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सियासत

पप्पू बनाम पनौती!

शीतल पी सिंह-

पप्पू साबित करने में बड़ा खर्च हुआ था। बड़ा वक्त लग गया था। लेकिन “पनौती”एक झटके में गली गली जा पहुँची! सिमी गरेवाल तक के यहाँ असर किये हुए है । उनके प्रोफ़ाइल पर लेटेस्ट स्कोर देखें…


Samar Anarya लिखते हैं…

कहीं किसी भीड़ वाली जगह में चले जाइए जहाँ कम से कम 100 पुरुष हों।
फिर ज़ोर से चिल्लाइये- हे पप्पू।

कम से कम 25 पलट के बोलेंगे हाँ।
क्यों? क्योंकि उनके माँ बाप ने बड़े प्यार से उनका घर का नाम पप्पू रखा होगा।

पप्पू मतलब प्यारा।
पप्पू मतलब मासूम।
पप्पू मतलब बेवकूफ भी- पर वो वाला नहीं, मज़े वाला। आप सच में किसी बेवकूफ को पप्पू नहीं कहते। बेवकूफ ही कहते हैं। आप पप्पू कहते हैं अपने सबसे प्यारे दोस्त को- अबे पप्पू ही हो क्या एकदम!

और अगर पप्पू मतलब बेवकूफ हुआ भी- तो मासूम बेवकूफ जिससे किसी को कोई नुक़सान नहीं है। जो किसी का नुक़सान कर भी नहीं सकता!

अब भीड़ छोड़िए।

किसी अकेले आदमी के सामने कहिए- हे पनौती।
असल में मत कहिएगा- दो चार दांत बाहर आ सकते हैं!

याद रखियेगा कि इस देश के कम से कम दो ढाई करोड़ माँ बापों ने अपने बच्चों का घर वाला नाम पप्पू रखा है, बहुत प्यार से।

ये भी कि 140 करोड़ के इस देश में एक भी माँ बाप ने अपने बेटे का नाम पनौती नहीं रखा है।

अजीब है कि अचानक करोड़ों ने मिल के एक का रख दिया!

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1 Comment

1 Comment

  1. Amit Mehta

    November 25, 2023 at 12:56 pm

    लेकिन पनौती लगातार 2001 से not out है, कांग्रेस मोदी को हरा नही पाई है, उसी पनौती ने लगातार दो बार केंद्र में स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाई है, 282 और 303 लोकसभा सीट के साथ, और पप्पू अपनी पार्टी को विपक्ष में बैठने लायक सीट नहीं दिला पाया, 2014 में 44 और 2019 में 52 सीट ही जीत पाया, पनौती ने पप्पू की खुद की अमेठी सीट से भगा दिया, पनौती जीत का दूसरा नाम है और हार का दूसरा नाम पप्पू, अब आप खुद ही अंदाजा लगा की कौन असली पनौती है

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