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सुख-दुख

पीआईबी से मान्यता प्राप्त 90 प्रतिशत स्वतंत्र पत्रकार सिर्फ उपहार और सरकारी माल बटोरने के लिए पत्रकार बने होते हैं!

आनंद चौधरी-

पीआईबी से मान्यता प्राप्त 90 प्रतिशत स्वतंत्र पत्रकारों को पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं होता… वो सिर्फ उपहार और सरकारी माल बटोरने के लिए पत्रकार बने होते हैं..? कई तो नजरें छिपाकर चोरी भी करते हैं..!

ये मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से लिख रहा हूं। नेशनल मीडिया सेंटर से लेकर प्रेस क्लब तक, मैं कई ऐसे दिग्गजों से वाफिक हूं जिन्हें इस तरह के कार्यों में महानता हासिल है.. और ऐसे ही महान पत्रकारों की वजह से आज पत्रकारिता की इज्जत मिट्टी में मिलती जा रही है। ईमानदारी से पत्रकारिता करने वालों को भी गलत नजरिए से देखा जाने लगा है। ऐसे ही चंद लोगों की आढ़ में, तमाम पीआर एजेंसी और संवाददाता सम्मेलन के आयोजक भी खेल करने लगे हैं..?

अतः ऐसे में जो ईमानदार पत्रकार हैं, जो अपने पेशे के प्रति वफादार है। उन्हें इन पत्रकारिता के दलालों के खिलाफ सामूहिक रूप से खड़े होने की आवश्यकता है, और पीआईबी के अफसरों को भी ऐसे लोगों के प्रति अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की आवश्यकता है, ताकि जो भी थोड़ी बहुत पत्रकारिता की इज्जत बची हुई है वो बरकरार रह सके..!

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