
ज्ञानेश उपाध्याय-
परिवर्तन चूंकि प्रकृति का नियम है, तो उसे जीवन के किसी भी छोर पर चाहकर भी लागू होने से रोका नहीं जा सकता। एक परिवर्तन हमारी प्रिय वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका जयंती रंगनाथन जी से जुड़ा है, जो लगभग चार दशक से हिंदी फीचर कंटेंट को शानदार बनाने और पेश करने के लिए सुविख्यात रही हैं।
एक दशक से भी ज्यादा समय से वह हमारे प्रिय दैनिक समाचार पत्र हिन्दुस्तान के फीचर पेजों को संवारती रही हैं। अब बदलाव यही है कि जयंती जी का विशेष स्नेह हिन्दुस्तान के फीचर पेजों को यथावत मिलता रहेगा, पर उनकी ही मजबूत टीम की वरिष्ठ सहयोगी प्रतिमा पाण्डेय जी ने फीचर में रोजमर्रा का काम संभाल लिया है।
बीते दो दशक के समय में हमने देखा है कि परिश्रम की धनी प्रतिमा पाण्डेय वास्तव में जयंती जी के सुरुचि-संपन्न फीचर स्कूल की ही एक शब्द-सेनानी हैं। प्रतिमा जी धीर-गंभीर समर्पित पत्रकार हैं, उनकी अपनी पहचान है।
बगैर शोरगुल, शांत भाव से उन्हें हमने अच्छा काम करते देखा है और आने वाले दिनों में उनका श्रेष्ठ हम देखेंगे। उन्हें बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। …और जयंती मैडम गई कहां हैं, बस एक कॉल भर दूर हैं।
प्रतिमा पांडेय-
इतने सुंदर शब्दों के लिए आपका आभार ज्ञानेश जी। शुभकामनाओं के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। जयंती जी से बहुत कुछ सीखा।जितना सीखा उसे सार्थक कर पाऊँ यही कोशिश रहेगी।
हेमराज तिवारी-
परिवर्तन प्रकृति का नियम है, पर जब परिवर्तन अनुभवी हाथों से सजे किसी सृजनशील संसार को छूता है, तो वह केवल बदलाव नहीं रहता — वह एक उत्तराधिकार बन जाता है, जिसमें अनुभव की परछाइयाँ और नई ऊर्जा की रोशनी एक साथ चलती हैं।
जयंती रंगनाथन जी केवल पत्रकार नहीं रहीं, वे एक विधा थीं — फीचर लेखन को जीवंत बना देने वाली, शब्दों को संवेदना का रूप देने वाली। उनका योगदान किसी संस्थान के पन्नों में नहीं, हज़ारों पाठकों की स्मृतियों में दर्ज है। इस दौर में जबकि पत्रकारिता अक्सर सतही हो जाती है, जयंती जी ने उसे संस्कृति और समाज की आत्मा से जोड़े रखा।
अब जब यह दायित्व प्रतिमा पाण्डेय जी ने संभाला है, तो यह आश्वस्ति मिलती है कि यह विरासत योग्य हाथों में है। प्रतिमा जी की पत्रकारिता में एक सधा हुआ संतुलन, गहराई और मूक समर्पण दिखता है — जो आज की दौड़ती दुनिया में दुर्लभ है। यह बदलाव एक सतत यात्रा की तरह है — जयंती जी की विरासत से प्रतिमा जी की दृष्टि तक।
प्रतिमा जी को हार्दिक शुभकामनाएं कि वे इस जिम्मेदारी को उसी गरिमा और संवेदना के साथ निभाएं, जो फीचर पत्रकारिता की आत्मा है। और जयंती जी, आप केवल एक नाम नहीं, एक प्रेरणा हैं — हमारे लिए, शब्दों के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए।
राजीव रंजन श्रीवास्तव-
प्रतिमा जी को नए दायित्व के लिए अशेष शुभकामनाएं। उनके साथ फीचर की टीम, जिसमें अरुण जेमिनी, पूनम, शाश्वती, किरण जैसे समर्थ पत्रकार हैं, हिन्दुस्तान की शानदार फीचर परम्परा को आगे बढ़ाएगी, इस भरोसे में रत्ती भर संदेह की गुंजाइश नहीं है। और आप जैसे प्रबुद्ध और परिपक्व पत्रकार इस टीम के हौसले और विश्वास बढ़ाने के लिए साथ हैं ही।
जयंती मैम को भी हार्दिक शुभकामनाएं। उनका मार्गदर्शन हिन्दुस्तान की फीचर टीम को सतत मिलता रहेगा, यह बहुत महत्त्वपूर्ण बात है।


