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पुण्य प्रसून बाजपेयी को लेकर ये क्या बातें हो रही हैं! देखें वीडियो

विनीत कुमार-

टेलिविजन के दौर में नाम, शोहरत, पैसा और साख कमाकर, यूट्यूबर बने पुण्य प्रसून वाजपेयी ने सिर्फ और सिर्फ पैसे के लिए अपनी साख और भद्द कैसे पिटवाने का काम कर रहे हैं, अतुल चौरसिया ने भले ही मौज भरे अंदाज़ में यहां कहा है..लेकिन सच तो ये है कि हम अपनी आँखों के सामने टीवी के एक शानदार पत्रकार को ख़त्म होते देख रहे हैं.

पूण्य प्रसून वाजपेयी जो कुछ भी कहते हैं, उसके पास न तो कोई रिसर्च हुआ करती है, न ही तथ्य और न ही संतुलित भाषा. होता है तो सिर्फ हर आठवें दिन सरकार गिराने का दावा जिनसे गुज़रकर, सचमुच गिरने की कामना करनेवाले लोग इनका मज़ाक बनाने से अपने को रोक नहीं पाते.

देखें वीडियो-

https://twitter.com/saurabh_unmute/status/1846879026876428703?s=46

कुछ टिप्पणियाँ-

राहुल देव– हैरान तो मैं भी होता था उसके वीडियो के शीर्षक-थंबनेल देख कर लेकिन संकोच में चुप रहा। पूरे प्रवचन सुनने का कभी साहस नहीं हुआ। ठीक किया अतुल।

ख़ुशबू शर्मा– पुण्य प्रसून वाजपेयी अकेले पत्रकार नहीं है जिन्होंने इस सरकार के आने से अपनी नौकरी खोयी । उनके जैसे कई है जो यूट्यूब पर सरकार का सच दिखाकर जनता को जागरूक कर रहे है और इतना बेहतर कर रहे है कि लोगो ने टीवी देखना बंद कर दिया। पर शायद वाजपेयी जी को टीवी की बोहोत याद आ रही है!

विनीत कुमार– लेकिन ऐसा करके तो वो अपने ही दर्शकों की समझ खराब कर रहे हैं. जिन दर्शकों ने उन्हें प्यार और सम्मान दिया, उनका ही बंटाधार करने में लगे हैं.

आयुष रंजन– आज कल पैसा रुपया का ज़माना है भैया इसीलिए thumbnail एसा लगाता है बाकी ठीक ही बात बताते है बाजपेयीजी, लेकिन हमको समझ मे नही आता पता न क्या कहते है।

रोहित– अकेले @ppbajpai को बली का बकरा क्यों बना रहे हो?? ये काम तो तुम्हारा पूरा ecosytem कर रहा है।। यूट्यूब से मिलने वाले डॉलर और कांग्रेस पार्टी की तरफ से मिलने वाले buscuit ये सब करवा रहे है।।

अभय शक्ति– डिजिटल पत्रकारिता के इस सर्कस में, हमारे पास कुछ जोकर हैं, रेड माइक के सौरभ शुक्ला और न्यूज़लॉन्ड्री के लोग, जो सच के चैंपियन बनकर दिखने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन असली बात यह है कि इनका छिपा हुआ एजेंडा कुछ और ही है। ये एक-दूसरे को बदनाम करके अपनी लोकप्रियता बढ़ाने में लगे हैं। ईमानदारी की बातें करते देखना ऐसा है जैसे मुर्गे सुबह बांग दे रहे हों, ये नहीं जानते कि वे बस एक-दूसरे को नुकसान पहुँचा रहे हैं। असली मकसद है विवाद पैदा करना अपनी गलतियों को छुपा सकें और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच सकें। इसलिए जब ये अपना नाटक कर रहे हैं, तो साफ है कि जलने वाले सिर्फ ये खुद हैं क्योंकि दर्शक उनकी असलियत देख रहे हैं।

अमित त्रिपाठी– Ye bhi hain competition mai

रजनीश रंजन– 4pmnews_network wale ka bhi thumbnail kam krantikari nahi hota hai

सुशील– 4PM, Deepak Sharma, Ashok Wankhede, Nilu Vyas sab ka yahi haal hai.

सिद्धार्थ त्यागी– मैंने कई साल पहले ही कहा था की ये आदमी कोरी बकवास करता है, इसको यूट्यूब से अनफ़ॉलो किया और तार्किक बातों वालो को सुनना शुरू किया। सच कहूँ, इसके बाद अगला नंबर है डी बी लाइव, रवीश कुमार और प्रज्ञा का उल्टा चश्मा। सारे फ़िज़ूल की बकवास है। इनसे अच्छा काम तो नए लड़के कर रहे है।

विशाल मेहता– मैंने तो प्रसून जी का वीडियो देखना 3 साल पहले ही बंद कर दिया था। यही कारण था, लेकिन क्या करें, सीनियर पत्रकार है, घर चलाना भी है।

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