पत्रकारों के लिए नई सरकारी गाइडलाइन जारी, कुछ संगठनों ने चिंता जताई

मोदी सरकार ने पत्रकारों के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि देश की सुरक्षा, संप्रभुता, अखंडता, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता के लिए हानिकारक तरीके से काम करने वाले पत्रकार अपनी सरकारी मान्यता निलंबित करा लेंगे या फिर खो देंगे. इसमें अदालत की अवमानना, मानहानि या अपराध के लिए उकसाना भी शामिल है.

कोई पत्रकार या मीडिया संगठन जिसका वह प्रतिनिधित्व करता है, झूठी/जाली जानकारी या दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो भी मान्यता को रद किया जा सकता है. ऐसी घटना में पत्रकार/मीडिया संगठन को केंद्रीय मीडिया प्रत्यायन समिति (सीएमएसी) द्वारा तय किए गए नियमानुसार कम से कम दो और अधिकतम पांच वर्षों के लिए मान्यता रद कर दी जाएगी. मान्यता प्राप्त मीडियाकर्मियों को सार्वजनिक/सोशल मीडिया प्रोफाइल, विजिटिंग कार्ड्स, लेटर हेड्स या किसी अन्य फार्म या किसी भी प्रकाशित कार्य पर भारत सरकार से मान्यता प्राप्त शब्दों का उपयोग नहीं करना होगा. ये अब प्रतिबंधित कर दिया गया है.

सेंट्रल मीडिया एक्रेडिटेशन गाइडलाइंस-2022 में आनलाइन न्यूज प्लेटफार्म के लिए काम करने वाले पत्रकारों की मान्यता के लिए दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं. सरकार ने कहा है कि न्यूज एग्रीगेटर्स को मान्यता देने के मुद्दे पर विचार नहीं किया जा रहा है.

मंत्रालय प्रधान महानिदेशक, प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की अध्यक्षता में सीएमएसी नामक एक समिति का गठन किया गया है जिसमें सरकार द्वारा नामित 25 सदस्य शामिल हैं. ये समिति दो साल तक काम करेगी और पत्रकारों की मान्यता को निलंबित करने के लिए जिम्मेदार होगी. आनलाइन समाचार प्लेटफार्मों के लिए नई नीति में मान्यता के लिए आवेदन करने वाले डिजिटल समाचार प्रकाशकों को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता), नियम, 2021 के नियम 18 के तहत सूचना और प्रसारण मंत्रालय को आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करनी होगी. ये भी बताना होगा कि उन्‍होंने तय नियमों की अवहेलना नहीं की है.

इसमें ये भी कहा गया है कि मान्‍यता के लिए आवदेन करने के दौरान आनलाइन प्लेटफार्म कम से कम एक वर्ष पुराना होना चाहिए. मान्‍यता देने से पहले इसके विजिटर्स और पेज व्‍यूज की भी जानकारी ली जाएगी. मान्‍यता पाने को आवेदन करने वाली वेबसाइट का भारत में एक रजिस्‍टर्ड आफिस जरूरी होगा। साथ ही इसका कोई संवाददाता दिल्ली या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित जरूर होना चाहिए. यदि आवेदक द्वारा दी गई जानकारी झूठी पाई गई तो अगले तीन वर्षों के लिए मान्यता के लिए आवेदन करने से वंचित कर दिया जाएगा.


The National Alliance of Journalists (NAJ) and Delhi Union of Journalists (DUJ) , jointly view with deep concern the rapidly increasing curbs on the media, with each new government move designed to restrict free reportage and free speech. The newly rewritten guidelines for central press accreditation once again reflect this deplorable tendency.

“They are ominous and also show signs of a colourable exercise of power, designed to browbeat journalists on what to report, the statement added, beside s being discriminatory against some national and premier organizations of journalists of long standing , which were not even consulted or included in the new committee.”, the statement added.

The guidelines include a veiled threat that accreditation can be withdrawn if a journalist “acts in a manner which is prejudicial to the sovereignty and integrity of India, the security of the State, friendly relations with foreign states, public order, decency or morality or in relation to contempt of court, defamation or incitement to an offence”. This is an omnibus clause that can be readily misused by the bureaucracy to punish media persons who do not toe the official line on any issue.

Since several prominent journalists have in recent times been charged under UAPA and sedition laws merely for tweets, this clause sounds ominous. Slapping such charges is easy for the authorities but they seldom stand up in court. Until any charges are proved, journalists must be allowed to carry on their professional work without hindrance.

We also feel that clauses requiring return of accreditation cards within a week of leaving or being asked to leave a news organization is too short a period. The time allowed to join another organization or to change the category under which accreditation was originally applied for should be increased.

Since the age of retirement is 58 years, all those who cross this age should be eligible for accreditation as veteran journalists. The policy currently recognizes only those above 65 years as eligible for this category.

We welcome the widening of the eligibility criteria to include digital news media but regret that the quota for them is so limited. We urge that the number of accreditations allotted to them be increased as this media is growing rapidly.

We also agree with the Press Club of India and other bodies that “the consultative process associated with changes or amendments to the accreditation process had been done away with.”

Some of the changes in our view constitute: “a very discriminatory approach in a virtual undeclared Emergency times against independent critical thinking.”

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