के नए-नए संपादक बने डॉ प्रवास आचार्य के खिलाफ आर्थिक अनियमितता का केस के चलते ऐसी संभावनाएं ओडिशा में व्यक्त की जा रही हैं। एक संस्था ने गत दिवस ओडिशा के राज्यपाल को सौंपे राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में मांग की है कि दागी लोगों के साथ मंच पर राष्ट्रपति का बैठना उचित न होगा।
ओडिशा की होने के कारण राष्ट्रपति, समाज के संस्थापक पंडित गोपबन्धुदास के लिए विशेष सम्मान रखती हैं। झारखंड की राज्यपाल पद पर रहने के दौरान वह कटक स्थित समाज अखबार के कार्यालय आयीं थीं। मुकदमों के मकडजाल में फंसी अखबार की संचालक संस्था लोक सेवक मंडल के कुछ आजीवन सदस्य खुद लाभ के चक्कर में फंसे हैं।
1921 में इस संस्था के संस्थापक लाला लाजपत राय थे। देश में 18 सेंटर के साथ ही संस्था अरबों की जमीन की मालिक है। इसकी ओडिशा में भी शाखा है जिसके जिम्मे अखबार का संचालन है। संस्था के अध्यक्ष राजकुमार चोपड़ा हैं और महासचिव डॉ प्रवास आचार्य हैं। आचार्य पर समाज रिलीफ फंड जुटाने को चंदाख़ोरी का मुकदमा धारा 420, 419 में कटक के थाना कैंटोनमेंट में दर्ज है। यह मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है। कथित धतकर्मों के चलते साख पर बट्टा लगने लगा है, नजीतन अखबार का पर्याय कहे जाने वाले समाज का प्रसार दिनों-दिन गिरता गया।
संस्था के पूर्व महासचिव और अखबार के प्रिंटर पब्लिशर निरंजन रथ को हाल ही में बर्खास्त कर दिया गया था। रथ ने बर्खास्तगी के निर्णय को हाइकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर कोर्ट ने रथ की बहाली के साथ ही अध्यक्ष व महासचिव को निर्देशित किया था कि रोजमर्रा के कामकाज जारी रखें पर नीतिगत निर्णय न लें। राष्ट्रपति को आमंत्रित करने का निर्णय समाज प्रबंध मंडल या लोक सेवक मंडल का नहीं था। किसी एक व्यक्ति के प्रयास बताए जाते हैं।
समाज के एक संचालक वर्तमान में समाज के प्रिंटर पब्लिशर और संपादक का पद प्रवास के पास है। निजहितों कि कारण बाकी सदस्य मौन हैं।
लाला लाजपत राय, पंडित गोपबन्धु दास, राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन, लाल बहादुर शास्त्री, कृष्णकांत, पद्मभूषण डॉ राधानाथ रथ सरीखे दिग्गज लोक सेवक मंडल के संचालक थे। समाज के संचालक मंडल में भी इनकी प्रत्यक्ष या परोक्ष सक्रियता रहती थी। वर्तमान समिति इन्हीं स्वनामधन्य लोगों की साख का खा रही है।
बर्खास्त कर्मचारियों व कुछेक संगठनों का कहना है कि राष्ट्रपति का तहे दिल से ज़वागत है। पर मंच पर उनके साथ डॉ प्रवास आचार्य की उपस्थिति उचित न होगी। लोगों का कहना है कि यह कार्यक्रम करतूतों को स्याह सफेद करने और ओडिशा में हनक दिखाने को आयोजित किया गया है। इसके सदस्य पहले नवीन पटनायक व वीके पांडियन के इर्दगिर्द मधुमक्खी की तरह भिनभिनाते थे, अब सीएम मोहन माझी व ओडिशा के रसूखदार भाजपा नेताओं की गणेश परिक्रमा में जुटे हैं।
विरोध का वीडियो यहां देखें… समाज अखबार






