संजय कुमार सिंह
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार में चुनाव प्रचार करते हुए रविवार को कहा, ‘कांग्रेस की कनपटी पर कट्टा रखकर आरजेडी ने सीएम पद चोरी किया’। आज तक डॉट इन ने इसे महागठबंधन पर पीएम मोदी का बड़ा अटैक (हमला) लिखा है। आज अखबारों में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। आज ज्यादातर अखबारों की लीड महिला वनडे में भारत को पहली बार विश्व कप मिलने की खबर लीड है लेकिन प्रधानमंत्री का यह बयान, खुलासा या आरोप – आप जो कहिए – बड़ी खबर है। अगर अखबारवाले इसे वाकई बड़ी खबर मानते तो आज यह खबर पहले पन्ने पर प्रमुखता से होनी चाहिए थी। खासकर तब जब पंजाब की पुलिस पर आरोप है कि अखबार ले जा रही गाड़ियों को जांच के लिए रोका गया। विपक्ष का कहना है कि आम आदमी पार्टी की सरकार मीडिया को निशाना बना रही है। आप जानते हैं पर आप नेता (राज्यसभा सदस्य) स्वाति मालीवाल का कहना है कि केजरीवाल ने पंजाब में शीश महल बना लिया है। इस बारे में मैंने कल यहां लिखा था। एक्स पर कल सुबह ही उन्होंने लिखा था, शॉकिंग!! खबर है कि पंजाब सरकार ने आज सुबह कई इलाकों में अखबारों के वितरण को रोकने की कोशिश की है। यह सब हो रहा है क्योंकि अरविंद केजरीवाल (जी) के शीश महल 2.0 की खबर पूरे पंजाब में आग की तरह फैल रही है। मीडिया घरानों को धमकी दी जा रही है कि अगर उन्होंने इस खबर को कवर किया या स्वाति मालीवाल को दिखाया, तो उनके सरकारी विज्ञापन बंद कर दिए जाएँगे। तानाशाही चरम पर! कल मैंने इसकी चर्चा नहीं की क्योंकि सरकारी विज्ञापन बंद करने की धमकी देने के लिए अखबार ले जाने वाली गाड़ी को रोकने की जरूरत नहीं थी। अखबार तब रोके जाते हैं जब उन्हें बंटने से रोकना हो। पर यह कोई रामबाण इलाज नहीं है और आज के समय में अखबार न भी बंटे तो खबर फैल ही जाती है। स्वाति ने भी यही लिखा था कि, खबर पूरे पंजाब में आग की तरह फैल रही है। लेकिन अखबारों की गाड़ियां रोकी गई थीं, अखबारों के बंडल गाड़ी से उतार कर सड़क पर रखे होने की तस्वीर उन्होंने साझा भी की थी।
मैंने कल यहां यही लिखा था कि, सोशल मीडिया पर पत्रकार ही नहीं, कोई भी, कुछ भी लिख देता है, गलती बताने पर भी नहीं मानता। यह मामला भी ऐसा ही था और खबर व आरोप अलग थे। फिर भी अखबारों की गाड़ियों को रोकना बड़ा मामला है। आज यह खबर इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में है। कल मैंने लिखा था कि इस मामले में स्वाति मालीवाल ही नहीं, भाजपा भी सक्रिय थी। खबर भाजपा के हवाले से ही थी। मीडिया में भाजपा की खबरें जैसे छपती हैं उसमें इस खबर को प्रमुखता नहीं मिलने का कोई कारण नहीं था और निश्चित रूप से यह पहले पन्ने की खबर है। अगर भाजपा सरकार ने ऐसा किया होता तो निश्चित रूप से अघोषित इमरजेंसी का मुद्दा बनता लेकिन आम आदमी पार्टी ने किया था इसलिए भाजपा समर्थक मीडिया को इसकी भी चिन्ता नहीं करनी चाहिए थी पर खबर को प्रमुखता नहीं मिली है। आज की दूसरी बड़ी खबर कनपटी पर कट्टा रखकर सीएम पद चोरी करने की है। लेकिन यह भी पहले पन्ने पर नहीं है। जाहिर है, अखबार वाले भाजपा और नरेन्द्र मोदी का समर्थन व उनका प्रचार करते हुए उनकी छवि का भी ख्याल रखते हैं। संभवतः इसीलिए आज इन दोनों खबरों को महत्व नहीं मिला है। यह अलग बात है कि पंजाब पुलिस ने कहा है कि उसे नशे की तस्करी की खुफिया जानकारी मिली थी इसलिए गाड़ियां रोकी और जांची गईं। पर यह बहाना भी हो सकता है। खबर यह नहीं बताती है कि अखबार बंट पाए या नहीं, जो अखबार की गाड़ी को रोकने का मकसद होता।
आज कल अखबारों की रिपोर्टिंग ऐसी ही हो रही है और कहा जा सकता है कि इसीलिए ऐसी हो रही है। अगर आज अखबारों ने प्रधानमंत्री के खुलासे को खबर के रूप में छापा होता और महागठबंधन पर पीएम मोदी का बड़ा हमला लिखकर इस राजनीतिक रंग नहीं दिया होता तो दुनिया जानती कि प्रधानमंत्री कैसे आरोप लगाते हैं और भाजपा के प्रधान प्रचारक के रूप में बिहार में किन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। प्रधानमंत्री विपक्ष पर ऐसे हवा-हवाई आरोप लगाते रहे हैं और चुनाव आयोग कुम्भकरण की नीन्द सोता रहा है। बिहार चुनाव में भी लगभग यही स्थिति थी और भारी दबाव में मुख्य चुनाव आयुक्त को मुंह खोलना पड़ा है। लेकिन प्रधानमंत्री का भाषण गौर करने लायक है। हिन्दुस्तान टाइम्स की सेकेंड लीड का शीर्षक भी आज भाजपा का चुनाव प्रचार या प्रधानमंत्री का भाषण ही है। शीर्षक है – प्रधानमंत्री ने कहा, विपक्ष अंदरूनी कलह और मतभेद में फंसा हुआ है। दि एशियन एज की लीड प्रधानमंत्री का चुनाव प्रचार ही है। शीर्षक है – मोदी ने कहा, विपक्ष बंटा हुआ है, कांग्रेस राजद को हराना चाहता है। कहने की जरूरत नहीं है कि चुनाव के समय, चुनावी रैली में मुख्य विपक्षी गठबंधन के बारे में ऐसा नहीं कहा जाना चाहिए। किसी आम कार्यकर्ता को भी नहीं कहना चाहिए लेकिन सबका मुंह बंद भी नहीं किया जा सकता है। इसलिए प्रधानमंत्री या वे खुद को प्रधान प्रचारक ही मानते हों तब भी, विपक्ष के बारे में बताने की क्या जरूरत? वह भी तब जब अपने बारे में नहीं बता रहे हैं।
गौरतलब है कि महागठबंधन ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया था तो उस पर इसके लिए दबाव पड़ा लेकिन यही दबाव भाजपा पर नहीं पड़ा। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि कनपटी पर कट्टा रखकर मुख्यमंत्री का पद चुराया गया। तथ्य यह है कि भाजपा या राजग गठबंधन ने मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। इसका कारण कोई भी जानना चाहेगा और प्रधानमंत्री जब विपक्ष पर आरोप लगा रहे हैं तो कोई भी पूछेगा कि आपकी कनपटी पर किसने कट्टा लगा रखा है या आप किन कारणों से अपने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं कर रहे हैं। अभी तक लोगों को यह तो समझ आ ही गया होगा कि भाजपा नीतिश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहती है। लेकिन चुनाव लड़ रही है। यह दावा भी है कि वही जीत रही है फिर मुख्यमंत्री किसे बनाना है, यह तो सोचा ही होगा। नहीं सोचा हो कि विधायक दल तय करेगा – संभव नहीं लगता है क्योंकि रेखा गुप्ता हों या मोहन यादव विधायक दल द्वारा चुने गए – ऐसा कोई नाटक भी नहीं हुआ। महाराष्ट्र में शिन्दे के पंख काटने और फडणविस को मुख्यमंत्री बनाने में कितना समय लगा – इसे भी दुनिया देख चुकी है। ऐसे में प्रधानमंत्री के आरोपों का कोई मतलब नहीं है। इसका स्तर पहले के आरोपों के मुकाबले और गिरा है। दिलचस्प यह कि इससे भी घटिया आरोपों पर विपक्ष ने शिकायत की या नहीं, चुनाव आयोग ने कुछ नहीं किया और छठ घाट जाने की तैयारियों को ड्रामा कहने पर छठ को ड्रामा बना दिया गया, चुनाव आयोग से शिकायत भी कर दी गई। यह सब तब जब एसआईआर और दूसरे तमाम कारणों से आरोप लग रहा है कि चुनाव आयोग भाजपा की मदद कर रहा है। फिर भी प्रधानमंत्री ऐसे आरोप लगाएं तो चुनाव आयोग के लिए निष्पक्ष दिखना मुश्किल हो जाएगा। और यह भी दिख रहा है।
बिहार चुनाव पर भिन्न पक्षों और पहलुओं की खबर देने वाले द टेलीग्राफ ने आज भी कई खबरें दी हैं। एक खबर यह भी है कि वोट के लिए प्रधानमंत्री ऑपरेशन सिन्दूर को भी ले आए। खबर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ऑपरेशन सिंदूर का ज़िक्र करते हुए दावा किया कि इसने कांग्रेस के “प्रथम परिवार” की नींद उड़ा दी है। इस तरह बिहार चुनाव प्रचार में उन्होंने पाकिस्तान और सेना को घुसा दिया है। मोदी पर पहले भी सेना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा था, जब उन्होंने 2019 के आम चुनाव प्रचार के दौरान पहली बार वोट देने वालों से अपना वोट पुलवामा के शहीदों और पाकिस्तान पर बालाकोट हवाई हमले को समर्पित करने का आग्रह किया था। मोदी ने आरा में एक रैली में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में विस्फोट हो रहे थे, लेकिन कांग्रेस का प्रथम परिवार यहाँ रातों की नींद हराम कर रहा था।” आरा वह क्षेत्र है जहाँ 2020 के विधानसभा चुनावों में महागठबंधन का दबदबा था। आप जानते हैं कि राहुल गांधी पर यह आरोप लगता रहा है कि वे चुनाव को गंभीरता से नहीं लड़ते हैं, विदेश चले जाते हैं, इसीलिए हार जाते हैं आदि आदि। ऐसे में जब कनपटी पर कट्टा रखकर सीएम का पद चुरा ही लिया गया है (राहुल गांधी की इच्छी सीएम बनने की होगी, यह तो कोई नहीं कहेगा) तो राहुल गांधी या कांग्रेस के प्रथम परिवार की चुनाव में कितनी दिलचस्पी होगी और नीन्द क्यों हराम होगी – यह सब कोई पूछता तो पता चलता। लेकिन वे तो मन की बात करते हैं और अखबार वाले उन्हें महान बनाने की कोशिश में चुन-चुन कर उनके महान दिखने वाले बयानों को खबर बनाते हैं।
यह दिलचस्प है कि अमर उजाला के साथ कुछ और अखबारों में राहुल गांधी के तालाब में कूदने की खबर है। एक पाठक के रूप में मैं जानता हूं कि अमर उजाला में राहुल गांधी पहले पन्ने पर बमुश्किल जगह पाते हैं। आज अमर उजाला ने प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को लगभग बराबर जगह दी है। फोटो के साथ ऊपर नीचे छपी खबरों में ऊपर वाला शीर्षक है प्रधानमंत्री मोदी का रोड शो… लोगों ने उतारी आरती। इसमें कहा है … छतों और बालकनियों से लोगों ने पुष्पवर्षा की। कुछ महिलाओं ने छतों पर से ही थाल में पीएम मोदी की आरती उतारी। जगह-जगह छठ गीतों की धुन और लोकनृत्य की झांकियां माहौल को सांस्कृतिक रंग दे रही थीं। दूसरी खबर का शीर्षक है, राहुल का जल संपर्क… मछली पकड़ने के लिए तालाब में कूदे। इसमें कहा गया है, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी रविवार क स्थानीय मछुआरों के साथ पारंपरिक तरीके से मछली पकड़ने के लिए तालाब में कूद पड़े। …. तालाब से बाहर निकलते हुए कहा, राजनीति का असली अर्थ सत्ता नहीं, समाज से जुड़ाव है। …. भाजपा और जदयू ने राहुल के इस कार्यक्रम को चुनावी नाटक बताया। मैंने जो वीडियो देखा उनमें राहुल गांधी ने वोट और चुनाव पर कोई बात नहीं की। ना वोट मांगा। एक वीडियो में उस समय मौजूद लोगों ने भी कहा कि उन्होंने वोट नहीं मांगा। फिर भी इसे चुनावी नाटक कहा गया और हो सकता है हो भी। लेकिन राहुल गांधी, कांग्रेस या महागठबंधन शायद ही कहे कि मछली मारने को नाटक कहा गया। यह अंतर है और रेखांकित करने लायक है। रिपोर्टिंग त जे बा से बड़ले बा।
नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक, “विकसित बिहार का मतलब युवाओं को रोजगार : मोदी”। पता नहीं, प्रधानमंत्री को यह बात अब समझ में आई या अब बोल रहे हैं। सच्चाई यह है कि नीतिश कुमार 20 साल से सत्ता में हैं और नीतिश कुमार के साथ भाजपा भी 10 साल से बिहार की सत्ता में है। जो किया और दिया वह सब अपनी जगह है, पर बोलने-बताने के लिए कुछ होता तो बोल रहे होते और यह भी नहीं बोल रहे हैं कि महिलाओं के वोट खरीदने के लिए 10 हजार रुपए के हिसाब से पैसे दिए जा रहे हैं और यह वादा या गारंटी नहीं एडवांस पेमेंट (अग्रिम भुगतान) है। राजद सांसद मनोज झा ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि बिहार सरकार ने 17, 24 और 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को नकद भेज कर आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन किया है। मनोज झा ने लिखा है कि भुगतान की अगली प्रस्तावित तिथि 7 नवंबर है – जो बिहार में दूसरे चरण के मतदान से चार दिन पहले है। इस पर चुनाव आयोग की किसी प्रतिक्रिया की खबर नहीं है। खबर को पहले पन्ने पर जगह नहीं मिली सो अलग। नवोदय टाइम्स में एक और खबर है, (प्रधानमंत्री ने) पटना में रोड शो किया, गुरद्वारे में मत्था टेका। खबर में नहीं लिखा है कि उनके साथ मुख्य मंत्री थे या नहीं और नहीं थे तो क्यों? दूसरी ओर, जो प्रमुख लोग मौजूद थे उनका नाम तो है ही।
आज के अखबारों में बिहार चुनाव से संबंधित एक और खबर है, बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र में हुई दुलारचंद की हत्या के आरोप में बाहुबली और जनता दल यू के उम्मीदवार अनंत सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया है। हत्या 30 अक्तूबर को दिन में हुई और गिरफ्तारी शनिवार देर रात की गई। खबर के अनुसार अनंत सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया है और बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जेल में ही रहना होगा। खबरों के अनुसार, अनंत सिंह की गिरफ्तारी को लेकर जनसुराज पार्टी के मोकामा उम्मीदवार, पीयूष प्रियदर्शी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत की। उन्होंने कहा, वे 50 वाहनों के काफिले में घूम रहे थे और चुनाव प्रचार में भी शामिल हुए। जब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, तो उन्हें पहले ही गिरफ्तार कर लिया जाना चाहिए था। इस संबंध में अमर उजाला में मुख्य चुनाव आयुक्त के हवाले से छपा है, चुनाव में हिंसा कतई बर्दाश्त नहीं। इससे आप समझ सकते हैं कि बिहार चुनाव के सिलसिले में हो क्या रहा है, कहा क्या जा रहा है और आपको बताया क्या जा रहा है। प्रधानमंत्री लालू राज के जंगल राज और 2005 के डॉक्टर अपहरण कांड की चर्चा कर रहे हैं। मीडिया यह नहीं बताता कि इलेक्टोरल बांड के जरिए किससे कितनी वसूली हुई, शाहरुख खान के बेटे का मामला वसूली के लिए था या नहीं आदि आदि। ऐसे में देशबन्धु की खबर के अनुसार राहुल गांधी ने कहा है कि मोदी युवाओं को असल मुद्दों से भटकाते हैं। और जो सब कह रहे हैं वह तो ज्यादातर अखबारों में छप ही नहीं सकता। द हिन्दू में बिहार चुनाव में सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार की गिरफ्तारी की खबर पहले पन्ने पर है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


