प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पुणे पुलिस क्यों?

Prashant Tandon : प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पुणे पुलिस क्यों… इमरजेंसी की याद सरकार समय समय दिलाती रहती है. कल पुणे पुलिस प्रेस क्लब पहुँच गई और उस रजिस्टर के पन्ने की फोटोकॉपी ले गई जिसमे 20 अप्रैल को हुये एक कार्यक्रम का विवरण था.

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया एक मंच है और वहाँ अलग अलग तरह के विचारों के लोग अपने कार्यक्रम करते हैं. वहाँ मानवअधिकारों के लिये काम करने वाले भी सेमिनार करते हैं और कर्णी सेना के लोग भी प्रेस कान्फ्रेंस कर चुके हैं.

प्रेस क्लब का नियम है कि कार्यक्रम आयोजित करने के लिये हाल किसी सदस्य के ही नाम पर बुक होता है. सरकार के मंत्री भी आते हैं वहाँ. सरकारों और उनकी पुलिस को ये समझना चाहिये कि एक पत्रकार को सभी से बात करनी पड़ती है, समाज में चल रही तमाम बहसों से दो चार होना पड़ता है, हर तरह के लोगों के विचार और दृष्टिकोण को जानना होता है – इसमे सहमति असहमति का रोल कम है – ये एक पेशेगत ज़रूरत है.

प्रेस क्लब के सदस्यों को ये सुविधा इसीलिये है कि वहाँ तमाम मुद्दों और विचारों पर एक खुली बहस होती रहे. वहाँ किस कार्यक्रम के लिये हाल दिया जायेगा, उसमे कौन आयेगा और क्या बोलेगा इसमे सरकार की मंजूरी की ज़रूरत नहीं है.

Aflatoon Afloo : साहसी युवा पत्रकार विश्वदीपक पर महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रद्रोह का मुकदमा कायम किया है। मौलिक अधिकारों पर हमले के खिलाफ एकजुट होइए, प्रतिकार कीजिए। बुजदिल हाफ पैंटी सरकार की उल्टी गिनती शुरू कीजिए।

वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन और अफलातून अफलू की एफबी वॉल से.

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