गोलेश स्वामी-
आज मेरे फैमिली फ्रेंड अमर उजाला और हिन्दुस्तान के पुराने सहयोगी पारस अमरोही नहीं रहे। बहुत दु:ख हुआ। क्योंकि पारस भाई के अभी जाने के दिन नहीं थे। एकेडमिक नाम उनका ओम प्रकाश शर्मा था। लेकिन उनका असली नाम उनके खास दोस्त ही जानते थे।
वे पारस अमरोही के नाम ही जाने जाते थे और स्वर्गारोहण के बाद भी इसी नाम से जाने जायेंगे। पारस भाई स्वतंत्र भारत, लखनऊ में भी काफी दिन रहे। नीचे दिया गया चित्र हिन्दुस्तान से उनके रिटायरमेंट का है।

जिसमें प्रधान संपादक श्री शशि शेखर जी पारस जी को विदाई स्मृति चिन्ह दे रहे हैं। ईश्वर पारस जी आत्मा को शांति दे और सुमन भाभी व बच्चों को इस वज्रपात को सहन करने की शक्ति दे। ओउम् शांति, शांति, शांति।
डॉ अतुल मोहन सिंह-
पत्रकारिता जगत के लिए दुःखद समाचार।
प्रख्यात वरिष्ठ पत्रकार और हम सबके अभिभावक तुल्य श्री पारस अमरोही (ओम प्रकाश शर्मा) जी के गोलोकवासी होने का अत्यंत दुःखद समाचार मिला है। अभी वह स्वस्थ और पूर्ण रूप से कार्यशील थे। कुछ दिन पहले ही उनसे बात हुई थी।

‘खलिहान’ पत्रिका को लेकर हमेशा चिंतित दिखते थे। श्री अमरोही जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता के सशक्त स्तंभ थे। उन्होंने अमर उजाला, हिंदुस्तान, स्वतंत्र भारत, नवभारत टाइम्स, असली भारत, बिजनौर टाइम्स, दैनिक प्रभात, खेत-खलिहान जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में सेवाएं दीं। पत्रकारिता को मिशन की तरह जिया।
उनसे मेरा परिचय तबसे था जब वह दैनिक प्रभात में संपादक थे। वहां से अवकाश प्राप्त होने के बाद वह ‘खलिहान’ पत्रिका और पोर्टल का प्रकाशन कर रहे थे। राजनीति, समाज, संस्कृति समेत कृषि विषयों में उनका कोई जवाब नहीं था।
श्री अमरोही जी का व्यवहार अत्यंत विनम्र, भाषा पर पकड़ मजबूत और सामाजिक विषयों को लेकर दृष्टिकोण स्पष्ट था। उनके निधन से पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को शांति और शोक संतप्त परिवार को यह असीम दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
साकेत शर्मा-
वरिष्ठ पत्रकार पारस अमरोही (ओम प्रकाश शर्मा) नहीं रहे… विनम्र श्रद्धांजलि
अंतिम संस्कार सुबह 10:30 बजे बक्खूखे धाम में संपन्न हुआ। अमरोहा नगर के जाने-माने पत्रकार, वर्तमान में लखनऊ निवासी श्री पारस अमरोही का आज रात्रि 10:00 बजे लखनऊ के एक अस्पताल में आकस्मिक निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
श्री पारस जी ने अपनी पत्रकारिता के करियर की शुरुआत दैनिक अमर उजाला से की। वे लगभग दो दशक तक दैनिक हिंदुस्तान दिल्ली में वरिष्ठ उपसंपादक भी रहे। लगभग तीन वर्ष तक वे विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक प्रवक्ता के लखनऊ संस्करण के संपादक भी रहे, तथा वर्तमान में कृषि पत्रिका का संपादन कर रहे थे।
पारस जी ने पत्रकारिता से संबंधित अनेक शोध पत्रों का लेखन कार्य भी किया। विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों में उन्होंने पत्रकारिता विषय पर अनेक व्याख्यान भी दिए। श्री अमरोही के रूप में हमने एक वरिष्ठ पत्रकार साथी को खो दिया है। ईश्वर से प्रार्थना है कि वह दिवंगत आत्मा को सद्गति प्रदान करे तथा शोक संतप्त परिजनों को धैर्य व शक्ति दे।



Aamir Kirmani
June 2, 2025 at 6:13 pm
वाकई बहुत दु:खद समाचार,मुझे बहुत अफ़सोस हुआ
आप लोगों की जानकारी के लिए बता दूं कि जब हिंदुस्तान अखबार 1995 (या 1996) में लखनऊ से प्रकाशित होना शुरू हुआ, तो स्टाफ रिपोर्टर के रूप में पारस अमरोही भाई की हरदोई में नियुक्ति हुई। उन्होंने अपनी लोकल टीम में मुझे भी जगह दी थी। लगभग एक साल तक वे हरदोई में हिंदुस्तान के जिला प्रभारी रहे। उनके साथ काम करने के दौरान मैंने उनसे काफी कुछ सीखा। उनकी उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं पर बहुत अच्छी पकड़ थी।
साल भर बाद उनको लखनऊ वापस बुला लिया गया। उनकी रिकमेंडेशन पर मैं हरदोई में हिंदुस्तान अख़बार का जिला प्रतिनिधि बनाया गया और लगभग 3 साल तक ब्यूरो चीफ़ रहा।
उनसे काफी कुछ सीखने को मिला। बहुत अच्छे मिलनसार शख़्स और बेहतरीन पत्रकार थे। खासतौर पर शब्दों का चयन बहुत अच्छा था।
विनम्र श्रद्धांजलि पारस भाई (एक बात और-उनका असली नाम ओमप्रकाश शर्मा था)
आमिर किरमानी, पत्रकार, हरदोई