
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक मोहाली की एक अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें कहा गया था कि पत्रकार राहुल पंडिता सीआरपीएफ के एक अधिकारी को 50 लाख रुपये का मुआवजा देंगे. मामला साल 2014 में अधिकारी के खिलाफ द हिंदू में कथित अपमानजनक आर्टिकल लिखने को लेकर था.
पंडिता ने यह आर्टिकल कथित तौर पर सीपीआई माओवादियों और सीआरपीएफ कर्मियों के बीच मुठभेड़ से संबंधित लिखा था. सीआरपीएफ में उस वक्त प्रतिनियुक्त पूर्व आईजी हरप्रीत सिंह सिद्धू ने आरोप लगाया कि, “आर्टिकल में उन्हें एक गैर-जिम्मेदार अधिकारी के तौर पर चित्रित किया गया.”
लाइव लॉ के अनुसार जस्टिस गुरबीर सिंह ने आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले को यह कहते हुए 21 अक्तूबर तक टाल दिया कि, “केवल अगली सुनवाई की तारीख तक आदेश के क्रियान्वयन को स्थगित रखा जाएगा.”
इस मामले में पंडिता के वकील ने कहा कि, अपीलीय न्यायालय ने उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की, क्योंकि जिन पतों पर समन भेजा गया, वे सही नहीं थे. याचिका में यह भी कहा गया कि, आर्टिकल व्यक्तिगत प्रवृत्ति के नहीं हैं या किसी भी तरह प्रतिवादी की निजता का हनन नहीं करते हैं. बल्कि, आर्टिकल उचित सावधानी से लिखे गए हैं.
आगे कहा गया कि आर्टिकल छत्तीसगढ़ में हुई घटना के संबंध में प्रकाशित किए गए, जिसमें प्रतिवादी की कमांड में लगभग 1500 सीआरपीएफ जवान, 80-90 माओवादियों के हमले को विफल नहीं कर सके. दो अधिकारियों समेत 14 जवान मारे गए और माओवादी भारी तादाद में गोला-बारूद और हथियार लूटने में सफल रहे. आर्टिकल जनहित में था, यानी जनता को इसे जानने में वैध रुचि है. आर्टिकल लोक सेवक के आचरण के संबंध में प्रकाशित किए गए, जो सार्वजनिक कर्तव्यों का पालन करते हैं.
पंडिता ने याचिका में यह भी तर्क दिया कि पत्रकार होने के नाते उन्हें वर्तमान मामले में घटित घटना पर निष्पक्ष टिप्पणी करने की अनुमति है. यदि अपीलकर्ता को उचित रूप से नोटिस दिया गया होता तो वह यह भी साबित कर सकता था कि आर्टिकल सटीक और सत्य दोनों है.


