‘हिन्दुस्तान’ में शशि शेखर के वफादारों का आखिरी विकेट भी गिरा!

मन्नू चंद्रा-

हिन्दुस्तान में शशि शेखर रिजीम तेजी के साथ खत्म हो रहा है। कोरोना काल में शशि शेखर के लगभग सारे सम्पादक और खास लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हिंदुस्तान के ब्यूरो चीफ रहे पंकज पाराशर ने भी इस्तीफा दे दिया है।

ग्रेटर नोएडा में बतौर ब्यूरो चीफ पंकज पाराशर की यह तीसरी पारी थी। पंकज ने अपना इस्तीफा गुरुवार की सुबह सीधे शशि शेखर को ही भेजा है। ग्रेटर नोएडा की जिम्मेदारी सेकेंड इंचार्ज सुनील पांडेय को सौंप दी गई है। जानकारी मिली है कि पंकज जल्दी ही अपना कोई वेंचर लेकर आ रहे हैं।

पंकज पाराशर, शशि शेखर के साथ करीब 16 सालों से काम कर रहे थे। जब शशि शेखर मेरठ में सम्पादक थे तो पंकज बुलंदशहर में थे। शशि शेखर अमर उजाला में समूह सम्पादक बनकर नोएडा आए तो पंकज को ग्रेटर नोएडा में ब्यूरो चीफ बनाया। इसके बाद नोएडा में ब्यूरो चीफ और गौतमबुद्ध नगर में तीनों विकास प्राधिकरणों में लम्बे अरसे तक रिपोर्टिंग की। जब शशि शेखर हिंदुस्तान आए तो पंकज भी उन चुनिंदा लोगों की टीम में थे, जिन्हें शशि शेखर अमर उजाला से साथ लाए थे। पहले ग्रेटर नोएडा, फिर नोएडा और दोबारा ग्रेटर नोएडा ब्यूरो का इंचार्ज बनाया।

बताया जाता है कि पंकज के लिए शशि शेखर का आदेश पत्थर की लकीर होता था। मुख्य संवाददाता पंकज पाराशर को हिंदुस्तान अखबार के सम्पादक भी कभी आदेश देने में सक्षम नहीं रहे। तुनकमिजाज और गुस्सैल पंकज पाराशर को शशि शेखर ने करीब 14 सालों से ब्यूरो चीफ बनाकर रखा। इस दौरान तमाम सम्पादक आए और गए लेकिन पंकज पाराशर को चाहकर भी नोएडा और ग्रेटर नोएडा से हटा नहीं सके।

अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पत्रकारों की एकजुटता और संगठनों का विरोध करने वाले शशि शेखर ने तब भी कुछ नहीं कहा, जब पंकज नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष बन गए। कोई शिकायत होती तो कहा जाता कि पंकज ने नोएडा में वायु सेना भूमि घोटाला, ग्रेटर नोएडा में नलगढ़ा भूमि घोटाला और चकबंदी घोटाला का खुलासा किया और कामयाबी हासिल की है। पंकज और एक बड़े नेता के बीच गतिरोध खुलकर सामने आया और दिल्ली से शिकायत की गई थी। तब भी शशि शेखर ने कुछ नहीं किया।

अब जिस तरह अचानक पंकज पाराशर ने इस्तीफा दिया है, उसे शशि शेखर के वफादारों का आखिरी विकेट बताया जा रहा है। इसके पीछे प्रताप सोमवंशी का लगातार बढ़ता असर भी बताया जा रहा है। इससे पहले मनीष मिश्रा, मनोज तिवारी और योगेश राणा की नौकरी कोरोना काल में गई हैं। यह सारे लोग शशि शेखर के दरबार में नवरत्न माने जाते थे। एक-एक करके सभी रुखसत हो गए।

बताया जाता है कि अमर उजाला नोएडा में काम करते वक्त पंकज ने यूपीपीएससी एग्जाम पास किया था, तब शशि शेखर के कहने पर प्रशासनिक नौकरी की बजाय पत्रकारिता को चुना था। अब इस तरह पंकज का अचानक इस्तीफा हिंदुस्तान में कुछ बड़े बदलावों की ओर इशारा करता है।

कुछ लोगों का कहना है कि करीब दो साल पहले किसी के दबाव में पंकज को नोएडा से हटाकर ग्रेटर नोएडा वापस भेजा गया था जिससे पंकज निष्क्रिय हो गए थे।

मन्नू चंद्रा द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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