विदेश दौरों में खोए प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक भारत वासी की चिट्ठी

सेवा में आदरणीय नरेंद्र मोदी जी,

प्रधान सेवक / चौकीदार / चीफ ट्रस्टी

भारत सरकार, नई दिल्ली,

विषय :- भारत के नागरिकों की समस्याओं के समाधान के बावत ।

महोदय,  

आप दुनिया के जिस भी देश में जाते हैं वहां कुछ न कुछ भारत के खजाने से देते हैं जो कि हम भारतीयों की खून पसीने की कमाई से इकठ्ठा  किया गया धन है, आप उसे इस तरह बाँट रहे हैं जैसे आपको ये धन पारिवारिक बंटवारे में मिला हो । आपने चुनाव के समय कहा था मुझे एक मौका दीजिये मैं भारत की संपत्ति दुनिया के लुटने नहीं दूंगा और उसकी चौकीदारी करूँगा,पर ये क्या आपको मौका मिलते ही अरबों खरबों डालर ऐसे बाँट डाले जैसे भारत को अब इस धन की जरूरत ही नहीं है। आपने तो सत्ता मिलते ही कहा था कि पूर्ववर्ती सरकार ने देश का खज़ाना खाली कर दिया है फिर इतना पैसा जो आपने भूटान नेपाल श्रीलंका मंगोलिया सहित दर्जन भर देशों को दिया है ये कहाँ से आया या आपने रातों रात कमा लिए।

मोदी जी, ज़रा आसमान से नीचे उतरिये। अब आप भारत जैसे गरीब देश के प्रधानमंत्री हैं। लम्बी लंबी फेंकना छोड़ें और दस लखा सूट उतारकर उस देश को देखें जहाँ कभी आप चाय बेचते थे। आज भारत को आपके भाषणों की नहीं आपके काम की ज़रूरत है। आप कहते हैं अच्छे दिन आ गए। ज़रा वो चश्मा हमें भी पहनाएँ जिसको पहनने के बाद आपको और आपके भक्तगणों को अच्छे दिन दिखाई दे रहे हैं। भारत में मंहगाई, बेरोजगारी, कालाबाजारी, भ्रष्टाचार, गरीबी लगातार बढ़ रही है। किसानों से ज़मीन, मजदूरों से रोजी, कर्मचारियों से नौकरी, विद्यार्थियों से शिक्षा और छोटे दुकानदारों से उनकी रोजी रोटी छीनने का काम आपकी सरकार कर रही है। आप एक दिन में पांच सूट बदलकर ये दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि भारत से गरीबी ख़त्म हो गयी।

साहेब कभी वक़्त मिले तो आसमान से ज़मीन में उतरकर एक दो दिन ही सही भारत में ठहरकर यहाँ की समस्याओं से वाकिफ हो लें। हमें तो एक साल में कभी लगा ही नहीं कि आप भारत के प्रधानमन्त्री हैं और आपको इस देश की भी चिंता है।

अंत में एक निवेदन- साहेब, कुछ दिन तो गुजारो भारत में!

भवदीय

भारत की जनता


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