अटल जी पर दैनिक भास्कर में छपे इस कार्टून से ‘भक्त’ हैं नाराज!

अटल जी पर दैनिक भास्कर इंदौर में एक कार्टून छपा है. कार्टूनिस्ट लहरी क्या कहना चाहते हैं, इसको लेकर अलग-अलग आशय निकाले जा रहे हैं लेकिन जो ‘भक्त’ लोग हैं, वह आशय कम निकालते हैं, एक्शन में ज्यादा रहते हैं. Continue reading

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इरफान ने कार्टून मैग्जीन ‘तीखी मिर्च’ लांच की, केजरीवाल ने किया विमोचन

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि आवाजों को दबाना जनतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. केजरीवाल ने कार्टूनिस्ट इरफान द्वारा लांच किए गए कार्टून पत्रिका ‘तीखी मिर्च’ का विमोचन करते हुए कहा कि आजकल जो माहौल है, ऐसे में पत्रकारों के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करना मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में कुछ कार्टूनिस्ट हैं जो अभी भी अपने कार्टूनों के जरिए इस स्वतंत्रता को जीवित रखे हुए हैं. कार्टून पत्रिका तीखी मिर्च के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसी आवाजों को आवाज देना हम सबकी जिम्मेदारी है. तभी यह जनतंत्र बचा रहेगा.

कार्यक्रम में आए जाने-माने अभिनेता पीयूष मिश्रा ने कहा कि वे ऐसे मुद्दों को इसलिए अपना समर्थन दे रहे हैं ताकि जिंदगी में एक दिन भी ढंग से जीवित रह सकें. उन्होंने एफटीटीआई मसले से जुड़ी बातों को भी यहां साझा किया. तीखी मिर्च दिल्ली से प्रकाशित एक द्विभाषी मासिक कार्टून पत्रिका है, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर देश-विदेश के प्रमुख कार्टूनों को स्थान दिया गया है. पत्रिका की संपादक आरती जैन ने कहा कि शंकर वीकली के बाद से देश में कार्टून पत्रिकाओं की कमी महसूस की जा रही थी. क्षेत्रीय स्तर पर कुछ पत्रिकाएं प्रकाशित होती रही हैं लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह कमी बरकरार थी और यह पत्रिका उसी स्थान को भरने का काम करेगी. इस अवसर पर कार्टूनिस्ट इरफान ने कहा कि वर्तमान में राजनीतिक तौर पर दबाव बढ़ा है और इसलिए राजनीतिक कार्टून की परंपरा खत्म हो रही है. इस पत्रिका के जरिए उनका यह प्रयास रहेगा कि वे राजनीतिक कार्टूनों को उनका उचित महत्व दिलवाएं.

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‘आउटलुक’ मैग्जीन ने महिला आईएएस अफसर को ‘आई कैंडी’ बता घटिया कार्टून छापा, अफसर ने लीगल नोटिस भेजा

हैदराबाद : एक महिला आईएएस अफसर जिसे जनता के अफसर के तौर पर जाना जाता है और जो सरकारी योजनाओं को लागू करने की दिशा में लेटेस्ट तकनीक के इस्तेमाल के लिए जानी जाती हैं, उसे ‘आउटलुक’ पत्रिका ने ‘आईकैंडी’ यानि ‘आंखों को लुभाने वाली’ बताते हुए एक घटिया किस्म का कार्टून प्रकाशित कर दिया है. साथ में एक आर्टिकल है जिसका शीर्षक है- ‘नो बोरिंग बाबू’. इसमें लिखा है कि हर मीटिंग में मौजूद महिला आईएएस अपनी खूबसूरत साड़ियों की वजह से फैशन स्टेटमेंट साबित होती हैं और मीटिंग में मौजूद लोगों के लिए आई कैंडी भी. आउटलुक मैगजीन में छपे कार्टून में महिला आईएएस अफसर को एक फैशन शो में रैम्प पर चलते दिखाया गया है.

कार्टून में यह भी दिखाया गया है कि तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव उनकी फोटो खींच रहे हैं. कार्टून में अन्य नेता उन्हें तिरछी नजरों से देखते नजर आते हैं. यह कार्टून महिला आईएएस अफसर के हैदराबाद में हुए एक फैशन शो में मौजूदगी से जुड़ा हुआ है. इसमें आईएएस अफसर अपने पति के साथ गई थीं. इससे भड़की महिला आईएएस अधिकारी ने मैग्जीन को लीगल नोटिस भेजा है और मांफी मांगने को कहा है.

आईएएस अफसर का नाम स्मिता सबरवाल है. वे तेलंगाना में पोस्टेड हैं. उनके पति अकुन सबरवाल एक आईपीएस अफसर हैं. आउटलुक मैग्जीन द्वारा खुद को आई कैंडी बताए जाने और एक विवादास्पद कार्टून छापे जाने से यह महिला आईएएस अफसर काफी नाराज हैं. उन्होंने आउटलुक को कानूनी नोटिस भेजा है. माफी न मांगने की सूरत में आपराधिक केस दर्ज कराने की चेतावनी दी है. उन्होंने इसे महिलाओं का अपमान बताते हुए आउटलुक प्रबंधन से कहा है कि वह पूरे देश की महिलाओं से माफी मांगे. उधर चीफ सेक्रेटरी राजीव शर्मा ने आदेश जारी कर मैगजीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

इस पूरे प्रकरण के बारे में आईएएस अधिकारी स्मिता सबरवाल का कहना है कि उन्होंने 14 साल सर्विस की है लेकिन मीडिया का ऐसा रोल उन्होंने आजतक नहीं देखा. इस लेख और कार्टून से बहुत दुख पहुंचा है. अगर आउटलुक मैग्जीन वाले ऐसा एक ब्यूरोक्रेट के साथ कर सकते हैं, जो गंभीर काम कर रही हैं तो सभी तरह की महिलाएं इस तरह की पीत पत्रकारिता का शिकार हो सकती हैं. हमें आगे आकर इसे खत्म करना होगा.

उधर, आउटलुक मैग्जीन से जुड़े लोगों ने बजाय माफी मांगने के, उसने यह कहकर मामले को हलका करने की कोशिश की है कि उन लोगों ने संबंधित आर्टकिल में महिला आईएएस अफसर का नाम नहीं छापा है.

कई राजनीतिक पार्टियों ने भी मैग्जीन पर निशाना साधा है. कांग्रेस जिलाध्यक्ष ए राजेंद्र रेड्डी ने कहा कि कार्टून के जरिए अधिकारी के लुक्स और पहनावे पर कमेंट करने को गलत करार दिया.

उल्लेखनीय है कि 2001 बैच की आईएएस अफसर स्मिता सबरवाल सीएम ऑफिस में तैनात पहली महिला आईएएस अफसर हैं. 1977 में जन्मीं दार्जिलिंग की रहने वालीं स्मिता के पिता कर्नल पीके दास सेना में थे. 22 साल की उम्र में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास किया जिसमें उनकी चौथी रैंक थी. उन्होंने चित्तूर जिले में पहला प्रभार बतौर सब कलेक्टर संभाला. आंध्र प्रदेश के विभिन्न जिलों में एक दशक तक काम करने के बाद उन्होंने अप्रैल 2011 में करीमनगर जिले में डीएम का कार्यभार संभाला. बच्चों के विकास से जुड़े उनके एक कार्यक्रम को पीएम अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया जा चुका है.

महिला आईएएस अधिकारी स्मिता सबरवाल की कुछ तस्वीरें…

अपने आईपीएस पति के साथ महिला आईएएस अधिकारी…

अपने बच्चों के साथ महिला आईएएस अधिकारी….

अपने कार्यस्थल पर महिला आईएएस अधिकारी….

आउटलुक में प्रकाशित आर्टकिल यूं है…

The Insnider
Deep Throat
A regular column on the essential buzz

Telangana : No Boring Babu

The portfolio of a junior bureaucrat, who is posted in the Telan­gana CM’s office, is a mystery. She used to be posted in a district earlier. But things changed all of a sudden after the elect­ions. The lady is present at every meeting and seen in almost every official photograph sent out by the CMO. But what she does exa­ctly is a puzzle. She makes a fas­h­ion sta­tement with her lovely saris and serves as “eye candy” at meetings, admit leading party politicians. In fact, it’s this burea­ucrat who calls up other officials in the CMO and asks them to come for meetings. She knows exactly what time the CM will arrive and leave the office. The lovely lady, known for her ethnic style, recen­tly stunned all by appearing in a trendy trouser and frilly top at a fashion show. And for once, she wasn’t sitting in an official meeting. But this appearance too made for a great photo op.

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विदेश दौरों में खोए प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक भारत वासी की चिट्ठी

सेवा में आदरणीय नरेंद्र मोदी जी,

प्रधान सेवक / चौकीदार / चीफ ट्रस्टी

भारत सरकार, नई दिल्ली,

विषय :- भारत के नागरिकों की समस्याओं के समाधान के बावत ।

महोदय,  

आप दुनिया के जिस भी देश में जाते हैं वहां कुछ न कुछ भारत के खजाने से देते हैं जो कि हम भारतीयों की खून पसीने की कमाई से इकठ्ठा  किया गया धन है, आप उसे इस तरह बाँट रहे हैं जैसे आपको ये धन पारिवारिक बंटवारे में मिला हो । आपने चुनाव के समय कहा था मुझे एक मौका दीजिये मैं भारत की संपत्ति दुनिया के लुटने नहीं दूंगा और उसकी चौकीदारी करूँगा,पर ये क्या आपको मौका मिलते ही अरबों खरबों डालर ऐसे बाँट डाले जैसे भारत को अब इस धन की जरूरत ही नहीं है। आपने तो सत्ता मिलते ही कहा था कि पूर्ववर्ती सरकार ने देश का खज़ाना खाली कर दिया है फिर इतना पैसा जो आपने भूटान नेपाल श्रीलंका मंगोलिया सहित दर्जन भर देशों को दिया है ये कहाँ से आया या आपने रातों रात कमा लिए।

मोदी जी, ज़रा आसमान से नीचे उतरिये। अब आप भारत जैसे गरीब देश के प्रधानमंत्री हैं। लम्बी लंबी फेंकना छोड़ें और दस लखा सूट उतारकर उस देश को देखें जहाँ कभी आप चाय बेचते थे। आज भारत को आपके भाषणों की नहीं आपके काम की ज़रूरत है। आप कहते हैं अच्छे दिन आ गए। ज़रा वो चश्मा हमें भी पहनाएँ जिसको पहनने के बाद आपको और आपके भक्तगणों को अच्छे दिन दिखाई दे रहे हैं। भारत में मंहगाई, बेरोजगारी, कालाबाजारी, भ्रष्टाचार, गरीबी लगातार बढ़ रही है। किसानों से ज़मीन, मजदूरों से रोजी, कर्मचारियों से नौकरी, विद्यार्थियों से शिक्षा और छोटे दुकानदारों से उनकी रोजी रोटी छीनने का काम आपकी सरकार कर रही है। आप एक दिन में पांच सूट बदलकर ये दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि भारत से गरीबी ख़त्म हो गयी।

साहेब कभी वक़्त मिले तो आसमान से ज़मीन में उतरकर एक दो दिन ही सही भारत में ठहरकर यहाँ की समस्याओं से वाकिफ हो लें। हमें तो एक साल में कभी लगा ही नहीं कि आप भारत के प्रधानमन्त्री हैं और आपको इस देश की भी चिंता है।

अंत में एक निवेदन- साहेब, कुछ दिन तो गुजारो भारत में!

भवदीय

भारत की जनता


यदि आप भी सच्चे भारतीय हैं तो इस मैसेज / चिट्ठी / पोस्ट को अपने मित्रों संग शेयर करें ताकि धीरे-धीरे शेयर होते होते ये चिट्ठी मोदी जी तक पहुंच जाए. इस आर्टकिल को सभी परिचित भारतीयों तक फैलाएं ताकि हमें हमारा खोया हुआ प्रधानमन्त्री वापस मिल जाये ताकि जो सपने उन्होंने चुनाव से पहले दिखाए थे, उनमें से 10% तो पूरे हो सकें.


उपरोक्त पत्र एफबी / ट्वीटर आदि जगहों समेत पूरे सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जा रहा है. वहीं से साभार लेकर भड़ास पर प्रकाशित किया गया है.

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‘पैगंबर मोहम्मद पर कार्टून प्रतियोगिता’ में खून-खराबा, दो मारे गए

अमेरिका के टेक्सास प्रांत स्थित डालास के गार्लैंड शहर में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून पर एक बार फिर खूनी हंगामा हो गया. कल यहां कार्टून कॉन्टेस्ट का आयोजन किया गया था. इस्लाम की आलोचना करने वाले न्यू यॉर्क स्थित रूढि़वादी संगठन ने इस प्रतियोगिता का आयोजन किया था। इसी आयोजन में मोहम्मद पैगंबर का कार्टून बनाया गया. इसी दौरान सुरक्षाकर्मी पर हमला करने वाले दो युवकों को पुलिस ने मार गिराया. घायल सुरक्षाकर्मी को अस्पताल से घर भेज दिया गया है. 

रविवार को पैगंबर मोहम्मद पर एक कार्टून प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. गोलीबारी स्थानीय समयानुसार रविवार शाम सात बजे के आसपास कर्टिस कलवेल सेंटर के बाहर शुरू हुई। इस आयोजन के बाद चलती कार से जोरदार फायरिंग की गयी. जिसमें कई सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गये. हालांकि इसकी अबतक यह जानकारी नहीं मिली है कार्टून प्रतियोगिता के विरोध में फायरिंग हुई या उसका कोई और कारण था.  

इस प्रतियोगिता का आयोजन एक संगठन ने किया था. पैगंबर के बेस्ट कार्टून बनाने वाले को 10 हजार डॉलर के ईनाम की घोषणा की गयी थी. ध्यान रहे कि इस तरह के कार्टून पर शार्ली हेब्दो मैगजीन के दफ्तर पर हमला हुआ था इसमें कई कार्टूनिस्ट मारे गये थे.

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रेनाल्ड लुजियर अब नहीं बनाएंगे पैगंबर के कार्टून

पेरिस में मैगजीन के दफ्तर पर आतंकी हमला होने के बाद नए एडिशन में कार्टूनिस्ट रेनाल्ड लुज ने ही कवर पेज के लिए पैंगबर का कार्टू बनाया था। जिसके बाद 7 जनवरी को पेरिस में चार्ली हेब्दो के दफ्तर पर आतंकियों ने हमला कर गोलियां बरसाई थीं जिसमें दो पत्रकारों और दस -कार्टूनिस्ट सहित 12 लोगों की मौत हो गई थी।

यह पत्रिका साप्ताहिक व्यंग्य पत्रिका है, जो कई विवादित कार्टून छाप चुकी है। अपनी बेबाकी और विवादित कार्टून बनाने के लिए जाने-जाने वाली फ्रेंच मैगजीन चार्ली हेब्दो के हेड कार्टूनिस्ट ने एलान किया है कि वह अब पैगंबर मोहम्मद के कार्टून नहीं बनाएंगे। एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में रेनाल्ड लुज ने कहा, पैगंबर का कार्टून बनाने में अब मेरी कोई दिलचस्पी नहीं बची है।

उनके कार्टून बनाकर मैं ठीक उसी तरह ऊब चुका हूं जैसे कि निकोलस सर्कोजी के कार्टून बनाकर। लुज ने कहा कि आतंकवादी हमसे जीते नहीं बल्कि हारे हैं। आतंकवादी तब जीतते जब फ्रांस के लोग उनसे डर जाते, लेकिन ऎसा नहीं हुआ। गौरतलब है कि शार्ली एब्दो एक साप्ताहिक व्यंग्य पत्रिका है जो कार्टूनों के जरिए राजनीतिक सामाजिक मुद्दों पर कटाक्ष करती है।

आतंकवादियों ने इसी सील पेरिस में शार्ली एब्दो के ऑफिस पर हमला कर दिया था। इस हमले में 12 लोग की मौत हो गई थी। आतंकियों का कहना था पैगंबर का अपमान का बदला लेने के लिए ये हमला किया गया था। इस्लाम में पैगंबर को किसी भी रूप में चित्रित करना ईशनिंदा के दायरे में आता है। हालांकि इस हमले के बाद भी मैगजीन के स्टाफ और लुज का हौंसला नहीं टूटा और अगले एडिशन में उन्होंने फिर से कवर पेज पर पैगंबर का कार्टून छापा था।

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फेसबुक पर राष्ट्रपति का कार्टून लाइक करने पर पत्रकार को सजा

तुर्की में फेसबुक पर राष्ट्रपति का कार्टून लाइक करने पर कोर्ट ने पत्रकार याशर एल्मा को 23 महीने की सशर्त सजा सुनाते हुए टिप्पणी को राष्ट्रपति का अपमान करार दिया है। कोर्ट ने याशर एल्मा को पहले 28 महीने की कैद की सजा सुनाई। बाद में ऊपरी अदालत में अपील करने पर सजा घटाकर 23 महीने कर दी गई।

याशर एल्मा की वकील दिलबर देमिरेल कोर्ट के इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगी। उनका तर्क है कि ‘आलोचना’ और ‘अपमान’ में फर्क होता है। कोर्ट को दोनों का अंतर स्पष्ट करना चाहिए। तुर्की में किसी गैरसरकारी व्यक्ति का अपमान करने पर तीन माह की कैद का प्रावधान है। सरकारी कर्मचारी का अपमान करने पर सजा की अवधि एक वर्ष या उससे अधिक हो सकती है। 

याशर एल्मा ने मीडिया को एक व्यक्तिगत बातचती के दौरान बताया कि उन्होंने तो सिर्फ राष्ट्रपति के बारे में लिखी एक टिप्पणी को पढ़कर उसे लाइक कर दिया था। इसके आधा घंटा बाद उन्होंने अपना ’लाइक’ हटा भी लिया था। इसी दौरान उनके पास पुलिस टीम पहुंच गई। भला उन्हें क्या पता था कि फेसबुक पर टिप्पणी लाइक करना भी जुर्म है। 

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें- 

Journalist sentenced to jail for sharing Facebook post ‘insulting’ Erdoğan

A local journalist in the southeastern Turkish province of Gaziantep was handed a suspended prison sentence for sharing on Facebook another user’s post that the court said insulted President Recep Tayyip Erdoğan.

Journalist Yaşar Elma was convicted of “insulting a public official” for the post he shared on his Facebook page on July 16, 2014 and given a suspended sentence to serve one year and 11 months in prison. A lawyer for Erdoğan, who was still the prime minister at that time, was a co-plaintiff in the case. The Gaziantep court also ordered Elma to pay the lawyer’s TL 1,500 (approximately $580) fee.

Elma’s lawyer, Dilber Demirel, said she will appeal the ruling, insisting that the political figures should tolerate heavy criticism and that her client exercised his freedom of speech. Demirel also complained that the verdict opens the way for criminalizing the sharing of a post on social media platforms. “This means, you may be punished for sharing someone else’s opinions,” she was quoted as saying by private news agency Doğan.

Elma said he was not aware that sharing another user’s post was a crime. He also said he had deleted the post half an hours after he shared it on his Facebook page but was still called by the police after a while to give a testimony about the post.

It was not clear whether the user who originally published the post has also been prosecuted.

Scores of people, including journalists, students, activists and even a former Miss Turkey, have been prosecuted for “insulting” Erdoğan. Most cases have been launched under a law that bans “insulting the president” but several people have also faced the court on lesser charges of “insulting a public official” for statements that were made before he became the president in August 2014. 

According to a recent tally by opposition daily Sözcü, President Erdoğan has filed complaints on charges of “insulting” him against a total of 236 people since he was elected president in the election held on Aug. 10, 2014.(Cihan/Today’s Zaman)

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फेसबुक पर पोस्ट इसी कार्टून पर गिरफ्तार हुए थे असीम त्रिवेदी

अन्ना आंदोलन से जुड़े असीम त्रिवेदी को फेसबुक पर यूपीए सरकार के घोटालों को लेकर एक कार्टून पोस्ट करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। ‘भ्रष्टमेव जयते’ शीर्षक वाले इस कार्टून में संसद और राष्ट्रीय प्रतीक का मजाक उड़ाया गया था। असीम के खिलाफ पुलिस ने देशद्रोह का मामला भी दर्ज किया था। इस धारा के तहत गिरफ्तारी पर सबसे पहले विवाद 2012 में हुआ था, जब महाराष्ट्र के पालघर की रहने वाली शाहीन नाम की एक फेसबुक यूजर्स ने बाला साहेब ठाकरे की अंतिम यात्रा पर कमेंट किया था और उसे उसकी सहेली रीनू ने इसे लाइक किया था। दोनों को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में दोनों को जमानत मिल गई।

असीम त्रिवेदी का विवादित कार्टून

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एक कार्टून बनाने पर पुलिस ने अंबिकेश महापात्रा नाम के एक प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया था। जाधवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने यह कार्टून उस वक्त फेसबुक पर पोस्ट किया था, जब रेलमंत्री और अपनी पार्टी के सांसद दिनेश त्रिवेदी को ममता बनर्जी ने पद से हटा दिया था।

उत्तर प्रदेश के मंत्री आजम खान पर के खिलाफ विवादास्पद कमेंट करने पर पिछले दिनों बरेली में 11वीं के एक छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया था। न्यायिक हिरासत के बाद कोर्ट ने आरोपी छात्र विक्की खान को जमानत दे दी थी। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस से छात्र की गिरफ्तारी को लेकर जवाब मांगा है। आईटी एक्ट की धारा 66ए खत्म होने के बाद विक्की ने कहा,” इस धारा के खत्म होने से इंटरनेट पर अपनी बात कहने की आजादी मिलेगी। इस धारा के खत्म होने से मैं खुश हूं।”

यूपीए सरकार में मंत्री रहे पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ साल 2012 में ट्वीट करने पर पुडुचेरी के बिजनेसमैन रवि श्रीनिवासन की गिरफ्तारी हुई थी। कार्ति चिदंबरम द्वारा पुलिस से शिकायत किए जाने के बाद श्रीनिवासन को उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ भी धारा 66ए के तहत मामला चलाया गया था। बाद में वह जमानत पर रिहा हुए थे। इधर, धारा खत्म किए जाने पर कार्ति चिदंबरम ने नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कोई धारा खत्म होने का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि आपको सड़क पर किसी को गाली देने का हक मिल गया है। उन्होंने कहा, ”मैं फ्री स्पीच का समर्थन करता हूं लेकिन इसकी कोई सीमा होनी चाहिए। ”

कवि और लेखक कंवल भारती को साल 2013 में फेसबुक पर एक मेसेज डालने पर अरेस्ट कर लिया था। कंवल ने रेत माफिया पर नकेल कसने वाली आईएएस दुर्गाशक्ति नागपाल को सस्पेंड करने के लिए यूपी में सपा सरकार की आलोचना की थी।

(भास्कर से साभार)

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Tribute to the legendary cartoonist Mr. R.K.Laxman

The dexterous hand that held the brush that moved and captured the soul of India on the paper has stopped moving forever. 2015 is a year which will be marked for two major blows to the world of cartoons and the cartoonists. First the Charlie Hebdo massacre then the sad demise of our Legendry cartoonist Mr. R.K. Laxman whose  infallible strokes were instantly identifiable and his common man holding the iconic stature in the mindset of readers is the most familiar figure. Mr. Laxman stirred the world of politics by his brilliance and brought forth its stark realities lacing it with a pinch of humour here and a dash of satire there His common man is the ubiquitous silent observer who remains apathetic towards the vagaries of political upheavals, rampant corruption or financial crises.

 

Laxman’s cartoons captured the entire gamut of contemporary Indian Diaspora. his sketches infuses life on the paper and still pictures come alive giving the impression of the event  taking place right in front of the eyes of the reader. This unique feature sets him apart from rest of the cartoonists. His sketches can be felt as if brimming with life and his characters vouch fully pulsates with life. His powerful yet simple lines evoked vibrant and bustling village life where village folk can be felt working, cows and goats grazing, women cooking, smoke coming out of stoves, crows pecking at rotten food, dogs rummaging for leftovers, and city life where poor people reside inside pipes and rear their families there. Minister on the dais or rushing to catch the flight. The strong visuals also evoke sounds, and one can hear the cacophony of the city life, like  noisy loudspeakers, minister giving speech, the indistinct noises of people talking, vehicles honking etc.

Just opposite to this is the dormant, quiescent, and an inert presence of Laxman’s common man whose conspicuous and inexplicable silence has turned him into an enigma. At times he is bemused or little surprised but mostly has an apathetic presence as a passerby or a bystander. He belongs to that genre who are aware and affected but who chose not to speak out.  It is unusual that he never uttered a word ever since he was conceptualized and came into being. This contrast always gives an intriguing twist to Laxman’s cartoons.

Does the common man really represent the millions of this country? Are we Indians not politically and socially very vocal? At any tea stall or railway station or bus stop we can be seen indulging in vociferous discussion over either on cricket or politics. Administration fails when the common man takes to the streets to protest against price rise or any issue affecting him but In the same country where agriculture is the pre-dominant sector of the economy, it is an irony that farmer’s are doomed to end their lives. Similarly corruption in most of the segments leaves us hapless. Doesn’t this helplessness and vulnerability get reflected in the muteness of Laxman’s common man? The common man is helpless in his own country. It is these mute millions that he represents.

His satirical punch lines have covered almost every aspect of social and political life in India but I have not come across any cartoon that reflects on women plight in our country like, honour killings, female foeticide, dowry, illiteracy, gender inequality He definitely must have drawn on these issues but there should have been more cartoons on such topics for his cartoons were mightier enough to dwell deep into people’s psyche. Last but not the least; one can never miss on the fact that Mr RK Laxman had the distinction of being the only journalist who, by means of his chosen medium, covered perhaps every major political event in India over the last 50 years.


Political Cartoonist Mita Roy has been associated with The Pioneer, Swatantra Bharat, Blitz, Amar Ujala, Dharamyug, Sunday Mail, Outlook Saptahik etc. Her career started in 1985 which has been mentioned in a book on Advanced Journalism by Mr. Adarsh Km Varma(Ex Professor IIMC). Her work was referenced and discussed positively in a book on the history of cartooning in India. In particular the book ‘Caricaturing culture in India’ noted her contribution as the first woman political cartoonist in the Indian press. She is a cartoonist, a caricaturist, an illustrator, a painter and an animal activist. contact: mitaroy10@gmail.com

मूल खबर…

आम आदमी के सच्चे प्रतीक आरके लक्ष्मण नहीं रहे

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भारत के एक मुस्लिम नेता ने पत्रकारों-कार्टूनिस्टों की हत्या और आतंकी हमले को जायज ठहराया, ईनाम देने की घोषणा की

डेनमार्क के कार्टूनिस्ट और पत्रकारों की निर्मम हत्या का विरोध पूरी दुनिया कर रही है और पूरी दुनिया आतंक के विरोध में एकजुट होने का प्रयास कर रही है लेकिन भारत में बहुजन समाज पार्टी के एक नेता हाजी याकूब कुरैशी ने पेरिस में शार्ली एब्दो मैगजीन के दफ्तर पर हुए हमले का न सिर्फ समर्थन किया बल्कि यहां तक कह दिया कि अगर हमला करने वाले दावा करें तो उन्हें 51 करोड़ रूपये का इनाम दिया जायेगा.

शहीद पत्रकारों और कार्टूनिस्टों को श्रद्धांजलि देने के बाद मैग्जीन शार्ली एब्डो के समर्थन में एकजुटता दिखा रहे ‘एजेंसी फ्रांस प्रेस’ (फ्रांसीसी नेशनल न्यूज एजेंसी) के हांगकांग स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के मीडियाकर्मी.

दफ्तर पर हुए हमले को याकूब ने सही ठहराया और कहा, जो भी पैगंबर के प्रति अनादर दिखाएगा, उसकी मौत शार्ली एब्दो के पत्रकारों और कार्टूनिस्टों की तरह ही होगी.  बीएसपी नेता ने कहा- ‘पैगंबर की शान से छेड़छाड़ करने वाला सिर्फ मौत का हकदार है. ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने की कोई जरूरत नहीं है. इन लोगों को रसूल के चाहने वाले सजा देंगे.’  वे आगे बोले- पैरिस मैगजीन के पत्रकार धर्म के साथ खिलवाड़ कर रहे थे इसीलिए उनके साथ ऐसा सुलूक हुआ है.
 
भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज करायी है. पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, इस तरह का बयान भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करेगा. बसपा को इस तरह के बयान देने वाले को पार्टी में नहीं रखना चाहिए. इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार को भी इस तरह के बयान देने वाले के खिलाफ कड़े कदम उठाने चाहिए. हालांकि इस पूरे बयान पर अबतक बीएसपी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है.
 
याकूब ने 2006 में घोषणा कर दी थी कि कार्टूनिस्ट का सिर कलम करने वाले को 51 करोड़ का इनाम दिया जाएगा. इस बयान के बाद हलचल मच गयी थी. उन्होंने कहा यह उनके धर्म के साथ जुड़ा हुआ मामला है, इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए. याकूब का यह पहला बयान नहीं है जब वह विवादों में रहा है. इससे पहले भी उन्होंने कई विवादस्पद बयान दिये हैं. उनके बयानों के कारण उन्हें कई पार्टियों को छोड़ना पड़ा है.

उधर, फ्रांसीसी पत्रिका शार्ली एब्डो से जुड़े एक एडिटोरियल कर्मचारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को जानकारी दी है कि फ्रांसीसी पत्रिका शार्ली एब्डो अगले हफ़्ते अपने समय पर फिर निकलेगी. स्तंभकार पैट्रिक पेलू ने समाचार एजेंसी को बताया कि पत्रिका अगले हफ़्ते बुधवार को फिर निकलेगी ताकि बताया जा सके कि ”बेवकूफ़ी नहीं जीत सकती.” पेलू ने कहा, “यह बहुत मुश्किल है. हम सभी दुखी हैं और डरे हुए हैं लेकिन हम इसे इसलिए छापेंगे क्योंकि बेवकूफ़ी नहीं जीत सकती.”

उन्होंने कहा कि पत्रिका को शार्ली एब्डो के मुख्यालय के सामने रखा जाएगा जो फिलहाल हमले के बाद बंद है. शार्ली एब्डो के कई ऐसे ट्वीट रहे हैं, जो कट्टरपंथियों के गले नहीं उतरे. पेरिस में पत्रिका के दफ़्तर पर हमले से कुछ देर पहले पत्रिका के ट्विटर अकाउंट से किया गया आख़िरी कार्टून मीडिया में चर्चा का विषय है. पत्रिका के आधिकारिक ट्विटर हैंडल @Charlie_Hebdo_की तरफ़ से ट्वीट किए गए इस कार्टून में चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के नेता अबु बक्र अल-बग़दादी को दिखाया गया है. इस कार्टून के कैप्शन में लिखा है, “बेस्ट विशेज़, टु यू टू अल-बग़दादी.” (आप सभी को शुभकामानाएँ, अल-बग़दादी तुम्हें भी). जिसके जवाब में कार्टून में बग़दादी को कहते हुए दिखाया गया है, “एंड स्पेशली गुड हेल्थ” (और ख़ासकर अच्छी सेहत के लिए).

फ्रांसीसी समय के अनुसार यह ट्वीट बुधवार सुबह किया गया था. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इसे हमले के कुछ देर पहले पोस्ट किया गया या हमले के दौरान ही. लेकिन यह स्पष्ट है कि मीडिया में हमले की ख़बरों के आने से पहले इसे पोस्ट किया जा चुका था. इस बात को लेकर आशंका जताई जा रही है कि क्या इस ट्वीट से हमले को कोई संबंध है या नहीं. यह कार्टून पहले पत्रिका में प्रकाशित नहीं हुआ था लेकिन यह पत्रिका में प्रकाशित हो रहे कार्टूनों की कड़ी से जड़ा प्रतीत हो रहा है.

पत्रिका के इस हफ़्ते के अंक में एक कार्टून प्रकाशित हुआ था जिसमें कहा गया था, “फ्रांस में हाल में कोई हमला नहीं हुआ है.” लेकिन कार्टून का एक पगड़ीधारी चरित्र, जिसके पीठ पर क्लाशनिकोव बंदूक़ है, कह रहा है, “इंतज़ार करो- शुभकामानाएं देने के लिए हमारे पास जनवरी तक का वक़्त है.” फ्रांस में जनवरी के अंत तक नए साल की बधाई देने का रिवाज है. हमले के दिन ही इस कार्टून का प्रकाशित होना क्या महज़ संयोग है? फ्रांसीसी मीडिया में कुछ जगहों पर इस बात की आशंका जताई जा रही है पत्रिका का ट्विटर अकाउंट हैक कर लिया गया था. इस कार्टून पर पत्रिका के मशहूर कार्टूनिस्ट होनोरे के हस्ताक्षर हैं लेकिन यह स्पष्ट नहीं है क्या सचमुच उन्हीं का बनाया कार्टून है या इसे कब बनाया गया?

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पैगंबर मोहम्मह और अबु बकर बगदादी का कार्टून छापने वाली मैग्जीन के आफिस पर आतंकी हमला

पेरिस में ‘शार्ली एब्दो’ नामक एक व्यंग्य मैग्जीन के आफिस पर आतंकियों ने हमला कर दिया. कुल ग्यारह लोगों के मरने की खबर है. मरने वालों में दो पुलिसवाले भी शामिल हैं. मैग्जीन के कार्यालय पर एके-47 धारी नकाबपोश लोगों के एक समूह ने हमला किया. ‘शार्ली एब्दो’ नामक व्यंग्यात्मक मैगजीन में साल 2012 में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून छपा था. हाल ही में मैग्जीन ने आतंकी संगठन आईएस के चीफ अबु बकर अल-बगदादी का भी कार्टून छापा था.

मैग्जीन ने ईसा मसीह, ईसाइयत और फ्रांस के नेताओं पर भी करारे व्यंग्य व कार्टून छापे हैं. पत्रिका अपने तीखे कार्टूनों की वजह से पहले भी चर्चा और विवादों में रही है. काले रंग के नकाब पहने कई हमलावर एके-47 लेकर इमारत में घुसे और अंधाधुंध फायरिंग कर दी. हमलावर ‘पैगंबर का इंतकाम पूरा हुआ’ चिल्ला रहे थे.  आशंका है कि हमला इस्लाम से जुड़े विवादास्पद कार्टूनों को लेकर नाराज लोगों ने किया होगा.

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गंभीर बीमारी को मात देकर लौटे सुधीर तैलंग ने कार्टून प्रदर्शनी के जरिए फिर शुरू की सक्रियता

Prakash Hindustani : वाह ‎सुधीर तैलंग. ‬नई दिल्ली के इण्डिया हैबिटेट सेंटर की विजुअल आर्ट गैलरी में कार्टूनिस्ट मित्र सुधीर तैलंग के कार्टूनों की प्रदर्शनी का शानदार आगाज़. श्रीमती सुमित्रा महाजन, लालकृष्ण आडवाणी, सीताराम येचुरी, अरविन्द केजरीवाल, शीला दीक्षित, अलका लाम्बा, बिशनसिंह बेदी और सुधीर का पूरा परिवार एकत्र था. इतने अच्छे कार्टून! और उनकी इतनी सुसंयोजित प्रदर्शनी देखकर लगा कि इंदौर से आना सार्थक रहा. बेहद अनूठा अनुभव.

कार्टूनिस्ट ‎सुधीर तैलंग‬ की कुल 30 साल की बेहतरीन कार्टून कृतियों की प्रदर्शनी विजुअल आर्ट गैलरी, इण्डिया हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली में शाम 6 बजे से शुरू हुई.

नवभारत टाइम्स’ के मुंबई, दिल्ली (और उस वक़्त के लखनऊ और जयपुर) संस्करणों में मैंने करीब 8 साल साप्ताहिक कॉलम लिखा था ‘जिनकी चर्चा है’ उसमें चर्चित शख्सियत का कैरिकेचर कई साल तक सुधीर जी बनाते रहे. सुधीर जी के कारण भी यह कॉलम लोकप्रिय रहा.

सुधीर भाई अभी एक मुश्किल लड़ाई लड़ कर लौटे हैं. गंभीर बीमारी को मात देकर. स्वास्थ्य लाभ से लौटकर सुधीर जी फिर सक्रिय हो गए हैं. यशस्वी हों यही कामना है.

इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी के फेसबुक वॉल से.

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पत्रकारिता के ‘सेल्फी कुमारों’ पर मशहूर कार्टूनिस्ट इरफान की भी पड़ गई नजर, आप भी देखें

इन दिनों ‘सेल्फी पत्रकारिता’ का चलन है. सत्ता-सिस्टम जहां दिखे, वहां पत्रकार-संपादक लोग ‘सेल्फी कुमार’ बनकर सेल्फी बनाने उतारने लगते हैं. नरेंद्र मोदी ने मीडिया को बातचीत के लिए दिवाली मिलन के बहाने बुलाया तो पत्रकार लोग मोदी का भाषण चुपचाप सुनने के बाद मोदी से मिलने करने लगे और सेल्फियां बनाने लगे. यह प्रकरण चर्चा का विषय बना और सबने ‘सेल्फी कुमारों’ की निंदा, आलोचना की. कोई मुद्दा अगर जनमानस के बीच आ जाए तो भला कार्टूनिस्ट उससे कैसे बेखबर रह सकते हैं. जाने माने कार्टूनिस्ट इरफान की भी नजर इन ‘सेल्फी कुमारों’ पर पड़ गई तो उन्होंने पूरे वाकये पर कुछ कार्टून बना डाले.

जल में रहकर मगर से बैर न करने की कहावत कही जाती है लेकिन इरफान ने मीडिया के मांद में हाथ डालने से परहेज नहीं किया. इरफान की इसी जनपक्षधरता और पैनी नजर के कारण कई मीडिया हाउस और कई ‘सेल्फी कुमार’ टाइप मालिक व संपादक उन्हें फूटी आंखों पसंद नहीं करते. पर इरफान भी इसकी परवाह न करते हुए अपना काम जारी रखते हैं. इरफान के कार्टूनिस्ट जनसत्ता अखबार में लगातार छपते रहते हैं और कुछ न्यूज चैनलों पर भी इरफान का काम गाहे-बगाहे दिखता रहता है. तो लीजिए, आप भी मीडिया के सेल्फी कुमारों पर बनाए गए इरफान के कार्टूनों का आनंद लीजिए.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


और, ये कार्टूनिस्ट गोपाल का एक कार्टून…

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