सपा प्रवक्ता पंखुरी पाठक को हुई नमाज से दिक्कत, BJP में जाने की अटकलें

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भले ही हिन्दू-मुस्लिम एकता की लाख कोशिशें करें लेकिन उन्ही की पार्टी के नेता अजीबोगरीब बयान दे रहे हैं. समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता पंखुरी पाठक को अब रमजान के पवित्र माह में जुमे की नमाज से दिक्कत हुई है. इतना ही नहीं पंखुरी ने अपने फेसबुक पर भी इसको लेकर एक पोस्ट डाला है.

पंखुरी के पोस्ट के बाद सपाइयों में भूचाल आ गया है. कोई उन्हीं की पोस्ट पर जाकर संघी कह रहा है तो कोई उन्हें कुछ कह रहा है. पखुरी के पोस्ट पर सैंकड़ों कमेन्ट और हजारों लाइक आ चुके हैं.

सपाइयों में पंखुरी द्वारा इस तरह का पोस्ट रमजान के महीने में डालने से आक्रोश व्याप्त है. वहीं कुछ लोगों का तो स्पष्ट कहना है कि पंखुरी पाठक भाजपा में शामिल हो सकती हैं, हालांकि पंखुरी ने फेसबुक पर ही भाजपा में जाने की अटकलों को अफवाह बताया है.

दरअसल बताया जा रहा है कि पंखुरी पाठक का शुक्रवार को एग्जाम था और वह जिस रास्ते से जा रही थीं वहां जुमे की नमाज चल रही थी जिस कारण उन्हें जाम का सामना करना पड़ा. पंखुरी ने तत्काल अपने फेसबुक पर पोस्ट डाल दिया और नमाज से दिक्कत जाहिर कर दी. पोस्ट के आते ही सपा के मुस्लिम समर्थकों और कई बड़े युवा नेताओं ने अपना आक्रोश जाहिर कर दिया. पंखुरी को ट्रोल भी किया गया.

यह है पंखुरी पाठक का फेसबुक पोस्ट-

“मैं अपने एग्ज़ाम के दिन 30 मिनट से ज़ख़ीरा में जाम में फँसी हुई हूँ क्यूँकि सड़क पर नमाज़ चल रही है। धर्म के नाम पर जनता को इस तरह असुविधा देना सही नहीं हो सकता। इतनी गरमी में लोग टू और थ्री वीलर में घंटों से जाम में फ़सें हैं। उनमें छोटे बच्चे भी हैं। आज एग्ज़ाम शायद छूट ही जाएगा। क्या ये मेरे अधिकारों का हनन नहीं है?”

पंखुरी के इस पोस्ट के बाद से लोग सपा के बड़े नेताओं को शिकायत कर रहे हैं. पोस्ट पर ही कमेन्ट में सपा के मुस्लिम समर्थक सैय्यद अहमद रजा ने लिखा है कि ‘Aisa lag rha hai bhatia ji ki tarah aapko bhi BJP me jane ka dil ho baitha hai..Namaz se aapko dikkat ho rhi..to kyu nhi akhilesh ji ne..#masjid ka intezam kar dia..kabristan ki boundary karane se khoon laga ke shahadat dene ki kya zarurat thi..Kuchh masjid banwai hoti ..

सपा के एक अन्य समर्थक सरफराज अहमद ने कमेंट में लिखा है कि, “नमाज केवल 15 मिनट के लिये थी फिर रास्ता खुला था. कभी किसी मुस्लिम ने जागरण या काँवड़ यात्रा या किसी परिक्रमा या जुलुस के विरुद्ध कुछ कहा क्योंकि मुस्लिम समझता है धर्म क्या होता है, आप नहीं. लानत है आपके समाजवाद पर”.

कमेन्ट में ही मौ जुबैर खान राजपूत ने लिखा है कि , “आज मालूम पड़ा कि आखिर अखिलेश यादव की सरकार सत्ता में दोबारा वापस क्यों नहीं आयी, क्योंकि उन्ही की पार्टी में ऐसे विचारधारा रखने वाले लोग है, जय हो समाजवाद की इनके. वाह, एक विशेष वर्ग से तकलीफ इन लोगों को होती है और लोग भाजपा को दोषी करार देते हैं. सुनो अखिलेश जी या उनके चमचों अगर इसे पार्टी से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया तो तुम 2022 में भी आओगे याद रखना.”



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