Ajit Sahi-
जैसा कि हम जानते हैं सितंबर 7-10 तक राहुल गाँधी अमेरिका में थे. राहुल शर्मा नाम के इंडिया टु़डे के एक पत्रकार ने आरोप लगाया है कि सितंबर 7 को राहुल गाँधी के भारत से अमेरिका पहुँचने के कुछ घंटे पहले टैक्सस के डालास शहर में कांग्रेस के समर्थकों ने उसके साथ ज़ोर-ज़बरदस्ती की और उसका फ़ोन छीन कर एक वीडियो डिलीट कर दिया. शर्मा का कहना है कि ये वीडियो सैम पित्रोदा के इंटरव्यू का था.
इस आरोप को लेकर राजदीप सरदेसाई ने सैम पित्रोदा का सितंबर 13 को इंटरव्यू भी किया. उस इंटरव्यू में पित्रोदा ने कहा कि वो इस आरोप की जाँच करेंगे.
फिर अगले दिन वो रिपोर्टर और इंडिया टुडे दावा करने लगे कि सैम ने रिपोर्टर के साथ हुए सुलूक के लिए माफ़ी माँग ली है. अब मोदी समर्थक पत्रकारों का एक दल इस बाबत एक केंद्रीय मंत्री से भी मिल आया है.
मगर सच्चाई क्या है?
सैम पित्रोदा ने एक स्टेटमेंट जारी कर के कहा है कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं. उन्होंने कहा है कि उन्होंने माफ़ी भी नहीं माँगी. मतलब इंडिया टुडे और राजदीप सरदेसाई झूठ बोल रहे हैं. पित्रोदा ने कहा है कि राहुल शर्मा ने उनका इंटरव्यू ज़रूर लिया था मगर उनपर कोई हमला नहीं हुआ.
जिस वक़्त राहुल शर्मा पित्रोदा का इंटरव्यू ले रहा था उस समय कमरे में कई लोग थे. विजयालक्ष्मी नादर नाम की एक अमेरिकी रिपोर्टर भी थी. उसने भी ट्विटर पर लिखा है कि राहुल शर्मा पर किसी ने कोई ज़बरदस्ती नहीं की और वो सही सलामत कमरे से बाहर निकल गया था.
सोचने की बात ये है कि तत्काल पुलिस में रिपोर्ट करना तो दूर राहुल शर्मा ने पाँच दिन तक इस बारे में कोई ट्वीट तक नहीं किया. बल्कि जब राहुल गाँधी की अगले दिन पब्लिक मीटिंग हुई तो राहुल शर्मा वहाँ ख़ुशी ख़ुशी घूम रहा था. अगर उस पर एक दिन पहले की कांग्रेसियों ने हमला किया तो उसने किसी से कंप्लेन क्यों नहीं की?
इंडिया टुडे और मोदी की मिलीभगत का शक़ इसलिए और गहरा होता है कि इधर राजदीप सरदेसाई ने पित्रोदा का इंटरव्यू किया और उधर मोदी ने एक पब्लिक रैली में इस झूठी घटना का ज़िक्र करके राहुल गाँधी और कांग्रेस को गाली दे डाली.
आप पित्रोदा का स्टेटमेंट इस पोस्ट के साथ लगी तस्वीरों में पढ़ सकते हैं. ये पित्रोदा के ट्विटर हैंडल से लिया है.





