
अगर आप पत्रकार हैं और पत्रकारिता आपके भीतर ज़िंदा है तो कल आप प्रेस क्लब आयें और ऊपर दिए गए पैनल को अपना क़ीमती मत देकर विजयी बनायें। -महेंद्र मिश्र


भाई सुनील कश्यप जी प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का चुनाव लड़ रहे हैं। “कारवां” पत्रिका के लिए रिपोर्टिंग करने वाले सुनील भाई की कई रिपोर्टों से मैं मुताशिर नहीं होता हूं। लेकिन लोकतंत्र का असहमति और मतभेद तो श्रृंगार होता है। सुनील भाई मार्जिनलाइज्ड सोसायटी से आते हैं। जैसा कि आप सब जानते हैं कि बहुत मुश्किल से देश के मार्जिनलाइज्ड सेक्शन के लोग इन जगहों पर पहुंच रहे हैं। प्रेस क्लब जैसे जगह पर वंचित तबके की उपस्थिति बढ़े इस बात को लेकर मेरे अंदर का “ठाकुर” हमेशा हिमायती रहता है। इसलिए प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के चुनाव में मेरे जानने वाले जो भी वोटर उनसे मेरी अपील है कि सुनील भाई को अपना बहुमूल्य वोट देकर जिताएं. -राजीव सिंह जादौन
प्रेस क्लब चुनाव: 15 साल से मज़बूत वाम-उदारवादियों की पकड़, विरोधी फिर कमज़ोर
दिल्ली प्रेस क्लब एक बार फिर उसी माहौल में पहुँच गया है, जिसके लिए वह पिछले डेढ़ दशक से जाना जाता है—असहमति, सतर्कता और सरकार से दूरी बनाए रखने का दावा। क्लब के कई सदस्य लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार या उसके समर्थक संस्था पर प्रभाव डालने या कब्ज़ा करने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि क्लब का बड़ा हिस्सा हमेशा चौकन्ना रहता है।
13 दिसंबर को होने वाले वार्षिक चुनावों से पहले भी क्लब में सबसे ज़्यादा चर्चा इसी “सतर्कता” को लेकर है। वामपंथी धड़े का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ़ पदाधिकारी चुनने का मामला नहीं, बल्कि क्लब के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बचाए रखने की लड़ाई है।
आलोचकों का आरोप है कि क्लब पर लगभग पन्द्रह साल से काबिज़ वाम-उदारवादी खेमे को कोई भी छोटी चुनौती दिखाई दे तो उसे तुरंत मोदी सरकार की “कब्ज़ा रणनीति” का हिस्सा बताया जाने लगता है। यहाँ तक कि पत्रकारिता को बढ़ावा देने वाले फ़ेलोशिप जैसे सामान्य सुझावों पर भी क्लब के भीतर तेज़ विरोध देखने को मिलता है।
चुनौती देने वाले कम, दो पदों पर पहले ही निर्विरोध जीत
इस बार मुकाबला पहले से भी हल्का दिख रहा है। संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पद पर उम्मीदवार पहले ही बिना मुकाबले जीत चुके हैं। करीब 4,500 पत्रकार वोट डालने के पात्र हैं। इस साल 21 पदों के लिए सिर्फ़ 32 उम्मीदवार मैदान में हैं—2022 में यही संख्या 63 थी।
लगातार पन्द्रह साल से जीतते आ रहे वाम-उदारवादी गठबंधन के फिर से सत्ता में लौटने की चर्चा तेज़ है। उनके पैनल में इस बार फ़्रीलांस पत्रकार संगीता बरोआ पिशारोटी अध्यक्ष पद की उम्मीदवार हैं।
जतिन गांधी (Google News Initiative) उपाध्यक्ष, अफ़ज़ल इमाम महासचिव, पी.आर. सुनील संयुक्त सचिव और NDTV की अदिति राजपूत कोषाध्यक्ष पद पर लड़ रहे हैं। सुनील और राजपूत पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए हैं।
अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबला
अध्यक्ष पद पर तीन नाम मैदान में हैं—संगीता बरोआ पिशारोटी, वरिष्ठ पत्रकार अरुण शर्मा और फ़्रीलांस पत्रकार अतुल मिश्रा।
अरुण शर्मा मध्यप्रदेश के आदित्य एक्सप्रेस अख़बार के मालिक हैं। उन्होंने दिल्ली के राजावत टाइम्स के संपादक प्रहलाद सिंह राजपूत के साथ हाथ मिलाया है। राजपूत उपाध्यक्ष पद पर गांधी और जन भावना पत्रिका के वीरेंद्र प्रसाद सैनी के सामने हैं।
राजपूत-शर्मा खेमे ने मेन्यू रेट घटाने, सदस्यों के लिए बीमा, ईवीएम से चुनाव और मानसिक स्वास्थ्य शिविर जैसे वादे किए हैं।
आरएसएस संबद्धता वाले उम्मीदवार की चर्चा
इस बार कुछ स्वतंत्र उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इनमें महासचिव पद के प्रत्याशी ज्ञान प्रकाश भी शामिल हैं।
उम्मीदवारों की घोषणा के बाद क्लब के भीतर उनका आरएसएस वर्दी में एक फोटो वायरल हुआ। उन्होंने बिना झिझक अपनी संबद्धता स्वीकार भी की, जिसके बाद चुनावी माहौल में हलचल तेज़ हो गई।
ये हैं चुनाव अधिकारी
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) के महासचिव नीरज ठाकुर द्वारा जारी सूचना के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया प्रबंधन समिति की 15 नवंबर 2025 को हुई बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुरूप होगी। एमएमसी शर्मा को मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ सुभाष चंदर, विनोद सेठी, विजय लक्ष्मी, जे.आर. नौटियाल, नीरज कुमार रॉय, मनीष बेहड़, ई. कृष्णा राव और अभिषेक प्रसाद चुनाव अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि मतदान करने वाले सदस्यों को बैलट डालने से पहले अपने सभी बकाया चेक या नकद से जमा करने होंगे। प्रस्तावक और अनुमोदक के लिए भी नामांकन पर हस्ताक्षर से पहले बकाया साफ करना अनिवार्य होगा। क्लब ने यह भी दोहराया कि चुनाव बैलट पेपर से ही होंगे और इसमें केवल वही सदस्य भाग ले सकेंगे जो पीसीआई के उपनियमों और कंपनियां अधिनियम 2013 के प्रावधानों का पालन करते हों।
वर्षों से भारतीय प्रेस क्लब का सदस्य हूं. चुनाव के दौरान जब भी दिल्ली में रहा, मतदान करने जरूर गया. हर चुनाव में समझदार और तरक्कीपसंद लोगों के समूह या पैनल का समर्थन किया. लेकिन खुले तौर पर मैने किसी का प्रचार शायद ही कभी किया हो! पर इस बार सार्वजनिक तौर पर अपने दोस्त-पत्रकारों से अपील कर रहा हूं कि वे वरिष्ठ पत्रकार-लेखिका Sangeeta Barooah Pisharoty और उनके नेतृत्व वाले पैनल को रिकॉर्ड बहुमत के साथ जितायें! आज के दौर में मीडिया और पत्रकारों से जुड़े हर फोरम पर समझदार और साहसी पत्रकारों की असरदार मौजूदगी बहुत जरूरी है. दूसरी बात कि प्रेस क्लब के 68 सालों के इतिहास में पहली बार एक महिला पत्रकार ने अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया, वह भी Sangeeta Barooah जैसी प्रबुद्ध पत्रकार ने! इसलिए रिकॉर्ड तो बनना ही चाहिए.. विश्वास है रिकॉर्ड बहुमत से जीत कर संगीता बरुआ प्रेस क्लब के कामकाज को रचनात्मक और सकारात्मक दिशा देंगी!
-उर्मिलेश
अगर आप प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली के सदस्य हैं तो वोट ज़रूर कीजिए। पहली बार अध्यक्ष के तौर पर एक महिला के नेतृत्व में पैनल मैदान में है। वह भी Sangeeta Barooah Pisharoty जैसी प्रबुद्ध पत्रकार के नेतृत्व में। इसी टीम में जतिन गांधी और अफजल इमाम भी हैं। हमारे समय के प्रखर पत्रकार Sunil Kashyap का मैदान में उतरना आशंकाओं के दौर में एक गंभीर आश्वस्ति है।
आपसे अनुरोध है कि उन जुझारू लोगों के पक्ष में जमकर वोट डालिए जिन्होंने सच को सच कहना जारी रखा है। वोटिंग कल है। शनिवार १३ दिसंबर २०२५!
-नवीन कुमार




Neeraj Kumar Singhal
December 13, 2025 at 10:09 am
Sangeeta Barooah Pisharoty ko vot dikiye