
डॉ भानु सिंह-
रीवा (मध्यप्रदेश)। शहर में एक के बाद एक सामने आ रहे आर्थिक अपराधों ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आम लोगों पर मामूली गलती पर भी कड़ी कार्रवाई करने वाली पुलिस, एक सफेदपोश ठग के मामले में महीनों से सिर्फ “जांच जारी है” कहकर टालमटोल कर रही है।
यूनियन बैंक कियोस्क के नाम पर ठगी का खेल
अमहिया थाना क्षेत्र के PTS चौराहे पर पत्रकार विजय कुमार गुप्ता, निवासी ग्राम घुघुटा, यूनियन बैंक का ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) चलाता है। आरोप है कि बैंकिंग की आड़ और पत्रकारिता के संबंधों का फायदा उठाकर उसने भोले-भाले लोगों से करोड़ों रुपये ठगे।
हेमेंद्र सिंह से 9.50 लाख की ठगी
अरुण नगर निवासी हेमेन्द्र सिंह अपनी वृद्ध दादी की पेंशन निकालने CSP जाते थे। आरोपी ने भरोसा जीतने के बाद KCC में रकम जमा करवाने और भारी लाभ दिलाने का झांसा देकर ₹9.50 लाख उधार लिए, लेकिन बाद में रकम लौटाने से इंकार कर दिया।
विदिशा के डॉक्टर से करोड़ों की ठगी
विदिशा के डॉक्टर भानू को भी व्यापार में मुनाफे का लालच देकर आरोपी ने करोड़ों रुपये हड़प लिए। रकम मांगने पर बाउंस चेक थमा दिए, जो कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार थे, फिर भी पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
प्रधान आरक्षक के बेटे से 13 लाख की धोखाधड़ी
रामपुर नैकिन के सुखेन्द्र कुमार ने भी आरोपी को लाखों रुपये दिए। रकम वापसी में बाउंस चेक मिलने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया, जहां मामला लंबित है।
गंभीर धाराओं में भी कार्रवाई नहीं
लंबी देरी के बाद दर्ज हुई एफआईआर में धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 406 जैसी गंभीर व गैर-जमानती धाराएं जुड़ चुकी हैं। इसके बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, जिससे संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं उसे राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण तो नहीं।
जनता में आक्रोश
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि गरीबों के लिए पुलिस सख्त है, लेकिन बड़े ठगों के मामले में चुप रहती है। इस तरह की लापरवाही न केवल पीड़ितों का विश्वास तोड़ती है, बल्कि कानून-व्यवस्था की साख को भी कमजोर करती है।
जनता की मांग
आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी संपत्तियों और लेनदेन की विस्तृत जांच मामला आर्थिक अपराध शाखा को सौंपना मामले में देरी करने वाले अधिकारियों की जांच
पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।


